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अन्ना की सभी मांगें सरकार ने मानी

अन्ना की सभी मांगें सरकार ने मानी

 

नई दिल्ली. 9 अप्रैल 2011

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ जन लोकपाल विधेयक की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे गांधीवादी नेता अन्ना हजारे की सभी मांगें सरकार ने स्वीकार कर ली है. सरकार के इस कदम के साथ ही अन्ना हजारे ने अपना अनशन खत्म करने पर सहमति जताते हुये कहा कि '' सरकार ने जिस तरह से सारी बातें मान ली है मुझे लगता है कि ये पूरे भारत की जनता की जीत है.''

अन्ना हजारे

समझौते के अनुसार संयुक्त समिति में पांच लोग नागरिक समाज के प्रतिनिधि होंगे और पांच लोग सरकार की तरफ़ से होंगे. संयुक्त समिति के अध्यक्ष कोई केंद्रीय मंत्री होंगे जबकि एक सह अध्यक्ष भी होगा जो नागरिक समाज की तरफ़ से समिति में शामिल पांच लोगों में से एक होगा. अन्ना हजारे समर्थकों ने अपने पैनल की भी घोषणा कर दी है. कमिटी के सह-अध्यक्ष शांति भूषण होंगे. ड्रॉफ्ट कमिटी में दूसरा अध्यक्ष सरकार की तरफ से होगा. अरविंद केजरीवाल, अन्ना हजारे, संतोष हेगड़े और प्रशांत भूषण मेंबर होंगे.

इस समझौते में सरकार की ओर से सबसे अहम भूमिका निभाने वाले केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने भी अन्ना की तर्ज पर ही कहा कि ये भारत के लोकतंत्र की ताक़त को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि मुद्दा ये नहीं है कि किसकी जीत और किसकी हार हुई है. इससे पता चलता है कि भ्रष्टाचार की लड़ाई में पूरा देश एक साथ हैं.

अन्ना के क़रीबी सहयोगी रहे पूर्व केंद्रीय क़ानून मंत्री और शांति भूषण ने कहा कि लोकतंत्र में कितनी शक्ति होती है ये अन्ना हज़ारे और उनके समर्थकों ने साबित कर दिया है. उन्होंने कहा कि 1977 के बाद से ये पहली इतनी बड़ी जीत है. अगर जनता अपनी शक्ति पहचान ले और शांतिपूर्ण तरीक़े से अपनी बात रखे तो सरकार को झुकना ही पड़ेगा.


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