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लड़कियां रह सकती हैं साथ साथ-हाईकोर्ट

लड़कियां रह सकती हैं साथ साथ-हाईकोर्ट

बिलासपुर. 21 अप्रैल 2011


छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में दो बालिग लड़कियों को एक साथ रहने की अनुमति दे दी है. दोनों लड़कियां पिछले छह महीने से एक साथ रह रही थीं, जिसपर परिजनों की आपत्ति के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा था.

हाईकोर्ट में अपने सेवाकाल के अंतिम दिन जस्टिस धीरेंद्र मिश्रा ने इस मामले में फैसला सुनाते हुये कहा कि दोनों ही लड़कियां बालिग हैं और इनके साथ रहने को गैरकानूनी नहीं माना जा सकता. खुशबू के परिजन व रिश्तेदारों ने इस मामले में आपत्ति दर्ज कराई थी. हालांकि दोनों ही लड़कियों ने इस रिश्ते में जीवन भर साथ रहने का दावा किया है लेकिन उन्होंने समलैंगिक रिश्ते की बात पर कोई उत्तर नहीं दिया.

ज्ञात रहे कि छत्तीसगढ़ में 2008 में भी बिलासपुर की ही दो लड़कियों उर्वशी और सरस्वती ने आपस में शादी कर ली थी और साथ में रह रही थीं.

छत्तीसगढ़ में संभवतः पहला समलैंगिक ब्याह सरगुजा में ज़िला अस्पताल की नर्स तनूजा चौहान और जया वर्मा ने रचाया था. इसे देश में समारोहपूर्वक समलैंगिक विवाह का पहला मामला बताया जाता है.

27 मार्च 2001 को दोनों ने वैदिक रीति से विवाह किया था. पंडित जी के सामने 35 वर्षीय तनूजा ने पति के रुप में और 25 वर्षीय जया ने पत्नी के रुप में सात फेरे लिए. इस ब्याह के अवसर पर शानदार दावत दी गई थी और ब्याह को लेकर खूब हंगामा भी मचा.

दुर्ग ज़िले में तो डॉक्टर नीरा रजक और नर्स अंजनी निषाद ने समलैंगिक विवाह के लिए जिला प्रशासन को आवेदन भी दिया लेकिन ज़िला प्रशासन ने इस आवेदन को ठुकरा कर अपना पल्ला झाड़ लिया. हालांकि दोनों के जीवन पर इससे कोई फर्क नहीं पड़ा.

रायगढ़ से 40 किलोमीटर दूर एक गाँव में रहने वाली 20 साल की रासमति और 13 साल की रुक्मणी ने भी ब्याह रचाया लेकिन गांव में इस पर खूब हंगामा मचा और आखिर में दोनों को अलग-अलग रहने के लिए बाध्य कर दिया गया. बाद में इनमें से एक का ब्याह भी हुआ लेकिन जल्दी ही तलाक भी हो गया.