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आलोक धन्वा की 14 कविताएं

कविता

 

आलोक धन्वा की 14 कविताएं

लगभग 14 सालों के बाद हिंदी के सुप्रसिद्ध कवि आलोक धन्वा ने इस साल कुछ कविताएं लिखी हैं. देश और देश से बाहर, आलोक धन्वा को बेतरह प्यार करने और सम्मान देने वाले हजारों लोगों के लिये जैसे यह आलोक धन्वा की कविताओं के वनवास की तरह का मामला है. इतने साल ही तो पाठकों ने भी इंतजार किया !


चेन्नई में कोयल

आलोक धन्वा


चेन्नई में कोयल बोल रही है
जबकि
मई का महीना आया हुआ है
समुद्र के किनारे बसे इस शहर में

कोयल बोल रही है अपनी बोली
क्या हिंदी
और क्या तमिल
उतने ही मीठे बोल
जैसे अवध की अमराई में!

कोयल उस ऋतु को बचा
रही है
जिसे हम कम जानते हैं उससे!


ओस
शहर के बाहर का
यह इलाक़ा

ज़्यादा जुती हुई ज़मीन
खेती की

मिट्टी की क्यारियाँ हैं
दूर तक
इन क्यारियों में बीज
हाथ से बोये गए हैं

कुछ देर पहले ज़रा-ज़रा
पानी का छिड़काव किया गया है!

इन क्यारियों की मिट्टी नम है

खुले में दूर से ही दिखाई
दे रही शाम आ रही है

कई रातों की ओस मदद करेगी
बीज से अंकुर फूटने में!


फूलों से भरी डाल
दुनिया से मेरे जाने की बात
सामने आ रही है
ठंडी सादगी से

यह सब इसलिए
कि शरीर मेरा थोड़ा हिल गया है
मैं तैयार तो कतई नहीं हूँ
अभी मेरी उम्र ही क्या है!

इस उम्र में तो लोग
घोड़ों की सवारी सीखते हैं
तैर कर नदी पार करते हैं
पानी से भरा मशक
खींच लेते हैं कुएँ से बाहर!

इस उम्र में तो लोग
किसी नेक और कोमल स्त्री
के पीछे-पीछे रुसवाई उठाते हैं
फूलों से भरी डाल
झकझोर डालते हैं
उसके ऊपर!
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

umarah [] Kolkata - 2013-01-25 15:08:53

 
  बहुत बहुत सुंदर कविताएं. 
   
 

इला कुमार [ilakumae2002@yahoo.co.in] दिल्ली - 2011-12-23 14:16:44

 
  बहुत सुंदर और उदास कवितायेँ बहुत दिनों के बाद . 
   
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