पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >राजनीति >उ.प्र. Print | Share This  

महेंद्र सिंह टिकैत का निधन

महेंद्र सिंह टिकैत का निधन

 

नई दिल्ली. 15 मई 2011

भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष महेंद्र सिंह टिकैत का रविवार को मुज़फ्फरनगर में निधन हो गया. 76 साल के टिकैत पिछले कुछ समय से बीमार चल रहे थे.

हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश में किसान समस्याओं को लेकर पिछले 30 सालों से सक्रिय रहे महेंद्र सिंह टिकैत पूरे देश में अपनी तरह के तेवर के लिये जाने जाते थे. दिल्ली के वोट क्लब हो या लखनऊ की विधानसभा, टिकैत के उठाये मुद्दे लगातार गूंजते थे. पिछले दिनों वो खाप पंचायतों के पक्ष में सरकारी निर्णय का विरोध करने के कारण चर्चा में आये थे.

टिकैत का जन्म 1935 में मुजफ्फरनगर के सिसौली गांव में एक जाट परिवार में हुआ था. किसानों की गरीबी और राजनीतिक सत्ता तक अपनी आवाज पहुंचाने में उनकी असफलता को टिकैत ने अपना मुख्य हथियार बनाया.

पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के निधन के बाद उन्होंने सफलतापूर्वक किसान आंदोलन की बागडोर अपने हाथों में ले ली और 17 अक्तूबर 1986 को गैर राजनीतिक संगठन ‘भारतीय किसान यूनियन’ की स्थापना की.

टिकैत के नेतृत्व में हुए आंदोलनों में 1987 में कारमुखेड़ा पावर हाउस का घेराव, 1988 का मेरठ मार्च, मार्च-जून 1988 में 110 दिन चला राजाबपुर सत्याग्रह, 1989 में नइमा (अपहृत मुस्लिम लड़की) वापस लाओ आंदोलन प्रमुख था.

वर्ष 1990 में जनता दल सरकार के खिलाफ प्रदर्शन, लखनऊ पंचायत का आयोजन एवं सात सूत्री मांग को लागू करने के लिए आंदोलन, गाजियाबाद के किसानों को मुआवजा दिलाने के लिए प्रदर्शन, चिन्हट काथुआटा के किसानों की अधिग्रहित भूमि के पर्याप्त मुआवजे के लिए आंदोलन आदि शामिल है.

इसके अलावा उन्होंने कई बार विश्व व्यापार संगठन और सरकार की कृषि नीति का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया.साल 2008 में मुख्यमंत्री मायावती के खिलाफ कथिततौर पर अपमानजनक भाषा का उपयोग करने के कारण उन्हें गिरफ्तार किया गया था.
 

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

deepak [dk2224@gmail.com] muzaffar nagar - 2011-05-17 07:28:57

 
  we loss a g8 nice person as well as a good political leader. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in