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बशीर बद्र से बातचीत

अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि हैः बशीर बद्र

भाजपा सांप्रदायिक नहीं

1992 में बाबरी ढांचा ढाहा जाना एक बेहद स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी.

 

जगजीत सिंह ने आठ गज़लें गाईं और उनसे एक लाख रुपए मिले.
अपने जमाने में गालिब ने कभी एक लाख रुपए देखे भी नहीं होंगे.


मशहूर शायर बशीर बद्र से एक मुलाकात की सुनील कुमार गुप्ता ने.



ये दुनिया बड़ी खूबसूरत हो गई है
मुझे तुमसे मोहब्बत हो गई है,
खुदा से रोज तुमको मांगता हूं,
मेरी चाहत इबादत हो गई है.

मैं हिन्दुस्तान और दुनिया को इसी नजर से देखता हूं. हां, यह सच है कि साठ साल पहले देश की आजादी के साथ मिला बंटवारा और उसके बाद हुए दंगों का दर्द हम आज तक भुगत रहे हैं, लेकिन जितना अमन और इंसाफ हमारे मुल्क में है, वह आपको ईरान, इराक, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ब्रिटेन या अमेरिका में नहीं मिलेगा.
पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के बाद जितने भी प्रधानमंत्री हुए हैं-इंदिरा गांधी से लेकर अटलबिहारी बाजपेई और अब मनमोहन सिंह तक सबने एक दूसरे से मिली विरासत और गौरव को आगे बढाते हुए दुनिया में हिन्दुस्तान का नाम रोशन किया है. हम एक बेहतरीन नेशन में रह रहे हैं और तरक्की के एक बेहतरीन दौर को देख रहे हैं.

मुल्क की तरक्की
मेरठ में मेरे पास ढाई कमरों का आशियाना था, अब 12 कमरों की हवेली है, जिसके हर कमरे में टीवी लगा है. तीन कारें हैं, चौथी देख कर आ रहा हूं. घर में केवल 3 लोग हैं, मैं, मेरी बेगम और मेरा बेटा. आज देश के ज्यादातर घरों में आपको टीवी, फ्रिज मिल जाएंगे, इसे आप तरक्की नहीं तो और क्या कहेंगे?

भूख, किसानों की आत्महत्या...
कर्ज के बोझ तले दबे किसानों की आत्महत्याओं से मैं भी परेशान होता हूं. हमने भी भूख देखी है और चाहत तो यह रहती है कि छोटे से छोटे आदमी को दो वक्त की रोटी मिले. लेकिन रसूल और गौतम बुध्द, गुरूनानक की तरह अपना निवाला कोई किसी और को दे दे, ऐसा अब कोई नहीं दिखता. मैं खुद भी ऐसा नहीं करता हूं. मैं किसी भी सरकार को गरीबी, किसानों की खुदकुशी, बढ़ते अपराधों के लिए जिम्मेदार नहीं मानता. हर सरकार ने देश की तरक्की के लिए काम किया है.

गुंडाराज
जहां तक बीते साठ सालों में पनपे गुंडाराज, दरोगा राज,बाबू राज, मजहबी उन्माद का सवाल है, बदमाश और बदमाशियां हर जमाने में रही हैं. मुल्क की आबादी के लिहाज से उसमें बढ़ोतरी भी दिखती है. मैं तो मानता हूं कि इंसान-इंसान है, वह हिन्दु-मुस्लिम, ईरानी-इराकी बाद में. इंसान खुदा की बनाई सबसे अच्छी चीज है, चाहे उसका नाम खुदा, राम, ईसा, मूसा कुछ भी हो. मेरे साथ रहने, काम करने वाले 90 फीसदी लोग हिन्दू और 10 फीसदी लोग मुसलमान रहे, लेकिन हिन्दू मेरे दुश्मन हैं या थे, ऐसा मै नहीं कह सकता.

मजहबी उन्माद
मजहब की बुनियाद पर अब पढ़े-लिखे लोग लड़ते और लड़ाते हैं. आम आदमी न तो उन्मादी होता है न दंगाई. आपको यह मालूम होना चाहिए कि दुनिया में सबसे ज्यादा झगड़े-फसाद शिया-सुन्नियों के बीच हो रहे हैं. पाकिस्तान में फौजी राष्ट्र्रपति परवेज मुशर्र्रफ फेल हो गए. पूरी दुनिया में कट्टरपंथियों ने उत्पात मचा रखा है. हमारे यहां तो फिर भी हालात बहुत बेहतर हैं. यहां हिन्दू-मुस्लिम गंगा-जमुनी तहजीब के साथ रहना चाहते हैं.

बाबरी मस्जिद
1992 में बाबरी ढांचा ढाहा जाना एक बेहद स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी. यह अभिलेखों में दर्ज और ऐतिहासिक तथ्य है कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है और वहां उनका मंदिर है, जिसे नष्ट कर औरंगजेब ने मस्जिद बना दी थी. एक ने वहां कुछ बनाया और दूसरे ने गिरा कर अपनी जगह वापस लेने की कोशिश की, इसे आप गलत कैसे कहेंगे? औरंगजेब ने तो यहां जितना खून बहाया, बाबरी ढांचा ढहाए जाने के बाद हुए झगड़ों में तो उससे कम ही बहा. हां, यह ज्यादा बेहतर होता कि दोनों मजहबों के लोग आपस में बैठ मसले को मोहब्बत से सुलझा लेते, फिलहाल तो यह मामला कोर्ट में है.


भाजपा सांप्रदायिक नहीं
भाजपा और उसके नेता सांप्रदायिक नहीं हैं. अटल बिहारी वाजपेयी बहुत अच्छे कवि और इंसान हैं, हो सकता है वह अयोध्या घटना के वक्त कुछ मजबूर रहे हों, लेकिन मैं उन्हें बहुत चाहता हूं और वह मुझे बहुत चाहते हैं. आज मेरे घर में मेरे पिता की तस्वीर नहीं है, वह मेरठ के दंगों में जल गई थी, लेकिन घर से दफ्तर तक अटल जी की तस्वीर आपको जरूर मिल जाएगी.

कहां ग़ालिब, कहां हम

ग़ालिब ने अपने ज़माने में कभी एक लाख रुपए देखे भी नहीं होंगे.



शाइरी की बदलती दुनिया
अल्लामा इकबाल, फैज अहमद फैज, सरदार जाफरी, कैफी आजमी, साहिर लुधियानवी ये सब इंकलाबी शायरी करते थे, लेकिन मैं तो मोहब्बत की शाइरी करता हूं, मोहब्बत की बात करता हूं. आज मेरी शाइरी हिन्दी, ऊर्दू, अंग्रेजी सभी भाषाओं में दुनिया के ज्यादातर हिस्सों में मिल जाएगी. इंकलाबी शाइरी करने वालों के शेर आज कहां पढ़े जा रहे हैं? कई लोग मेरे शेरों को चुराकर छपवा कर लाखों कमा रहे हैं, जब कहता हूं, तो मुझे भी हिस्सा दे देते हैं.

आठ ग़ज़लें, लाख रुपए
मेरी शाइरी लेटेस्ट संस्कृत भाषा में है. ऊर्दू और हिन्दी दोनों ही संस्कृत भाषा की देन है.पाकिस्तान में मेरी शाइरी ऊर्दू में छपी है, खूब बिक रही है, वह भी मुझे रायल्टी दिए बिना. अभी हरिहरन ने तीस हजार रुपए भेजे हैं, मेरी दो गजलें गाईं हैं. मुझसे पूछे बगैर पहले गा लिया और फिर मेरे हिस्से के पैसे भेज दिए. मेरे साथ तो सभी अच्छे हैं. जगजीत सिंह ने पूरी आठ गजलें गाईं हैं, उनसे एक लाख रुपए मिले थे. अपने जमाने में गालिब ने कभी एक लाख रुपए देखे भी नहीं होंगे.

20.10.2007, 00.25 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Anjaan (Anjaan1234@gmail) Anjaan

 
 Please try to understand before give your comments. 
   
 

M.M.Tripathi (mmtripathi786@yahoo.in) Bhopal

 
 बद्र साहब आप ये सोचिए कि जो लोग आपको अपना आदर्श मानते होँगे वे जब आपका ये साक्षात्कार पढ़ेँगे तो उन्हेँ कितना दुख होगा। जहाँ तक मैँ सोचता हूँ, आदमी पैसे से नहीं बल्कि सद् विचारोँ से महान बनता है।

किसी सफल व्यक्ति पर इससे अधिक टिप्पणी मैं नहीं करूँगा किन्तु ईश्वर से मैं यही कामना करूँगा कि आपको सद् बुद्धि दें। रही बात आपके लेखन की तो वो अद्वितीय है॥
 
   
 

Abhijeet Sen (abhijeet4288@rediffmail.com) Raigarh

 
 Dr.Bashir Badra is well known and when he will speak other than his own subject everybody will listen to him , this is an advantage for him . 
   
 

dev agrawal (devairtel@rediffmail.com) kadaura (jalaun)

 
 इस लेख के बाद ये बात हम दावे के साथ कह सकते हैं कि आप जितने अच्छे शायर हैं उतने ही शानदार इंसान हैं. नहीं तो आज के जमाने में बाबरी मस्जिद और अयोध्या पर इतनी बेबाक टिप्पणी करने की हिम्मत किसमें हैं ? इकबाल, फैज़, साहिर और गालिब जैसे महान शायरों पर की गई टिप्पणी को हो सकता है कुछ लोग पसंद ना करें लेकिन इसमें कुछ भी गलत नहीं है. माना कि ये सभी भारत के ही नहीं पूरी दुनिया के महानतम शाय़रों में शुमार किए जाते हैं लेकिन इन लोगों को अपने जिंदा रहते उतनी लोकप्रियता नहीं मिली जितनी आपको मिली है. आपको मेरा सलाम.... 
   
 

RAVIKANT RAHI (ravi101kant@gamil.com) Mandla

 
 आदाब बशीर साहब.
आपके विचार से मैं सहमत हूं पर गालिब जैसे अजीम शायर पर जो टिप्पणी की है, वो मेरी समझ से सही नहीं है. या हो सकता है कि मैं ही आपकी बात को नहीं समझ पा रहा हूं.
 
   
 

vivek sanyal (vvksanyal@gmail.com) Raipur

 
 ये वही बशीर बद्र हैं जो लिखते थे कि-
लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में
तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में...

अब यही बशीर बद्र आज भाजपा के साथ हैं. बद्र साहब ने शायद गुजरात न तो देखा, न सुना. बाबरी मस्ज़िद गिराना स्वाभाविक प्रक्रिया नहीं बल्कि स्वामी विवेकानंद के सपनों का खून था, जिन्होंने पूरी दुनिया के सामने भारत को धार्मिक और बौद्धिक सहिष्णुता के लिए गुरु का दर्जा दिलाया.

हम बशीर साहब की शायरी के मुरीद हैं लेकिन हमें इस बात को लेकर कोई भ्रम नहीं है कि भाजपा उतनी ही कट्टरपंथी है, जितना कोई भी दूसरा कट्टरपंथी संगठन हो सकता है.
 
   
 

Indramani (indramani2006@indiatimes.com)

 
 गालिब और बशीर साहब एक महान हस्ती है. इन दोनों का स्थान कोई नहीं ले सकता. यहां जो बात लिखी गई है वो बिल्कुल दुरुस्त है. अच्छा लिखा. धन्यवाद !  
   
 

Harsha Prasad (prasad.harsha@gmail.com) Bombay

 
 ग़ालिब के बारे में जो बशीर बद्र जैसे आदमी ने फरमाया, बिल्कुल दुरुस्त है. और उसकी वजह ये है कि ग़ालिब शायर थे जो बशीर बद्र नहीं है. 
   
 

satyam (satyam_shrivastava@rediffmail.com) new delhi

 
 basir sahab is interview se pahle mein aapki bahut kadra karta tha shayad shayar ke roop me karta bhi rahu para aapne bata diya ki aap poori tarah satta parast hai. aazaad khyal se likhne kii himmat aapme bahut kam hai. itihas ke baare me thoda aur padiye. 
   
 

virendra jain bhopal

 
 I had been a Bank Manager and was seeing crore of ruppies daily but I can not claim a better shayar than Ghalib. Bashir Badra is abetter composer of shayari but not proving himself a better human through is statements like- Main BJP office men jhaadu lagane ko bhi taiyar hun- etc. 
   
 

कौशल किशोर शुक्ला (kaushal.shukla@rediffmail.com)

 
 जनाब वशीर साहब,
आदाब अर्ज है।
आप न केवल एक अजीम शख्सीयत के मालिक हैं, बल्कि आपको इस देश में बड़ी मकबूलियत भी हासिल है। आप जैसे लोगों से ही ऐसी बातों की उम्मीद की जा सकती है। वर्ना साधारण लोग तो जातिवाद और सम्प्रदायवाद के घेरे से निकल ही नहीं पाते। इस देश को अमनो-अमान चाहिए तो आप जैसे लोगों को आगे करना होगा और आपकी जुबां को परवान चढ़ाना होगा। आपको भी एक बार बोलकर चुप रह जाने से नहीं होगा। अपेक्षा है, जब मौका मिलेगा आप अपने विचार फरमाते रहेंगे। क्या पता, सरफिरों को कब होश आये।

कौशल किशोर शुक्ला
 
   
 

सनत जैन (sanmatijdp@gmail.com) ्जगदल्पुर

 
 शायद पहली बार कोई मुसलमान ने सही को सही कहा है इतिहास ही बताता है सच्चाई, अपने मतलब का सच बाकी सारा झुठा; ऐसी सोच गलत होती है इसलिए दिमाग खुला रखकर सोचना जरुरी है. 
   
 

Ajit () Pune

 
 Bashir Badr sahab, I am partially agree with u. Like u said that people are earning by your shairi and gazals they use to publish it first and then pays u the royalti of that after u claim for that, really its not fair but who is responsible forthis if u are not capable of keeping ur work safe, who is responsible, if u r publishing make it copyright, do that nobody can misuse ur work and contents. 
   
 

Nabban (drdha@yahoo.com) AYODHYA

 
 Bashir ji jo aapko kafir kahe woh sabse bada kafir hai. 
   
 

पंकज (pkvbihar@yahoo.com) कोलकाता

 
 बशीर जी के विचार जानकर अच्छा लगा - विशेषकर अयोध्या और सांप्रदायिकता पर। कवि को तो उदार होना ही चाहिए। सच पूछिए, तो सांप्रदायिकता गंदी राजनीति और मतलबपरस्त बुद्धिजीवियों की देन है। आम आदमी बस 'आदमी' होता है और कुछ नहीं - चाहे वह किसी भी धर्म का हो। 
   
 

Shayama (shayama.choudhary@yahoo.com) US

 
 Mr. Badra,
if you really think what you just said in your interview - then you are an example for Indian muslim community!!!! I wish if there are 10 percent of muslims who are blessed with your type of mindset.

I am not sure why Mr. Agrawal is upset with your response!!! Mr. agrawal are you envious with mr. Badra's success and his wonderful openions!!!!!!
 
   
 

G Manjusainath (gmanjusainath@gmail.com) Bangalore

 
 Abhi abhi Bangalore aur Gujarat Vahashi darindon ka shikar hue. Aise unmadi tatvon se desh ko bachaane Basheer Badr jaise saral, imandar aur bebak logon ki samaaj ko, vishesh kar Muslim samaaj ko, zaroorat hai.

Saadar
 
   
 

dhiru (dhirusingh@71@gmail.com) bareilly

 
 basheer sahab, kash aisa gigar har insaan main aa jaye. Ayodhya ka masla kabhi ka nipat jaye lekin yah siasat ke kamai khane wale hindu aur musalmaan ko milne nahi denge koyanke inki peth ke aag khoon se hi bujati hai. 
   
 

BALRAM AGARWAL () DELHI-32

 
 Bashir Badr sahab mere pasandeeda shayar haiN.Vo is samay ke behatreen shayar haiN, aur ek nek iNsAn bhI zurUr hoNge. UnakI bAtoN se sahamati-asahamati ho sakatI hai. Shriram ke jamAne maiN unase,Shrikrishn ke jamAne maiN unase logoN kI asahamatiyAN rahI haiN. is jamane maiN Asal me ek sAf insAn ko rajnItik masaloN par sarvjanik bayAn dene se bachnA chAhie, jo vo nahI kar pAte. 
   
 

lakshmi narayan delhi

 
 bashir shab ek mahan kalakar hai. isme koi sak nahi. lekin basir shab ke is bayano me ojhapan lagta hai. mana ki itihas me baber ne ek galti kar mandir ko tor masjid me badal diya, lekkin kya itihas ke kisi kaslkhand me kiye gaye kisi galti ko duhranan kya jayj hai aur us galti ko punah duhra kar justification karna kya manavta ka yahi lakshan hai.  
   
 

ishwar nath jha (ishwarnjha@rediffmail.com) biharsharif

 
 bashir saahab ka ye kahana ki ayodhya bhagwan ram ki janm bhoomi hai aur unke mandir ko aurangjeb ne tod kar masjid banayi thi solah aane sach hai.lekin mujhe dar hai ki kahi kattarpanthi mulla unhe kaafir na kahana shuru kar de aurunke virudh koi fatva na nikaal de. 
   
 

AADIL AZAD (adilazadnisa@gmail.com)

 
 BASHIR BADAR,AAP KO YE GHALAT FAHMI HO GAYI HAI K AGLI SARKAR SHAYAD NDA KI AA RAHI HAI ,JO AAP BE WAJAH ITIHAS KO BADAL RAHE HAIN. MASJID KO LOG BEWAJAH BABAR SE JODTE HAIN AUR AAP NAHAQUE AURANGZEB SE USE JOD RAHE HAIN.GAR AURANZEB K ZAMANE MEIN AAP HOTE TO PAKKA UNKE TARIF MEIN QASIDE LIKH RAHE HOTE.AFSOS!!! BAVAJOOD IN KOSHISHON K AAP SAHITYA ACADEMY K CHAIRMAN BAN PANE MEIN NAKAM RAHEINGE. KYON KI AAPKE QASIDA SUNNE WALE K HATH MEIN SATTA WAPAS NAHI AANE WALI.ABHI BHI WAQT HAI HOSH MEIN A JAYEIN.
 
   
 

shahroz (shahroz_wr@yahoo.com)

 
 badar sahab beshak umda shayar hain lekin unki shairy indinon dil se nahin dimagh se ho rahi hai yaani aap jis tarah hisab-kitab karte hain. darasal auron ki tarah inka shayar bhi bazaar ki chamak-damak mein kho gaya aur doctor sb bhotikta ke shikar aakhirash ho hi gaye.urduwalon ne inhain bakhubi samajh liya hai. hindi wale bhi samajh jayeinge.kaltak merath(meerut) ke fasa mein apne jale ghar ka rona-peetna kiya karte the aaj unhain gujrat, bundelkhand, aandhra, maharashtra ke aansu naqli dekhai de rahe hain. vitanda babar ki jagah badnamzamana aurangzeb ke naam se masjid mansub kar badar sb ne naya vitanda khada kar dia hai.ise kahte hain kaudi khoj lana.  
   
 

Dr Durgaprasad Agrawal (dpagrawal24@gmail.com)

 
 

बशीर साहब, आप एक उम्दा शायर हैं, इसमें कोई शक़ नहीं, लेकिन ऐसा बडबोलापन आपको शोभा नहीं देता. गालिब ने अपने ज़माने में कभी एक लाख रुपये नहीं देखे होंगे - यह कह कर और साथ ही यह भी कहकर कि जगजीत सिंह ने आपकी आठ गज़लें गाकर आपको एक लाख रुपये दिये, अगर आप यह कहना चाहते हैं कि आप गालिब से बडे शायर हो गये हैं, तो आपकी अक्ल और समझ पर तरस ही खाया जाना चाहिए. इसी तरह जब आप इंक़लाबी शायरी पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं कि वह शायरी आज कहीं नहीं है, तो लगता है कि कहूं, आप अपना चश्मा बदलिए. क्या फैज़, मजाज़, साहिर आपको कहीं सुनाई नहीं देते? आप लोकप्रिय हैं, ये महान हैं - इस फर्क़ को नज़र अन्दाज़ मत कीजिए.
 
   

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