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पत्रकार विकास झा को इंदु शर्मा कथा सम्मान

पत्रकार विकास झा को इंदु शर्मा कथा सम्मान

नई दिल्ली. 10 अप्रैल 2011


वर्ष 2011 के लिए अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान बिहार के वरिष्ठ पत्रकार कथाकार विकास कुमार झा को उनके उपन्यास मैकलुस्कीगंज पर देने का निर्णय लिया गया है. यह उपन्यास दुनियां के एक अकेले एंगलो-इंडियन ग्राम की महागाथा है. यह सम्मान विकास कुमार झा को लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में 27 जून 2011 की शाम को एक भव्य आयोजन में प्रदान किया जायेगा. यह जानकारी कथा यू के के महा-सचिव कथाकार तेजेन्द्र शर्मा ने दी.
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7 अक्टूबर 1963 को जन्मे विकास कुमार झा ने समाजशास्त्र में एम.ए. की डिग्री हासिल की है. वे रविवार, आउटलुक, एवं माया जैसी पत्रिकाओं के संपादन विभाग से जुड़े रहे हैं और निर्भिक पत्रकारिता के लिये देश भर में जाने जाते हैं. इन दिनों वे राष्ट्रीय प्रसंग पत्रिका के संपादक के रूप में कार्यरत हैं. वे हिन्दी एवं अंग्रेज़ी में समान रूप से लिखते रहे हैं. सम्मानित उपन्यास के अतिरिक्त उनका कविता संग्रह इस बारिश में, उपन्यास भोग, निबन्ध संग्रह – परिचय पत्र एवं स्वतंत्र भारत का राजनीतिक इतिहास– सत्ता के सूत्रधार प्रकाशित हो चुके हैं. वे टेलिविज़न पर ऐंकर के रूप में भी काम कर चुके हैं.

वर्ष 2011 के लिए पद्मानन्द साहित्य सम्मान इस बार लेस्टर निवासी कथाकार एवं ग़ज़लकार नीना पॉल को उनके उपन्यास तलाश के लिये दिया जा रहा है. अम्बाला भारत में जन्मी नीना पॉल ने एम.ए., बी.एड. की डिग्रियों के अतिरिक्त संगीत की भी बाक़ायदा शिक्षा ली है. सम्मानित उपन्यास के अतिरिक्त उनके पांच ग़ज़ल संग्रह कसक, नयामत, अंजुमन, चश्म-ए-ख़्वादीदा, मुलाक़ातों का सफ़र और एक उपन्यास रिहाई प्रकाशित हो चुके हैं. उनकी ग़ज़लों का एक ऑडियो सी.डी. कसक के नाम से भी जारी हो चुका है.

इंदु शर्मा मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना संभावनाशील कथा लेखिका एवं कवयित्री इंदु शर्मा की स्मृति में की गयी थी. इंदु शर्मा का कैंसर से लड़ते हुए अल्प आयु में ही निधन हो गया था.

 

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satish jayaswal [satishbilaspur@gmail.com] bilaspur, Chhattisgarh

 
  एंग्लो इंडियन समुदाय मनुष्य समाज की एक सुंदर प्रजाति है और इस प्रजाति का अस्तित्व विलुप्ति के कगार पर है. विकास कुमार झा के उपन्यास मैक्लुस्कीगंज में यह सुंदर प्रजाति अपनी पूरी जिजीविषा औऱ यंत्रनाओं के साथ जीवन पा रही है. एक सुंदर प्रजाति को जीलाये रखने वाले उनके इस उपन्यास को इंदु शर्मा पुरस्कार मिलना एक उपलब्धि भी है औऱ यह उपन्यास उसका उपयुक्त चयन भी है. उपन्यासकार औऱ चयनकर्ताओं को बधाई और साधुवाद. इससे इतर भी विकास कुमार झा ने जिस तरह मैक्लुस्कीगंज को यथार्थ में बचाने की कोशिश की, वह अपने आप में अद्भुत है.  
   
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