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उपराष्ट्रपति के भाई की साईकिल दुकान

उपराष्ट्रपति के भाई की साईकिल दुकान


नई दिल्ली, 26 जुलाई 2008.
दरभंगा के कुशेश्वर स्थान के गांव गरौल और नेपाल का क्या रिश्ता हो सकता है ? इसका जवाब आपको इस गांव में ही मिल सकता है, जहां इन दिनों जश्न का माहौल है. नेपाल के उपराष्ट्रपति बने परमानंद झा इसी गांव के हैं और उनके भाईयों समेत परिवार के दूसरे सदस्य इसी गांव में रहते हैं.

 

चार भाईयों में सबसे बड़े परमानंद झा अब नेपाल के उपराष्ट्रपति हैं और उनके छोटे भाई धनानंद झा हसनचक में साईकिल दुकान चलाते हैं. इस साईकिल दुकान से ही घर का गुजारा चलता है. हाल ही में उपराष्ट्रपति बने परमानंद झा ने अपनी पढ़ाई मधुबनी जिले के खजौली हाई स्कूल से की है और स्नातक की डिग्री उन्होंने मधुबनी के ही आर के कॉलेज से ली. उसके बाद वे नेपाल चले गए, जहां उन्होंने विधि की डिग्री ली. उच्च शिक्षा के लिए नेपाल के बाद उन्होंने बेल्जियम की राह पकड़ी.

धनानंद झा के अनुसार उनके परदादा शंकर झा पहलवान थे और उनकी ख्याति भारत से बाहर भी थी. नेपाल के तत्कालीन नरेश को जब उनकी जानकारी मिली तो उन्होंने शंकर झा को अपने यहां बुलाया और सेना में प्रधान की नौकरी देते हुए उन्हें नेपाल के सप्तरी जिले के मौवाहा में 2100 एकड़ जमीन भी दी. तब से परिवार के कुछ सदस्य वहीं रहते हैं.

उपराष्ट्रपति परमानंद झा नेपाल सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं. तराई की सबसे बड़ी पार्टी मधेशी जनाधिकार फोरम के सदस्य झा पिछले सप्ताह चतुष्कोणीय मुकाबले में विजयी होकर उपराष्ट्रपति बने हैं और फिलहाल परम्परागर नेपाली वेशभूषा के बजाय धोती कुर्ता पहनने और हिंदी में शपथ लेने के मामले में विरोधियों के निशाने पर हैं.


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