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पंखुरी सिन्हा की तीन कविताएं

साहित्य

 

पंखुरी सिन्हा की तीन कविताएं


पर्सोनलाइज़ेशन

पंखुरी सिन्हा


व्यक्तिकरण
हर कुछ का
हर सेवा
हर सर्विस का
पर सबसे ज्यादा उस नंबर का
जिसे थामे रहती हो वह सांझ सवेरे
मुट्ठी में अपनी
रात दिन भिची हुई उँगलियों में अपनी
संभवतः दुश्मनी सेना के ही एक अवयव का
जिसे मिलाया भी हो उसने
जब लगा हो उसे कि डाली है चाभी किसी ने
मुख्य दरवाज़े की सिटकिनी में
आधी रात को
कि धीमे
कि गति में
छिपाई गयी है
खन्न से सिटकिनी घूमने की आवाज़
कि बहुत धीमे खिसका रहा है
कोई बाहरी क्लोज़ेट का दरवाज़ा
खासी कच्ची हो नींद आपकी
फिर से चोकोलेट आइसक्रीम खरीद और खा लेने के बाद
खोलने के बाद सारा बंधा सामान
और पाने के बाद
कि गायब हैं
तीनों व्हाइट मिल्क चॉकलेट के बार
आपकी नींद हो खासी कच्ची
मिला लेने के बाद वह नंबर भी
और खिल रहे हों फूल आधी रात को
गमलों में मेरे बरामदे में
खिल रहे हों फूल गमले में
मेरे कमरे में
रात को
सोते में
दूर मेरी माँ के घर में
खिल रहा हो मेरा प्रिय गुलाब
कंटीला गुलाब
फूल खिल रहे हों
शहर के बगीचों में
घरों में अमीर उमरा के
घरों में उनके जिन्हें जाना हो दफ्तर
सुबह के 6 बजे
और बज रही हो दुदुम्भी
युद्ध की बहुत तेज़
कि कैसे घुस रहे हों चोर
फूलों के रास्ते
रास्ते बगीचों के
कमरों में हमारे
और कि भूकंप के एक झटके में
हो रहा हो सब मिट्टी
सिर्फ मिट्टी
आख़िरी सच मिट्टी.

एक पारदर्शी कविता

लौटकर यात्रा से नहीं
शिकार से नहीं
आखेट से नहीं
एक भयानक धुंध भरे जंगल से
जहाँ सूझता न हो हाथ को हाथ
और काई इतनी मोटी
इतनी गहरी
मखमली भी
फिसलन भरी
कि पतंग हो गया हो दिल
तितली भरा
तितली ही हो गयी हो सांस
भाप नहा गयी हो पसीने से उसे
पकड़ते उसकी बात का सार
इतनी भयानक धुंध में
कि चिड़िया बन गया हो दिल
और डैने समेटते हों कई कई किस्म के पक्षी
विशालकाय करीब उसके.

एक पारदर्शी लम्हा

पूरी तरह पारदर्शी हो गया था लम्हा
आर पार देखा जा सकता था उसे
डूबते उतरते प्यार में उसके
आखिर कह क्या रहा है वह

पारदर्शी हो गए थे चिड़ियों के सारे रंग
दूधिया हो गया था किंग बर्ड ऑफ़ पैराडाइज़ का सफ़ेद
कमरे में फ़ैल गया था कथैयी उसका
समुद्र से उठते भाप की तरह
रंगीन किसी भाप की तरह
जैसे उड़ेला गया हो गीला रंग ढेरों
चित्रकार की चित्रशाला में
जैसे कमरे को रंग जाये कोई जादू से
कि क्या प्यार कह रहा है वह
कि ऐसी कैसी लड़ाई कोई?
उससे भला उसकी क्या लड़ाई?

हाँ प्यार ही कह रहा है वह
प्यार जो जन्म देता है
पुनर्जन्म
वही प्यार
अपनी नीली नुकीली टांगों से
फुदकता हुआ
ये कारावारी नदी का पक्षी
नीला सफ़ेद पक्षी
जो चला आया है
करीब उसके
गर्दन पर उसकी
फड़फड़ाता
चुभोता नीले नाखून
जब सृजन हो सब कुछ
सारी जीवनी शक्ति का अर्थ जन्म देना
दूत उसका कि सन्देश उसका
कि प्रेम उसका
मंडराना
एक अदृश्य पक्षी का
कमरे में उसके
समाना उसके प्राण पण में
और आना नहीं पकड़ में.

30.12.2012, 08.59 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

pankhuri sinha [nilirag18@gmail.com] Muzaffarpur - 2015-09-08 10:12:18

 
  बहुत, बहुत धन्यवाद मित्रों। कवितायेँ आपको पसंद आयीं बहुत ख़ुशी हो रही है.  
   
 

vipin bihari shandilya [vipinbihari947@gmail.com] balaghat - 2014-12-20 14:11:57

 
  अति सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति 
   
 

LAKSHMI PRASAD KARSH [lakshimi.karsh111@gmail. com] BILASPUR C.G. - 2014-11-18 15:17:05

 
  आपकी तीनों कविताएँ बहुत अच्छी हैं। 
   
 

Madhurima Prasad [prasadmadhurima@gmail.com] Allahabad - 2014-07-07 13:58:26

 
  पंखुड़ी जी की कविताएं बड़ी ही हृदयस्पर्शी हैं. ऐसे ही लेखक-लेखिकाएं मिले तो पढ़ने का मजा ही कुछ और होता है. 
   
 

BHUPENDRA BISHT [bsvisham@gmail.com] Lucknow - 2013-10-24 13:52:07

 
  कविताओं के इस घनघोर समय में ये कुछ नई रचनाएं कहीं जा सकती है. करेले की पिक्चर बहुत सजीव है. 
   
 

सुधीर कुमार सोनी [ankitalittlecraft@gmail.com] रायपुर - 2013-08-01 01:45:53

 
  सुंदर ,लाजवाब कवितायेँ हैं  
   
 

ब्रज [brajshrivastava7@gmail.com] vidisha - 2013-04-14 08:34:24

 
  उम्दा कविताऐँ॥ 
   
 

sanjeev buxy [buxysanjeev@gmail.com] raipur - 2013-03-19 11:07:51

 
  अच्‍छी कविताएं  
   
 

vinod vishwakarma [] noida - 2013-02-17 11:08:46

 
  आपकी तीनों कविताओं में बहुत उम्दा भाव पेश किए है आपने. खासकर एक पारदर्शी लम्हा. लाजवाब कविता. बधाई आपको. 
   
 

भगीरथ [gyansindhu@gmail.com] - 2013-02-15 16:54:19

 
  मर्म स्पर्शी औऱ भावनाप्रद  
   
 

avinash [] - 2013-02-14 01:28:03

 
  वह बहुत खूब... गर्दन पर उसकी / फड़फड़ाता / चुभोता नीले नाखून / जब सृजन हो सब कुछ / सारी जीवनी शक्ति का अर्थ जन्म देना. 
   
 

sudhakar aashawadi [ss.ashawadi@gmail.com] meerut - 2013-02-14 00:59:56

 
  तीनों कविताएं ही उच्च स्तरीय भावपूर्ण हैं, बधाई पंखुड़ी जी. 
   
 

om sapra [omsapra@gmail.com] delhi-9 - 2013-02-11 18:59:09

 
  ये कवितायें मर्म स्पर्शी औऱ भावनाप्रद हैं. मेरी शुभकामनाएं और बधाई. 
   
 

arvind mishra [] lucknow - 2013-02-11 08:33:27

 
  बहुत ही मार्मिक. संवेदना से भरी हुई. 
   
 

pankhuri sinha [sinhapankhuri412@yahoo.ca] calgary - 2013-02-10 21:13:32

 
  कविताएं पसंद करने के लिए बहुत धन्यवाद. 
   
 

jayant singh [jpsinghnk@gmail.com] nasik - 2013-02-10 10:00:10

 
  अति सुंदर कविताएं. 
   
 

Sharad Chandra Gaur [sharadgaur25@gmail.com] Jagdalpur Chhatisgarh India - 2013-02-10 05:33:49

 
  पूरी तरह पारदर्शी हो गया था लम्हा / आर पार देखा जा सकता था उसे डूबते उतरते प्यार में उसके / आखिर कह क्या रहा है वह. अच्छी कविताएं.. बधाई.  
   
 

Sangya Tiwari [sangya.tiwari2010@hotmail.com] Kanpur - 2013-01-21 12:50:11

 
  बहुत सुंदर कविताएं. 
   
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