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एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

 

कोर पीडीएस से राशन लेने वाले कहेंगे-मेरी मर्जी

उमेश मिश्र


मुश्किल से डेढ़ दशक पहले तक विकसित देशों के बारे में कही जाने वाली यह बात परी-कथा जैसी लगती थी कि सड़क के किनारे एकांत में एक मशीन टंगी होती है, जिसे कार्ड दिखाकर आप मन-चाहे समय और स्थान से अपने पैसे निकाल सकते हैं। यह सुविधा बैंकिंग के क्षेत्र में एटीएम कार्ड और कोर बैंकिंग की देन थी।

 
आज भारत ही नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ के छोटे-बड़े शहरों में भी एक-एक बैंक की कई-कई एटीएम मशीनें लग चुकी हैं। सूचना क्रांति-बैंकिंग और प्रबंधन के क्षेत्र में एक ऊंची सोच ने जन सुविधा की बहुत ऊंची छलांग लगाकर न सिर्फ बैंकों की लाइनें कम कर दीं, बल्कि आम आदमी की जिन्दगी भी आसान कर दी है। क्या आप सोच सकते हैं कि इससे भी ऊंची छलांग लगाने की तैयारी छत्तीसगढ़ राज्य में कर ली गई है, जिसे संभवतः विकसित देशों ने भी नहीं अपनाया होगा या शायद उन्हें इस क्षेत्र में काम करने की जरूरत नहीं पड़ी हो।

जी हां, छत्तीसगढ़ सार्वजनिक वितरण प्रणाली को कोर बैंकिंग की तर्ज पर ढालने जा रहा है, जिससे छत्तीसगढ़ के आम आदमी को आगे चलकर शहर की किसी भी राशन दुकान से रियायती दरों पर मिलने वाली राशन सामग्री प्राप्त करने की सुविधा मिलेगी। यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के बीपीएल और एपीएल को मिलाकर लगभग 50 लाख से अधिक हितग्राहियों को यह कहने का अवसर मिलने वाला है-

‘मैं चाहे इस दुकान से खरीदूं या उस दुकान से-मेरी मर्जी’।
‘अबकी यहां से खरीदा, आगे कहीं और से लूंगा-मेरी मर्जी’।
‘टिकरापारा से खरीदता था अब शंकरनगर से खरीदूंगा-मेरी मर्जी’।
‘राशन कार्ड लेकर नहीं आऊंगा-स्मार्ट कार्ड रखूंगा-मेरी मर्जी’।
‘सुबह खरीदूं, दोपहर को या शाम को- मेरी मर्जी’।
‘जिसका व्यवहार खराब है, उसके यहां नहीं जाऊंगा-मेरी मर्जी’।

छत्तीसगढ़ में कोर पीडीएस की सुविधा फिलहाल रायपुर शहर से पायलेट प्रोजेक्ट की तरह संचालित की जाएगी, जिसका विस्तार धीरे-धीरे अन्य स्थानों पर किया जाएगा। कोर पीडीएस व्यवस्था में हितग्राही अपने स्मार्टकार्ड के जरिए नगर की किसी भी दुकान से राशन ले सकेगा। इससे अलग-अलग संस्थाओं द्वारा संचालित की जा रही ‘शासकीय उचित मूल्य दुकानों’ के बीच एक स्वस्थ्य प्रतियोगिता की शुरूआत होगी, जिस दुकान को अपना टर्नओव्हर बढ़ाना होगा, उस दुकान के संचालकों पर उस तबके को रिझाने की जिम्मेदारी होगी, जो सिर्फ ग्राहक नहीं बल्कि राज्य का वह जरूरतमंद तबका है, जिसे हर माह राशन दुकानों में जाकर अपनी माह भर की रसद का इंतजाम करना पड़ता है। यानी यह प्रतियोगिता बड़े-बड़े मॉल्स में जाने वाले खरीददारों को रिझाने वाले मल्टीनेशनल ब्रांड्स के डीलरों के बीच नहीं होगी बल्कि बिलकुल आम जनता की सुविधा बढ़ाने वाली राशन दुकानों के बीच होगी।

इसलिए यह उम्मीद जागती है कि इससे ग्राहक सेवा में सुधार होगा, पीडीएस की सम्पूर्ण व्यवस्था में पारदर्शिता के लिए छत्तीसगढ़ राज्य आज भी देश के आदर्श राज्य के रूप में नवाजा जा रहा है लेकिन कोर पीडीएस अपने ही कीर्तिमान को पीछे छोड़ते हुए नए मापदण्ड स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी। राशन दुकानों से सही समय पर सही मात्रा में खाद्यान्न का उठाव न होना भी राशन सामग्री के दुरूपयोग का कारण बन जाता है। कोर पीडीएस से मॉनीटरिंग में तो सुधार होगा, उससे सामग्री के दुरूपयोग की संभावना भी काफी कम हो जाएगी।

कोर पीडीएस के शुरूआती अनुभवों के लिए रायपुर नगर निगम क्षेत्र की 175 उचित मूल्य दुकानों का चयन किया गया है। परियोजना के क्रियान्वयन हेतु हितग्राहियों को वर्तमान में जहां पंजीबद्ध हैं, उन्हीं उचित मूल्य दुकानों के माध्यम से स्मार्ट कार्ड प्रदान किया जाएगा। उचित मूल्य दुकानों को आन लाइन जानकारी दर्ज करने हेतु ‘पाईंट ऑफ सेल उपकरण’ दिए जाएंगे। बीपीएल, अंत्योदय, अन्नपूर्णा और मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना के सभी हितग्राहियों को स्मार्टकार्ड दिए जाएंगे। उचित मूल्य दुकानदार ‘पाईंट ऑफ सेल उपकरण’ में अपना तथा हितग्राही का स्मार्ट कार्ड डालकर ऑन लाइन राशन सामग्री प्रदान करेगा। एपीएल कार्डधारियों को मोबाइल के जरिए हर महीने वन टाइम पासवर्ड प्रदान किया जाएगा, जिसके जरिए उन्हें राशन सामग्री मिलेगी।

इस तरह राशन दुकान से सामग्री के प्रदाय की जानकारी भी तत्काल खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की वेबसाइट में दर्ज हो जाएगी। 30 अप्रैल 2012 तक रायपुर नगर की सभी दुकानों में कोर पीडीएस लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इस परियोजना के क्रियान्वयन हेतु राज्य सरकार द्वारा वर्तमान वित्तीय वर्ष में 1.72 करोड़ रूपए की राशि उपलब्ध कराई गई है।

जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरे देश में अव्यवस्था और अराजकता के लिए बदनाम हो चुकी थी, उसे नया जीवन देकर आम जनता का हित चिंतक बनाने में मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह ने अनेक बड़े निर्णय लेकर इसमें अमूल-चूल परिवर्तन किए थे। सात वर्षों में ही छत्तीसगढ़ पीडीएस देश में एक उन्नत मॉडल के रूप में पहचान बनाने में सफल रही। यह सफलता की कहानी भी दिलचस्प है।

सबसे पहले कानूनी सुधारों पर जोर दिया और पहले कदम के रूप में राशन दुकानों को निजी व्यक्तियों के हाथों से निकालकर सहकारिता आधारित संस्थाओं को दिया। इस तरह राशन दुकानों का संचालन महिला स्व-सहायता समूहों, पंचायतों, वन सुरक्षा समितियों, लैम्प्स आदि संस्थाओं को दिया गया। दिसम्बर, 2004 में नया पीडीएस कंट्रोल आर्डर जारी किया गया। निजी हाथों से संचालित हो रही, दो हजार 872 राशन दुकानों को निरस्त किया। उच्च न्यायालय में 400 मुकदमों से जूझ कर राशन दुकानों को सही हाथों में लाया गया। शासन की नई नीति की कानूनी लड़ाई सितम्बर, 2005 में जीती। राशन दुकानों में संरचनात्मक सुधारों को चिन्हांकित कर, उन्हें अमल में लाया गया। उचित मूल्य दुकानों की संख्या 8 हजार 492 से बढ़ाकर 10 हजार 846 कर दी गई ताकि प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम एक राशन दुकान खुल जाए।

राशन दुकानों को सामग्री पहुंचाने के लिए ’द्वार-प्रदाय योजना’ चालू की गई। ताकि प्रत्येक माह की 6 तारीख को अनिवार्यतः राशन उपलब्ध हो जाए। इस तरह उठाव तथा परिवहन आदि में अनेक संस्थाओं की दखल को समाप्त किया गया। राज्य भर में भण्डारण की सुविधा के लिए 2500 दुकान-सह-गोदाम का निर्माण कराया गया। सहकारिता आधारित राशन दुकानों का संचालन बिना लोभ-लालच के हो सके, इसके लिए राशन दुकानों को दिया जाने वाला कमीशन ढाईगुना से अधिक बढ़ा दिया गया। राशन दुकानों को अन्य प्रभावों से मुक्त करने के लिए 75 हजार रूपए प्रति दुकान के मान से ब्याज मुक्त वर्किंग केपिटल दी गई तथा एक माह की उधार सुविधा भी दी गई।

छत्तीसगढ़ में पारदर्शिता को पीडीएस का मूलमंत्र बनाया गया। सूचना प्रौद्योगिकी का भरपूर इस्तेमाल सुनिश्चित किया गया। राशन का परिवहन करने वाली ट्रकों को पीले रंग का होना अनिवार्य किया गया। ट्रकें रवाना होने की सूचना एसएमएस के माध्यम से जनता को देने के लिए प्रणाली लागू की गई। सम्पूर्ण प्रणाली की पारदर्शिता और मॉनीटरिंग के लिए वेबसाइट बनाई गई, जिसमें सम्पूर्ण आवंटन, परिवहन तथा वितरण की समस्त जानकारियां उपलब्ध होती हैं। शिकायतों के लिए टोल-फ्री नम्बर और कॉल सेन्टर की सुविधा दी गई है। निर्धारित तिथि पर राशन वितरण तथा जनभागीदारी के लिए चावल उत्सव का आयोजन किया जाता है। अभियान चलाकर फर्जी राशन कार्डों का निरस्तीकरण किया गया। मुख्यमंत्री खाद्यान्न सहायता योजना लागू की गई है, जिसके तहत प्रत्येक गरीब परिवार को प्रति माह 35 किलो चावल देने की व्यवस्था की गई है। 9 लाख अंत्योदय परिवारों को यह चावल 1 रूपए प्रति किलो की दर पर तथा 25 लाख अन्य गरीब परिवारों को (चाहे वे केन्द्र द्वारा निर्धारित वर्तमान मापदण्ड के अनुसार गरीबी सूची बाहर भी कर दिए गए हो लेकिन जरूरतमंद हैं) 2 रूपए प्रति किलो की दर से चावल दिया जा रहा है। प्रत्येक गरीब परिवार को प्रति माह 2 किलो आयोडाईज्ड छत्तीसगढ़ अमृत नमक निःशुल्क दिया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ का पीडीएस अब राज्य के लिए गौरव का विषय बन गया है और देश के लिए आदर्श पीडीएस, जिसकी सराहना माननीय उच्चतम न्यायालय, योजना आयोग, केन्द्रीय मंत्रालय, प्रधानमंत्री की सलाहकार परिषद के सदस्यों, देश के कई राज्यों द्वारा की गई है। इस तरह आम जनता के दिल में सरकार के प्रति सम्मान और व्यक्तिगत तौर पर जुड़ाव का लक्ष्य भी इस योजना के माध्यम से प्राप्त किया गया है। यह योजना छत्तीसगढ़ को भूख मुक्त तथा कुपोषण मुक्त राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मौलिक पहल साबित हुई है। ‘कोर पीडीएस’, जनहितकारी प्रयासों की एक नई कड़ी है।

 

13 मई 2012


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