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श्रमिक कल्याण

एडवर्टोरियल: छत्तीसगढ़

 

छत्तीसगढ़ में श्रमिक कल्याण की नई पहल

कमलेश साहू


छत्तीसगढ़ के लाखों मेहनतकश महिला श्रमिकों और कर्मकारों के लिए अब एक खुशहाल और सम्मान की जिंदगी केवल सपना भर नहीं है। ये सपने अब हकीकत में भी बदल रहे हैं। उनकी जिंदगी, उनके काम, सहूलियत, सेहत, सामाजिक सुरक्षा और भविष्य की चिंता यहां की सरकार एक अभिभावक की तरह कर रही है। उनके जीवन की तकलीफें कम करने और हर जरूरत को पूरा करने के लिए छत्तीसगढ़ की संवेदनशील सरकार ने अनेक कदम उठाएं हैं। असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल, भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, कर्मचारी राज्य बीमा सेवा और श्रम कल्याण मंडल जैसी संस्थाओं का गठन कर यहां महिला श्रमिकों के हर तबके का ख्याल श्रम विभाग ने रखा है। श्रम विभाग की अनेक कल्याणकारी योजनाओं ने प्रदेश में महिला सशक्तिकरण को नया आयाम दिया है। इन योजनाओं का फायदा केवल महिला मजदूरों को ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार को मिल रहा है।

असंगठित क्षेत्र की महिला श्रमिकों को सायकल और सिलाई मशीन वितरण से बड़ी राहत मिली है। सायकल मिलने के बाद ये महिलाएं स्वावलंबी हो गई हैं और अब घर से दूर काम पर जाने के लिए इन्हें किसी आसरे की जरूरत नहीं है। इसी तरह सिलाई मशीन ने इन्हें आमदनी का एक नया जरिया दिया है। सिलाई मशीन मिलने के बाद ये खाली समय में सिलाई का काम कर अतिरिक्त कमाई कर रही हैं और घर की माली हालत सुधार रही हैं। असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल में पंजीकृत महिला कर्मकारों और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों दोनों को ही सायकल और सिलाई मशीन योजना का लाभ मिल रहा है। इन दोनों मंडलों के माध्यम से श्रम विभाग ने अब तक करीब 30 हजार सायकलें और करीब 40 हजार सिलाई मशीनें इन महिला मजदूरों तक पहुंचाया है।

असंगठित क्षेत्र में काम कर रही गर्भवती और शिशुवती महिला मजदूरों का भी पूरा ध्यान श्रम विभाग ने रखा है। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल द्वारा संचालित भगिनी प्रसूति सहायता योजना के माध्यम से बच्चे के जन्म के समय महिला निर्माण श्रमिकों को मातृत्व हितलाभ के रूप में सात हजार रूपए दिए जा रहे हैं। पुरूष श्रमिकों को भी पत्नी के मातृत्व अवकाश के समय पितृत्व हितलाभ के रूप में तीन हजार रूपए प्रदान किया जाता है। इस आर्थिक मदद से प्रसूति अवकाश के दौरान काम पर न जा पाने की वजह से महिला मजदूरों और उनके परिवार को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई काफी हद तक हो जा रही है। इसी तरह छोटे बच्चों वाली महिला श्रमिकों के लिए मंडल द्वारा काम की जगह पर ही चलित झूलाघर स्थापित किए जा रहे हैं। प्रदेश के ऐसे कार्यस्थलों में जहां 500 से ज्यादा श्रमिक काम कर रहे हैं, वहां मंडल ने चलित झूलाघर स्थापित करने का प्रावधान किया है।

महिला श्रमिकों की हर जरूरत को पूरा करने छत्तीसगढ़ सरकार गंभीरता से काम कर रही है। बच्चों के विवाह जैसे पारिवारिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में भी श्रम विभाग ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। राजमाता विजयाराजे सामूहिक विवाह योजना के माध्यम से मजदूरों को स्वयं के या बेटियों के विवाह के लिए 15 हजार रूपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। निर्माण श्रमिकों की व्यवसायगत जरूरतों के मद्देनजर मुख्यमंत्री श्रमिक औजार सहायता योजना के तहत उन्हें औजार मुहैया कराए जा रहे हैं। महिला श्रमिकों को भी उनके काम के अनुसार रेजा-कुली सहित विभिन्न कार्यों के लिए जरूरी औजार किट्स वितरित किए गए हैं। इससे वे अपने व्यवसायिक कार्यों को बेहतर ढंग से अंजाम दे रहे हैं। मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर कौशल विकास परिवार सशक्तिकरण योजना के माध्यम से श्रमिकों का कौशल उन्नयन कर उन्हें कुशल श्रमिक बनाया जा रहा है। कुशल मजदूर के रूप में कार्य कर ये अधिक रोजी पा रहे हैं। इनमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। इस योजना के तहत परिवार की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार के लिए विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षित करने का प्रावधान है।

महिला श्रमिकों की बुनियादी और व्यवसायिक जरूरतों के साथ-साथ सरकार उनकी सेहत का भी ध्यान रख रही है। असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल और भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के अंतर्गत गरीबी रेखा से ऊपर के पंजीकृत कामगारों को भी राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत इलाज के लिए स्मार्ट कार्ड जारी किए गए हैं। गंभीर बीमारी की स्थिति में पंजीकृत श्रमिकों के इलाज में होने वाले 50 हजार रूपए तक के चिकित्सा व्यय का भुगतान भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल और असंगठित कर्मकार राज्य सामाजिक सुरक्षा मंडल करता है। निर्माण मजदूरों की दुर्घटना की स्थिति में 20 हजार रूपए तक का चिकित्सा व्यय भी मंडल द्वारा वहन किया जाता है।

महिला मजदूरों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार बखूबी उठा रही है। मुख्यमंत्री निर्माण मजदूर बीमा योजना के अंतर्गत सामान्य मृत्यु पर 30 हजार, दुर्घटना में मृत्यु होने या स्थाई अपंगता पर 75 हजार और दुर्घटना में एक अंग, एक हाथ या पांव के अक्षम होने पर निर्माण श्रमिकों के परिजनों को साढ़े 37 हजार रूपए की सहायता दी जाती है। इसी तरह विश्वकर्मा अंत्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता राशि भुगतान योजना के तहत कार्य के दौरान निर्माण श्रमिक की दुर्घटना से मृत्यु पर एक लाख, स्थाई अपंगता की स्थिति में 75 हजार और सामान्य मृत्यु पर 25 हजार रूपए का अनुदान दिया जाता है। अंत्येष्टि सहायता के रूप में मजदूर के परिवार को पांच हजार रूपए की तत्काल मदद भी इस योजना के माध्यम से दी जाती है।

वृद्धावस्था में निर्माण श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दृष्टि से प्रदेश में मुख्यमंत्री स्वावलंबन पेंशन योजना लागू की गई है। इस योजना के शुरू होने के बाद अब निर्माण श्रमिकों को भी 60 वर्ष की उम्र के बाद पेंशन मिलने लगेगा। इसके लिए उन्हें सालाना एक हजार रूपए का अंशदान पेंशन फंड में देना होगा। इस योजना के तहत मजदूरों के खाते में एक हजार रूपए का अंशदान श्रम विभाग द्वारा और इतनी ही राशि का अंशदान पेंशन निधि नियामक विकास प्राधिकरण द्वारा जमा कराया जाएगा।

महिला श्रमिकों को केंद्र में रखकर तैयार की गई श्रम विभाग की अनेक योजनाओं ने असंगठित क्षेत्र में काम कर रही महिलाओं के जीवन और कार्यस्थल पर व्यापक बदलाव लाएं हैं। इनसे न केवल इनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि महिला श्रमिकों की आर्थिक- सामाजिक स्थिति में सुधार के साथ उनका जीवन स्तर भी बेहतर हुआ है। पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटों का आरक्षण और परिवार के महिला मुखिया के नाम पर राशन कॉर्ड बनाने के साथ ही महिला श्रमिकों के लिए संचालित विशेष योजनाओं ने छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण को नया आयाम दिया है।

29 जून 2013


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