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विनायक सेन रहेंगे तो मैं नहीं- रमन सिंह

विनायक सेन रहेंगे तो मैं नहीं- रमन सिंह


रायपुर (छत्तीसगढ़) 18 मई 2011.
राजद्रोह के जुर्म में उम्र कैद की सजा पाए हुए डॉ. बिनायक सेन को देश के योजना आयोग द्वारा अपनी एक कमेटी में रखने पर छत्तीसगढ़ की ओर से कड़ा विरोध जताते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया को पत्र भेजे हैं. उन्होंने इस बात पर गहरा दुख और गहरी नाराजगी जताई है.

प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री ने लिखा है कि मीडिया में आई ये खबरें बहुत विचलित करती हैं कि स्वास्थ्य के बारे में योजना आयोग की एक कमेटी में डॉ. बिनायक सेन को सदस्य बनाया गया है. मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से और छत्तीसगढ़ की जनता की ओर से इस मनोनयन पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि बिनायक सेन को अदालत में राजद्रोह का दोषी पाते हुए सजा दी है और वे इसके सहित कुछ और कानूनों के तहत सजा से गुजर रहे हैं. उनकी अपील हाईकोर्ट में लंबित है लेकिन उनकी सजा पर रोक नहीं लगाई गई है.

डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री को लिखा है कि योजना आयोग इस देश की सर्वोच्च नीति-निर्धारक संस्था है जिसके मुखिया वे (प्रधानमंत्री) खुद हैं. इस पत्र में लिखा गया है कि योजना आयोग की साख बहुत महत्वपूर्ण है और इस नाते ऐसी संस्था में डॉ. बिनायक सेन को रखा जाना बहुत ही सदमे का मुद्दा है और यह तमाम तौर-तरीकों के खिलाफ भी है क्योंकि उन्हें ‹राज्य के खिलाफ युद्ध छेडऩे के आरोप में सजा मिली हुई है.

मुख्यमंत्री ने याद दिलाया है कि यह एक मान्य सिद्धांत है कि कोई भी व्यक्ति जो उम्र कैद की सजा काट रहा है, उसे राष्ट्रीय स्तर की किसी कमेटी में या ऐसे किसी मंच पर कभी सदस्य नहीं बनाया जाता और देश में ऐसी कोई दूसरी मिसाल भी नहीं है.

डॉ. रमन सिंह ने प्रधानमंत्री को याद दिलाया है कि उन्होंने खुद ही कई मौके पर यह कहा है कि वामपंथी उग्रवाद इस देश की आंतरिक सुरक्षा और यहां के लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है. उन्होंने लिखा है कि जब हम ऐसे उग्रवाद के खिलाफ केंद्र सरकार की मदद और सहयोग से एक बड़ी लड़ाई लड़ रहे हैं, उस वक्त इस कमेटी में डॉ. बिनायक सेन को रखने से इस नाजुक मौके पर जनता को गलतफहमी होगी.

उन्होंने लिखा है कि यह बात हैरान करती है कि इस पूरे देश में इस कमेटी में रखने के लिए और कोई भी व्यक्ति योजना आयोग को नहीं मिला? डॉ. रमन सिंह ने यह भी कहा है कि इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉ. बिनायक सेन के योगदान को बुरी तरह बढ़ा-चढ़ाकर बताया जा रहा है और हकीकत में ऐसी किसी बात के सुबूत नहीं हैं.

उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा है कि ऐसी स्थिति में वे बहुत तकलीफ के साथ यह फैसला ले रहे हैं कि जब तक यह मामला सुलझाया नहीं जाता, वे योजना आयोग की बैठक में नहीं जाएंगे. उन्होंने यह अनुरोध भी किया है कि प्रधानमंत्री दखल देकर इस मनोनयन पर पुनर्विचार करें.

एक दूसरे पत्र में डॉ. रमन सिंह ने कमोबेश यही बातें मोंटेक सिंह अहलूवालिया को लिखी हैं और उन्हें याद दिलाया है कि वामपंथी उग्रवाद के बारे में प्रधानमंत्री कई बार क्या कह चुके हैं.

 

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Deepak [deepakrajim@gmail.com] Abudhabi - 2011-05-24 19:19:52

 
  विनायक सेन तो बात कि बात है अगर तुम (रमन सिँग) ज्यादा दिन तक मुख्यमँत्री रह गये तो ये बस्तर और आदिवासी ही नही बचेँगे लगता है ..रोज दर्जनो जवान शहीद हो रहे है और ये दाँत-गिजोरी के सिवा कुछ कर तो नही पा रहे है ...इस रमन सिँग को विनायक सेन से बडा परहेज है और जो गुण्डे सँसद और विधानसभा मे पहुँच गये है उनका क्या ? क्या इस वजह से ये राजनीति का बहिष्कार करेँगे ? क्या इसे नरेँद्र मोदी से कोई परहेज होगा ? छ्त्तीसगढ कि पैकेज खाउ और चौपट-चापलुस मीडिया ने इसे हीरो बना दिया है नही तो ये इतना बडा आदमी है जितना साधु इसे दिखाया जाता है !! 
   
 

raghwendra sahu [raghwendrasahu@gmail.com] durg - 2011-05-18 17:00:26

 
  रमन सिंह की सरकार और यहाँ की पुलिस सबूत तो विनायक सेन के खिलाफ भी ठीक से नहीं जुटा पाई हैं लेकिन अप्रयाप्त सबुतों के आधार पर भी सजा दे दी गई. ये वही रमन सिंह हैं जो नक्सल्वाद के खिलाफ जंग की बात करते हैं लेकिन के पी एस गिल को बुलाकर नक्सल समस्या के समाधान के बजे रायपुर में बैठकर आराम करने की सलाह देते हैं. दोहरा चरित्र है ये रमण सिंह का.. आज विनायक सेन को इसलिए जेल जाना पड़ा क्योंकि उन्होंने सबसे पहले जन सुरक्षा कानून का विरोध किया साथ ही सलवा जुडूम और राहत शिविरों की हकीकत को भी मानवाधिकार के माध्यम से उजागर किया. यही वजह है कि विनायक सेन और सभी मानवाधिकार कार्यकर्ता रमन सिंह की आँख की किरकिरी बने हुये हैं. और सरकार के नुमाइंदे ही इन पर जब तब हमले करवाते रहे हैं. 
   
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