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एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

 

मजदूरों की मुस्कान बनेगी छत्तीसगढ़ की पहचान

स्वराज्य कुमार
 

सूरज की तपिश हो या बादलों की बारिश, झुलसा देने वाली धूप हो या हड्डियों में सिहरन पैदा कर देने वाली कड़ाके की ठण्ड, किसी भी मौसम की कोई भी कठिन से कठिन चुनौती उन्हें अपने कर्तव्य के मार्ग से विचलित नहीं कर पाती। वे किसी मौन तपस्वी की तरह अपनी कठिन साधना में व्यस्त नजर आते हैं। उनके कुशल हाथों से बनने वाले मकानों और बहुमंजिली इमारतों में करोड़ों परिवारों को सिर पर छांव मिलती है। वह पत्थर तोड़कर हमारे लिए लम्बी-चौड़ी, चिकनी सड़कें बनाकर हमारी जिन्दगी की राह को आसान बनाते हैं। उनके हाथों से बने राजमार्गों पर समाज और देश के विकास का पहिया तेजी से दौड़ता है। उनके हाथों से निर्मित सिंचाई जलाशयों और नहरों से खेतों में हरियाली फैलती है और अनाज की पैदावार बढ़ने पर देश और दुनिया की भूख मिटती है। ये वो लोग हैं, जिनके पसीने से ही देश और समाज के लिए हर प्रकार की सुख-सुविधा का निर्माण होता है। अपनी इस अनोखी निर्माण शक्ति के बावजूद उनमें संगठन शक्ति का अभाव होता है। यही कारण है कि वे अपना का दु:ख-दर्द कहीं व्यक्त नहीं कर पाते।

उनके दिलों के इस दर्द को देश के नये राज्य छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की सरकार ने दिल की गहराईयों से महसूस किया है। तभी तो ऐसे लाखों असंगठित श्रमिकों की सामाजिक-आर्थिक बेहतरी के लिए विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं की शुरूआत की गई है। ये ऐसी योजनाएं हैं जिनके माध्यम से यहां के मेहनतकश मजदूरों के चेहरों पर मुस्कान और उनके जीवन में रौनक लाने की लगातार कोशिश की जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि इन योजनाओं से प्रदेश के मेहनतकश मजदूरों की जिंदगी में बेहतर बदलाव आएगा और उनके जीवन की मुस्कान तेजी से विकसित होते छत्तीसगढ़ की पहचान बनेगी। राज्य निर्माण के बाद विगत ग्यारह वर्षों में छत्तीसगढ़ में निर्माण उद्योग में काफी तेजी आयी है। बड़ी संख्या में सड़कों, पुल-पुलियों, सिंचाई जलाशयों, सरकारी भवनों और आम जनता के लिए मकानों का निर्माण हो रहा है, वहीं प्रदेश के औद्योगिक विकास की गति भी तेज हो गई है। इन सभी निर्माण गतिविधियों में रोजगार के लिए असंगठित मजदूरों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। इन श्रमिकों के लिए सामाजिक-आर्थिक हितों की सुरक्षा को भी राज्य सरकार ने अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया है। उन्हें श्रम कानूनों का लाभ दिलाने के उपायों पर भी पूरी संजीदगी से ध्यान केन्द्रित किया गया है। राज्य में कार्यरत ठेका श्रमिकों को बैंकर्स चेक के माध्यम से वेतन भुगतान का प्रशासकीय निर्देश जारी करने के मामले में भी छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है। उन्हें श्रम विभाग की देख-रेख में परिचय पत्र भी जारी किए जा रहे हैं।

वास्तव में किसी भी देश अथवा राज्य में सुख-शांति के लिए वहां के श्रमजीवी तबके का खुशहाल होना जरूरी है। राज्य बनने के बाद छत्तीसगढ़ में यह पहला अवसर है, जब निर्माण क्षेत्र में कार्यरत इन असंगठित श्रमिकों के लिए एक साथ तकरीबन एक दर्जन योजनाएं शुरू की गयी है। इतना ही नहीं बल्कि इन श्रमिकों के लिए इस प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं की शुरूआत करने और उन्हें योजनाबध्द ढंग से लागू करने की दिशा में भी मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ देश का अग्रणी राज्य बन गया है। निर्माण श्रमिकों का आशय ऐसे श्रमिकों से है, जो भवन निर्माण के साथ-साथ उससे जुड़ी हर प्रकार की निर्माण गतिविधियों में काम करते हैं। उनके लिए श्रम विभाग के अंतर्गत् छत्तीसगढ़ भवन अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल का गठन किया गया है। इसके माध्यम से भवन निर्माण गतिविधियों से जुड़े असंगठित श्रमिकों का पंजीयन तेजी से किया जा रहा है। पिछले माह फरवरी तक प्रदेश में लगभग एक लाख 90 हजार श्रमिकों का पंजीयन हो चुका है। इन पंजीकृत श्रमिकों के लिए कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा एक दर्जन विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। सितम्बर 2008 में कर्मकार कल्याण मण्डल के विधिवत गठन के बाद विगत दो वर्षो में 42 हजार श्रमिकों और उनके आश्रित परिवारजनों को इन योजनाओं के तहत लगभग आठ करोड़ 30 लाख रूपए की सहायता वस्तु अथवा राशि के रूप में दी जा चुकी है। इनमें से आठ हजार 674 महिला श्रमिकों को लगभग दो करोड़ 73 लाख रूपए की नि:शुल्क सिलाई मशीनों और सायकलों का वितरण किया जा चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने लगभग डेढ़ वर्ष पहले छत्तीसगढ़ श्रम दिवस (विश्वकर्मा पूजा) के अवसर पर 17 सितम्बर 2010 को राजधानी रायपुर में आयोजित समारोह में इन मेहनतकशों के लिए स्वास्थ्य बीमा, नि:शुल्क सिलाई मशीन तथा औजार किट वितरण योजना की शुरूआत की थी। मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप कर्मकार कल्याण मंडल ने असंगठित श्रमिकों के लिए अगले कुछ महीनों में और भी कई योजनाओं का क्रियान्वयन शुरू कर दिया।

भवन एवं अन्य सन्निर्माण के अंतर्गत निर्माण श्रमिकों को 42 विभिन्न प्रकार के कार्यो के हिसाब से चिन्हांकित और अधिसूचित किया गया है, जिनमें ऐसे सभी प्रमुख कार्य शामिल हैं, जिनका संबंध कहीं न कहीं, किसी न किसी रूप में भवन निर्माण गतिविधियों से जुड़ता है। इनमें पत्थर काटने, तोड़ने और पीसने वाले श्रमिक, मकान बनाने वाले राज मिस्त्री, लकड़ी का काम करने वाले बढ़ई, पोताई करने वाले पेन्टर, पानी के लिए नल और पाइप फिटिंग करने वाले प्लम्बर, इलेक्ट्रीशियन, मेकेनिक, कुआं खोदने वाले श्रमिक, वेल्डर, गोताखोर, हथौड़ा चलाने वाले, छप्पर डालने वाले, सड़क निर्माण से संबंधित हर प्रकार की जरूरी गतिविधियों में काम करने वाले, बांध बनाने वाले, ईंट बनाने वाले, पण्डाल निर्माण में लगे कर्मकार, पम्प ऑपरेटर, मोजाइक पॉलिस करने वाले, सुरंग कर्मकार, पुल निर्माण आदि में तैनात खलासी, चौकीदार, सीमेंट पोल बनाने वाले मजदूर, रेती और गिट्टी का काम करने वाले श्रमिक तथा बंसोड़ भी शामिल हैं।
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