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एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

 

छत्तीसगढ़ में सूचना तकनीक का प्रयोग

डी.एस.कुशराम
 

छत्तीसगढ़

आज का युग सूचना तकनीक का है। इंटरनेट की सहज उपलब्धता से सूचनाओं के आदान-प्रदान में क्रांति आ गई है। इससे सरकारी क्षेत्र भी अछूता नहीं है। छत्तीसगढ़ में एक दशक के सफर में सरकारी विभागों में इस तकनीक का उपयोग तेजी से बढ़ा है। राज्य सरकार की कोशिश है कि आम जनता के हित में नवीन सूचना तकनीक का ज्यादा से ज्यादा उपयोग किया जाए। इसके लिए सभी सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों को डिजिटल फार्मेट में तैयार किया जा रहा है, जिससे आम जनता को इन योजनाओं और कार्यक्रमों की सीधी जानकारी मिल सके। अब तक का यह अनुभव रहा है कि सरकारी योजनाओं की जानकारी नहीं होने से उसका लाभ जनता को नहीं मिल पाता है, जब योजनाएं गांव और विकासखंड मुख्यालयों में सहज रूप से उपलब्ध होगी तो इसका सीधा लाभ जनता को होगा। इसके लिए छत्तीसगढ़ इन्फोटेक एवं बायोटेक प्रमोशन सोसायटी (चिप्स) राज्य में नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रही है।

चिप्स द्वारा छत्तीसगढ़ में ई-गर्वर्नेस लागू करने के लिए छत्तीसगढ़ स्टेट वाईड एरिया नेटवर्क तैयार किया गया है। यह डिजिटल हाईवे है और छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां अत्याधुनिक तकनीक का स्टेट नेटवर्क सेंटर बनाया गया है। इसमें सैटेलाईट हब स्टेशन, राऊटर, स्विचेस सर्वर का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम अब तक जिला और विकासखंड मुख्यालयों के साढ़े तीन हजार से अधिक सरकारी कार्यालयों को जोडा जा चुका है। इसके साथ ही चिप्स द्वारा आम जनता को नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए वर्ष 2003 से चॉइस परियोजना संचालित की जा रही है। इस परियोजना को ओपन सोर्स पर आधारित देश की वृहदत्तम परियोजना होने का गौरव प्राप्त है। इस परियोजना के तहत नागरिकों को विभिन्न प्रकार के प्रमाण पत्र उपलब्ध कराने के लिए चॉइस सेंटर्स की स्थापना की गई है। वर्तमान में प्रदेश में 93 चॉइस सेंटर संचालित किए जा रहे हैं। इन केन्द्रों में आय, जाति, निवास, जन्म, मृत्यु, राशन कार्ड, गरीबी रेखा, विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र सहित 35 प्रकार के प्रमाण पत्र बनाए जाते हैं। इन केन्द्रों द्वारा जारी प्रमाण पत्रों को छत्तीसगढ़ नागरिक सेवा नियम 2003 में तहत पूर्ण वैधानिकता प्राप्त है।

चिप्स के अलावा दूसरे सरकारी विभाग भी अपने स्तर पर विभागीय योजनाओं और विभाग द्वारा प्रदत सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक मोड में तैयार किया गया है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा संचालित सार्वजनिक वितरण प्रणाली इसका सबसे बढ़िया उदाहरण है। यहां सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पूरी तरह कम्प्यूटराईज किया गया है। इसमें राशन के आबंटन के साथ ही उसका परिवहन और वितरण तक की पूरी व्यवस्था की एक साफ्टवेयर के मदद से निगरानी की जाती है। इसमें जीपीएस (ग्लोबल पोजिसनिंग सिस्टम) सिस्टम की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, जिसके माध्यम से राशन परिवहन करने वाले ट्रकों के पूरे रूट की निगरानी की जाती है। इसके साथ ही ट्रक रवाना होने, दुकान विशेष के लिए आबंटित राशन की मात्रा आदि पूरी जानकारी एसएमएस के माध्यम से क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, ग्राम के सरपंच और नागरिकों को दे दी जाती है। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सभी लीकेजेस को बंद करने में सफलता मिली है। यही वजह है कि छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली पूरे देश के लिए एक आदर्श प्रणाली बन गई है, जिसकी सराहना भारत सरकार के अलावा विभिन्न राज्यों की सरकार और यहां तक कि भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने भी की है। अब एक कदम और बढ़ाते हुए राज्य सरकार इस प्रणाली में कोर पीडीएस लागू कर रही है। रायपुर और दुर्ग जिलों में यह शुरू भी हो चुका है। इसमें सभी राशन कार्ड धारियों को एटीएम कार्ड की तरह स्मार्ट कार्ड दिए जा रहे हैं, जिसके माध्यम से हितग्राही किसी भी दुकान से अपना राशन ले सकता है।

सूचना प्रौद्योगिकी के माध्यम से एक बड़ा परिवर्तन राजस्व विभाग में भी देखने में आया है। यहां किसानों को खसरा, बी-वन, नक्शा की कम्प्यूटराईज नकल तो पहले से ही दिया जा रहा था। अब सभी भू-अभिलेखों को कम्प्यूटराईज भी किया जा रहा है। रायपुर, कांकेर, सरगुजा सहित अनेक जिलों में इसके कम्प्यूटराईजेशन का काम पूरा हो गया है। इससे किसानों को सुविधा हुई है। इन कार्यों के लिए अब उन्हें राजस्व कार्यालयों का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। इस तकनीक के माध्यम से किसान अपनी जमीनों की अद्यतन स्थिति की जानकारी प्राप्त करने के साथ ही नक्शा, खसरा और बी-वन की नकल प्राप्त कर सकते हैं। राज्य सरकार का वाणिज्यिक कर विभाग भी पूरी तरह हाई टैक होने को तत्पर है। इस विभाग द्वारा लगभग सभी सेवाओं को ऑन लाईन कर दिया गया है। यहां व्यावसायियों के ऑन लाईन पंजीयन के साथ ही व्यवसाईयों को ई-चालान, ई-रिटर्न और ई-पेमेंट की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इससे व्यवसाईयों को अपने संस्थान का काम छोड़कर कर वाणिज्यिक कर के कार्यालयों का चक्कर लगाने की झंझट से मुक्ति मिल गई है। व्यवसाईयों के लिए सी-फार्म सहित जरूरी फार्म और प्रपत्र भी उन्हें ऑन लाईन उपलब्ध कराया जा रहा है।

सूचना तकनीक का सबसे बड़ा बदलाव परिवहन विभाग में देखने को मिलता है। कुछ दिन पहले तक कोई भी व्यक्ति अपने ड्राईविंग लायसेंस बनवाने के लिए आरटीओं का दफ्तर जाने के बजाय दलालों के पास जाना ज्यादा पसंद करता था। लेकिन रायपुर में आरटीओ द्वारा ड्रायविंग लायसेंस बनाने की पूरी प्रक्रिया को ऑन लाईन कर दिए जाने से इसमें दलालों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है। कोई भी व्यक्ति निर्धारित फीस जमा कर उसी दिन अपना लायसेंस ले सकता है। सूचना तकनीक के प्रयोग से सरकारी कर्मचारियों को भी सुविधा हुई है। संचालनालय कोष एवं लेखा द्वारा अब सभी कर्मचारियों के वेतन सहित सभी स्वत्वों का भुगतान सीधे उनके बैंक खाते में किया जा रहा है। इससे कर्मचारियों को अपने भुगतान प्राप्त करने में होने वाली असुविधा से निजात मिल गई है। इसी तरह वित्त विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, नगरीय प्रशासन और विकास विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग, कृषि, वन, पर्यटन एवं संस्कृति,खनिज, ऊर्जा, महिला एवं बाल विकास, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, आदिम जाति कल्याण, शिक्षा सहित लगभग सभी बड़े विभाग अपनी सेवाओं को ऑन लाईन किया जा रहा है।

निश्चित रूप से छत्तीसगढ़ में पिछले एक दशक में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में काफी परिवर्तन हुए हैं। इससे आम जनता की सुविधाएं बढ़ी हैं साथ ही प्रशासन में भी पारदर्शिता आयी है। तकनीक के साथ ही कार्य संस्कृति में भी बदलाव आया है। आने वाले समय में सूचना प्रौद्योगिकी से नागरिक सेवाओं का विस्तार होगा तथा काम-काज और आसान होगा।
 

02 सितंबर 2012


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