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एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

 

पायलट प्रशिक्षण योजना से कृष्ण कुमार का सपना हुआ साकार

विशेष संवाददाता


मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह द्वारा घोषित एवं राज्य शासन के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग द्वारा संचालित राज्य के अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के युवाओं के लिए वायुयान पायलट प्रशिक्षण योजना ने रायपुर निवासी कृष्ण कुमार चंद्राकर के पायलट बनने के सपने को साकार कर दिया है. और आज वे एक पायलट के रूप में वे झारखण्ड सरकार को अपनी सेवाएं भी दे रहे हैं.

आखिर ये तमन्ना पूरी कैसे हुई ? उनके सपनों को मज़बूत पंख किसने दिए? कैसे एक दर्जी क़ा बेटा उस मुक़ाम को हासिल कर पाया जिसके बारे में सोचना भी एक सामान्य परिवार के लड़के के लिए बहुत बड़ी बात थी. पायलट प्रशिक्षण एक विशिष्ट प्रकार का खर्चीला पाठयक्रम है और इसकी फीस हजारों में नहीं बल्कि लाखों में है. शायद यही सोचकर कृष्ण कुमार चाहकर भी अपने मन की बात पिता से कह नहीं पा रहे थे. एक पिता के लिए अपने बेटे की किसी ख्वाहिश को पूरा न कर पाने का दर्द उसकी रातों की नींद ही नहीं उड़ा देता बल्कि उसके दिल का सुक़ून भी छीन लेता है. लेकिन सच ही कहा है किसी ने जहां चाह वहां राह. ये सब कुछ लगभग असंभव ही था मगर इस असंभव को संभव कर दिखाया राज्य शासन के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की वायुयान पायलट प्रशिक्षण योजना ने जिसकी बदौलत न केवल कृष्ण कुमार चंद्राकर के सपनों को परवाज़ मिली बल्कि छत्तीसगढ के लाखों युवाओं को साहस मिला,उम्मीद मिली के वे भी पायलट के रूप में अपनी पहचान बना सकते हैं.

बचपन से ही मेधावी छात्र रहे कृष्ण कुमार ने शासकीय जे.एन.पांडेय बहुद्देशीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रायपुर से अपनी शालेय शिक्षा पूरी की इसके बाद उन्होंने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान रायपुर से कम्प्यूटर साइंस में बी.टेक. की उपाधि प्राप्त की और सन 2006 में एनसीसी के एयर विंग के केडेट के रूप में अकेले ग्लाईडिंग करने का भी गौरव उन्हें प्राप्त हुआ.

कृष्ण कुमार का कहना है कि उनके लिए ये योजना किसी वरदान से कम नहीं है. आर्थिक विवशता के चलते निराश हो चुके इस युवक के लिए ये योजना न केवल उम्मीद की किरण थी बल्कि इसी योजना ने उनके जीवन को कामयाबी की रौशनी भी दी.वर्तमान में झारखंड सरकार में पायलट के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे कृष्ण कुमार की दिली इच्छा है कि वे छत्तीसगढ़ शासन का विमान उड़ाएं. वे प्रदेश के मुखिया माननीय मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के समक्ष भी अपनी योग्यता सिध्द करना चाहते हैं और उनसे यही कहना चाहते हैं कि उन्होंने राज्य के अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के युवाओं पर जो भरोसा दिखाया वो खाली नहीं गया. उनका मानना है कि राज्य शासन के आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की इस योजना से एक दिन निश्चित ही प्रदेश के युवा देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में छत्तीसगढ को पहचान दिलाएंगे.

आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग की इस योजना के तहत छत्तीसगढ राज्य के अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को छत्तीसगढ शासन द्वारा स्थापित उड़ान अकादमी द्वारा पायलट प्रशिक्षण दिया जाता है जिसका पूरा खर्च शासन द्वारा उठाया जाता है. जिसमें उड़ान व्यय, मेस एवं छात्रावास व्यय, लाईसेंस फीस एवं प्रथम श्रेणी की चिकित्सा जांच फीस और पाठयक्रम को पूरा करने हेतु सभी अनिवार्य फीस भी शामिल हैं. इस प्रशिक्षण हेतु अनुसूचित जाति/जनजाति के अभ्यर्थी को भौतिकी, रसायन एवं गणित विषय के साथ 10+2 बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में न्यूनतम 50 प्रतिशत एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के अभ्यर्थी को न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों सहित उत्तीर्ण होना चाहिये. अभ्यर्थी की आयु प्रशिक्षण सत्र के दौरान 25 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिये.

जिस तरह आज कृष्ण कुमार ने आसमान की ऊंचाईयों को छुआ है आशा ही नहीं बल्कि पूरा विश्वास है कि उसी तरह एक दिन प्रदेश के अन्य युवा भी अपनी सफलता का परचम लहराएंगे. छत्तीसगढ राज्य के अनुसूचित जाति/जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के प्रतिभावान और हिम्मती बच्चे जो इस रोमांच और साहस से भरे पेशे को अपनाना चाहते हैं सफलता उनके कदम चूमने के लिए बेकरार है और उनकी इस उड़ान को मजबूत पंख देने छत्तीसगढ़ शासन प्रतिबध्द है.

9 जून 2012


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