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एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

 

छत्तीसगढ़ में सबको भोजन : हर्षित जन मन

डॉ. परदेशीराम वर्मा
 

छत्तीसगढ़

साबरमती आश्रम में एक वाक्य सबका ध्यान आकृष्ट करता है. यह कथन मार्टिन लूथर किंग का है, जिसे आश्रम में महत्व के साथ लगाया गया है - ''बौध्दिक और नैतिक संतुष्टि जो मुझे बेंथम और मिल के उपयोगिता-वाद में, माक्र्स और लेनिन के क्रांतिकारी सिध्दांतों में हॉब्स के सामाजिक समझौते के सिध्दांत में, रूसो के 'प्रकृति की ओर लौटो' वाले आशावाद में और नीत्से के अतिमानवीय दर्शन में नहीं मिल सकी, उसे मैंने गांधी के अहिंसावादी दर्शन में पा लिया''

महात्मा गांधी के सिध्दांतों की रोशनी में विश्व के महान लोगों से लेकर आम जन ने अपने जीवन की सार्थकता के लिए सही मार्ग को तलाशने का प्रयत्न किया. बापू ने यह भी कहा कि तुम जब भी कोई काम करो तो यह सोचो कि इससे समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े व्यक्ति को क्या लाभ होगा.

आम जनता के हितों के लिए जब भी कोई क्षमतावान व्यक्ति बड़ा निर्णय लेता है तो निश्चित रूप से बापू के बताये सिध्दांतों की रोशनी उसे राह दिखाती है. छत्तीसगढ़ सरकार के मुखिया डॉ. रमन सिंह ने चांऊर वाले बाबा के रूप में अपार यश प्राप्त किया. उनके खाद्यान्न से जुड़े सफलता के चर्चित करिश्मे को सबने सराहा. दिल्ली की सरकार ने भी डॉ. रमन सिंह के सुप्रबंधन को रेखांकित किया, सम्मान के योग्य सम्मान के योग्य समझा. उन्होंने गरीबों को भोजन की गारंटी देने का अपना संकल्प पूरा किया. इसके लिए उन्होंने देश का पहला खाद्य सुरक्षा कानून बनवाया. गरीबों को भोजन देने से प्राप्त पुण्य की महत्ता को उन्होंने अपनी माताजी से समझा.

माताएं शिशुओं की किस तरह संस्कारित करती हैं, यह हम मुक्तिबोध के द्वारा लिखित प्रेमचंद संबंधी लेख के माध्यम से बेहतर समझ पाते हैं. मुक्तिबोध ने लिखा है कि मेरी माताजी नहीं जानती थीं कि वे अपने बेटे को किस कठिन राह का राही बना रही हैं. प्रेमचंद के मार्ग पर चलना कठिनाई का काम तो था ही.

मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की माताजी ने भी अपने बेटे से कहा था कि तुम गरीबों को भरपेट भोजन देने का यत्न करो. एक प्रांत के मुख्यमंत्री के लिए यह सरल काम नहीं था. माता श्रीमती सुधादेवी सिंह नहीं जान रही थीं कि वे डॉ. रमन सिंह को कितना कठिनतर दायित्व सौंप रही हैं. मगर मातृकृपा से यह कठिन काम भी संभव हुआ.

गांधीजी जिस अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के हितों की चिंता करने हेतु कह गए हैं डॉ. रमन सिंह ने कमजोर लोगों को भोजन मुहैया करवाकर उस सिध्दांत के मर्म को खूब समझा. समाचार पत्रों ने लगातार इस निर्णय की महत्ता को रेखांकित करते हुए लिखा-'छत्तीसगढ़ में अब कोई भी भूखा नहीं रहेगा.'

खाद्य सुरक्षा कानून पारित कर इसे लागू करने वाला पहला राज्य बन गया है हमारा छत्तीसगढ़. भगवान श्रीराम की जननी छत्तीसगढ़ की बेटी माता कौशल्या के आशीष से यह नेतृत्व छत्तीसगढ़ कर सका. अब 42 लाख परिवारों को हर माह सस्ता अनाज पाने की पात्रता होगी.

पहले यह पात्रता 34 लाख 70 हजार परिवारों को थी. केन्द्र सरकार देश भर में खाद्य सुरक्षा कानून लागू करने के संबंध में जरूर संकल्पित है, लेकिन छत्तीसगढ़ ने आगे आकर यह करिश्मा ठीक उसी तरह कर दिखाया जिस तरह महात्मा गांधी के जीवन काल में छत्तीसगढ़ के सपूत पंडित सुंदरलाल शर्मा ने छत्तीसगढ़ में समतावादी सिध्दांतों को उनसे पहले अमली जामा पहनाकर दिखा दिया था. पंडित सुंदरलाल शर्मा ने दलितों को मंदिर प्रवेश करवाया. इसे जानकर महात्मा गांधी ने उन्हें उनकी अग्रगामिता के लिए सम्मान दिया. ठीक उसी तरह मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने छत्तीसगढ़ को अपने अग्रगामी सफल संकल्प से पुन: यशस्वी बनाया है.

केन्द्र सरकार से पहले उन्होंने वह बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लेकर अपार यश अर्जित किया है. प्रदेश का कोई व्यक्ति भूखा न रहे इसके लिए निराश्रित आवासहीन, प्रवासी, प्राकृतिक आपदा प्रभावितों के लिए कानून में भोजन की व्यवस्था की गई है. महिलाओं एवं बच्चों के लिए पोषण आहार का प्रबंध किया गया है. इस नियम से प्रदेश के 42 प्रतिशत गरीब परिवार लाभान्वित होंगे.

छत्तीसगढ़ की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को देश के लिए रोल माडल माना जा रहा है. प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर वाहवाही मिली है. यह एक बड़ा कदम है. इससे प्रदेश से पलायन कर रोजी के लिए अन्यत्र जाने वालों को नये विकल्प के कारण सम्बल मिलेगा. वे अपने प्रदेश में रहकर और जमीन से जुड़कर जी सकेंगे. इसके विकास में भागीदार बन सकेंगे. वर्ष 1856 से लगातार छत्तीसगढ़ से लोग भूख से लड़ने के लिए पलायन करते रहे.

छत्तीसगढ़ की प्रथम महिला सांसद स्वर्गीय मिनीमाता जी के नाना जी तथा देश के कृषि राज्य मंत्री डॉ. चरणदास महंत के दादाजी भी छत्तीसगढ़ छोड़ने पर मजबूर थे. इस बड़े निर्णय से छत्तीसगढ़ के लाखों लाख लोगों को राहत मिलेगी.
संत पवन दीवान ने वर्षों पहले कभी व्यथित होकर लिखा था-
'पेट भरे को भोजन मिलता, भूखे अपना दिल खाते हैं,
रोने वाले रोते रहते, हंसने वाले हंस जाते हैं'

लेकिन वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. रमनसिंह ने खाली पेट वालों के लिए भोजन का भरपूर प्रबंध कर छत्तीसगढ़ के लिए चिंतित लोकप्रिय पवन दीवान जी जैसे सपूतों को आश्वस्त किया है कि रोने वाले अब हंसेगे और किसी को खाली पेट सोना नहीं पड़ेगा.

उल्लेखनीय है कि यह अधिनियम छत्तीसगढ़ खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2012 कहलायेगा. इसका विस्तार समग्र छत्तीसगढ़ में होगा. विशेष समूहों के लिए पात्रताएं तो तय की ही गई हैं, छात्रवासों तथा आश्रमों में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए पोषाहार सहायता तथा बच्चों को कुपोषण से बचाने हेतु प्रबंध भी इसी अधिनियम के तहत किया गया है.

अन्त्योदय परिवार, गर्भवती महिलाओं के साथ ही आपात अथवा आपदा प्रभावित व्यक्तियों के लिए इस विधेयक में संकल्प सन्निहित है. चावल के साथ ही आयोडीन नमक, काला पौष्टिक चना और दाल भी दिया जाएगा. अन्त्योदय परिवार के साथ प्राथमिकता वाले परिवारों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 47 अन्य बातों के साथ यह भी उपबंधित करता है कि प्रत्येक राज्य का यह कर्तव्य होगा कि वह पोषाहार स्तर और जीवन स्तर को ऊंचा कर लोक स्वास्थ्य में सुधार करेगा. छत्तीसगढ़ सरकार ने इस अधिनियम को पारित कर देश भर में विशिष्ट सम्मान प्राप्त किया है.

छत्तीसगढ़ पहला राज्य है जहां के समस्त पात्र परिवारों को भूख से मुक्त करने हेतु सरकार ने ऐसा बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है. भूख के विरूध्द लगातार चिंतकों ने अपना अभिमत देते हुए सरकारों को भूख से लड़ती जनता से जुड़ने के लिए अभिप्रेरित किया है. दुष्यंत कुमार ने व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा था -
'भूख है तो सब्र कर, रोटी नहीं तो क्या हुआ,
आजकल दिल्ली में है जेरे बहस यह मुद्दआ.'

फ्रांस की क्रांति से रोटी की अहमियत की कथा अभिन्न रूप से जुड़ी हुई है. भूखी जनता, सरकारों और सत्ताओं को एक सीमा के बाद बर्दाश्त नहीं करती. छत्तीसगढ़ धान का भंडार कहलाता है. यहां की सरकार ने भूख से लड़ने का सफल संकल्प लेकर देश के लिए एक आदर्श प्रस्तुत किया है. भूख पर सर्वेश्वर दयाल सक्सेना की बेहद प्रभावी कविता है -
'जब भी
भूख से लड़ने
कोई खड़ा हो जाता है,
सुन्दर दीखने लगता है.'

समता और सहृदयता के लिए चर्चित, विकास की ओर तेजी से अग्रसर छत्तीसगढ़ संतृप्त होकर और सुन्दर बने यही हर छत्तीसगढ़ की कामना है.
*(लेखक डॉ. परदेशीराम वर्मा छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार हैं. सम्पर्क सूत्र : एल.आई.जी.-18, आमदी नगर, हुडको, भिलाई छत्तीसगढ़)
 

5 फरवरी 2013


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