पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

सवाल विकास की समझ का

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

क्यों बढ़ रहा भूख का आंकड़ा

हमारे कुलभूषण को छोड़ दो

भारत व अमेरिका में केमिकल लोचा

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >सोहो Print | Share This  

सोहो:जिस्म से रूह का सफ़र

पुस्तक अंश

 

सोहो:जिस्म से रूह का सफ़र: फ्रैंक हुज़ूर

प्रकाशकः हिंद युग्म, 1, जिया सराय, नई दिल्ली-110016 मोबाइलः 9873734046, 9968755908
कीमतः 150 रुपये

soho


मिसेल की हर एक बात में एक्सप्लोसिव करिश्मा का एहसास हो रहा था.पोर्नोग्राफी को मैंने कभी भी एक प्रॉब्लम की तरह नहीं देखा है. पोर्न लैंड की इस हसीना से जब मैंने पूछा कि क्या उसे ऐसा नहीं लगता कि पोर्न ने सेक्सुअलिटी को हाईजैक कर लिया है तब उसकी आँखों में थोड़ी हरकत हुई.

मिसेल ने नज़रों को तेज़ किया और कहा कि ‘पोर्नोग्राफी को पब्लिक सिर्फ़ टिटिलेशन की माफिक क्यों लेती है? पोर्नोग्राफी मेरी नज़र में तालीम है. हाँ, अगर आप ऐसा सोचते हैं कि टीनेज बच्चों पे क्रूर, हिंसक पोर्न का गहरा असर होता है तो फिर जिस तरह आप उन्हें सिगरेट पीने से रोकते आये हैं उसी तरह पोर्न से भी बेपर्दा कर दीजिये. भला ये भी कोई मसला है क्या?’

मिसेल ने हैरानगी की इन्तेहाँ जारी राखी जब उसने ये कहा कि ‘मासूम बच्चे जब बिन लादेन के विडियो देखे और विडियो गेम खेले तब उनका दिमाग़ ख़राब नहीं होता है और जब उनकी आँखों के समंदर में हमारी सेक्सुअल एक्ट आ जाए तो जलजला आने लगता हैं? फिर मैं भी तो एक टीनेजर ही तो थी जब मैंने सेक्स के सेक्रेट गार्डेन में वाक किया था. हाँ ये ज़रूर है कि तब पोर्न मोबाइल फ़ोन, विडियोगेम और लैपटॉप पे आना शुरू ही हुआ था. सभी उसी उम्र में ज़िन्दगी की इस बेहद हसीं सौगात से रू-ब-रू होते हैं. पोर्न इज़ हार्मलेस दैन लादेन’, मिसेल ने चुलबुलाहट भरे अंदाज़ में कहा और मेरे मार्लबोरो लाइट सिगरेट के पॉकेट की तरफ़ अपने मिडल फिंगर से इशारा किया.

मैंने थोड़ी भी बेवफाई मिसेल के इस शौक़ से नहीं की और बेहद जल्दबाजी में सिगरेट का स्टिक उसके सुर्ख होठों के बीच टांग दिया. मैंने अपने लायटर जिसका नाम केंट था उससे चिंगारी निकाल मिसेल के होठों के बीच झूल रहे मार्लबोरो सिगेरेट को आग के हवाले कर दिया. मिसेल ने सिगेरेट के जलते ही एक लम्बा कश खीचा और लायटर मेरे राइट हैण्ड से अपने राइट हैण्ड के हवाले कर लिया.

उसकी आँखों ने लायटर के सिलिंड्रिकल छाती पे लिखे मेसेज को ग़ौर से पढ़कर सुनाया, ‘अ वार्निंग – कीप अवे फ्रॉम चिल्ड्रेन!’ जैसे ही ये लफ्ज़ उसके होठों को चुमते हैं गरम फिजा में दाखिल मेरे चेहरे पे थोड़ी हंसी आ जाती है.


मैं सो रहा था मुक़द्दर के सख्त राहों में, उठा ले गए जादू तेरी नज़र के. ये नासिर काज़मी का तरन्नुम नज़्म हौले-हौले असर करने लगा था. क़रीब एक दशक के दिलकश सफ़र में क्या कोई गिला शिकवा है भी या नहीं? मैंने मिसेल की आँखों में झाँका और अपने जवाब का इंतज़ार करने लगा. रूबी के रंग की माफिक उसकी आँखों में चमक आती और फिर गायब हो जाती. मैंने इटलियन वाइन वल्पोलिसल्ला से अपने मन को बहलाने का इंतज़ाम कर लिया था.

मिसेल की बातों में वाइल्ड बेर्रिज़ सा नशे का सुरूर था. ‘गिला-शिकवा तो ज़िन्दगी के दिन रात की तरह है’, मिसेल ने कहा. ‘वक़्त के साथ-साथ पोर्न इन्डस्ट्री भी बहकने लगी है. जब मैंने आगाज़ किया था तब क्लासिक पोर्न का दौर था. होल्लीवुड के फिल्मों की तरह पोर्न की भी अपनी पटकथा थी. कॉस्ट्यु म सुंदर होते थे, लोकेल्स महलों से लेकर झीलों के किनारे तक अजीब समां होता था. रोमांस हर सेक्सुअल अदां में झलकती थी. म्यूजिक और साउन्ड का अलग ही इफे़क्ट था. हर एक सीन पे हमें एक फीचर फिल्म के अदाकार की तरह रेहर्स करना होता था. बदले हुए ज़माने ने आज पोर्न इन्डस्ट्री को फटाफट ज्यातदा कर दिया है और उसी ने उसमें क्रुएल्टी और हिंसा परोसने का जुर्म किया हैं’.

मिसेल ने अपनी फिल्मों के हवाले से ये कहकर मुझे उत्साहित कर दिया कि उसने तक़रीबन हर चरित्र को निभाया है चाहे वो एक प्रिंसेस हो या किचन में डिश वाश करने वाली मेड और हर उस अदां में सेक्सुअल एक्ट को जीया है. तो फिर उसे किस एक्ट में ज्यादा सुकून का एहसास हुआ और कौन सा एक्ट उसके लिए परेशानी का सबब साबित हुई?

मिसेल मुस्कुराने लगी. ‘कहती है क्या करोगे हर उस अदा के पैमाने को जानकर’.

मैंने कहा, ‘मेरी इसमें गहरी दिलचस्पी है और फिर तुम्हारे पास छुपाने के लिए है ही क्या’. गिनिस बीअर के ग्लास को किनारे करने के बाद उसने बार टेंडर को रेड वाइन पेश करने का फ़रमान दे दिया. फायर प्लेस के ठीक सामने हम दोनों ने खाली हुए दो स्टूल को झटक लिया था. आग की सुहानी लपटें मिसेल के गालों पे झिलमिल रौशनी की तरह जगमगा रही थी.

रेड वाइन के एक सिप के बाद उसके गुलाबी होंठ पके हुए रेड चिल्ली की तरह और सुर्ख हो गए. मिसेल ने कहा, ‘पोर्न फिल्मों की शूटिंग एक पार्लर की तरह है. एक अदाकारा के जिस्म के हर हिस्से को सजाया जाता हैं. न्युड बॉडी का एक जबरदस्त जश्न है हमारी फिल्में. मुझे सबसे ज्यादा सुकून मेरी पहली फिल्म में आया था जब मुझे एक प्रिंसेस का रोल करना था, जिसे उसका अंगरक्षक दीवानगी की आग में धकेल देता हैं. जब भी मेरा बॉडी गार्ड मुझे कहीं भी लेकर जाता, लोकेल्स अक्सर किसी बल्यूए लेक का किनारा होता या किसी शानदार फोर्ट का आँगन या दीवारें. मुझे प्रिंसेस के गाउन को कुर्बान कर देना होता था और उसके दोनों जांघों के बीच अपने सर को दफ़न कर लेना होता था. अक्सर ये सिलसिला ऐसे ही चलता मगर बॉडी गार्ड हीरो को मुझे ब्ल्यूर लेक के कोल्ड वाटर में डुबाने का ज्यादा रोमांच होता था. और जब मेरे प्रिन्स को हमारे एक्ट के हवाले से खबर होती है तो वो बॉडी गार्ड के स्ट्रेट डिक को खून से नहला देता हैं.’

मिसेल ने ये कहते-कहते एक सवाल दाग दिया, ‘तुमने वो फिल्म देखी है, टिंटो ब्रास की निर्देशन वाली – ‘कालिगुला’?

1979 में पेंट हाउस प्रॉडक्शलन के बॉब गुचिओं के साथ मिलकर ब्रास ने होलीवुड की सबसे विवादस्पद फिल्म कालिगुला बनायी थी जिसमें ब्रिटिश अदाकार मल्कोम मैक्ड्वे ल ने कालिगुला की सेक्सुअल पर्वर्सन वाली ज़िन्दगी को सिल्वर स्क्रीन पे अमर कर दिया था.

मैंने बहुत ही कॉन्फिडेंस के साथ मिसेल को जवाब दिया कि हाँ मैंने कालिगुला देखी है और मैंने उसको काफ़ी ज्यादा एन्जॉय किया है.

मिसेल ने फिर कहा कि ‘कालिगुला यूँ तो पोर्न फिल्म नहीं थी मगर पेंट हाउस के पोर्न फिल्मों का सबसे एरोटिक प्रयोग इसमें किया गया है और उसके शौट्स हमारे लिए चार्ली चैपलिन के सिनेमा की तरह हैं. कालिगुला को अपनी तीनो सिस्टर, अग्रिपिना, दृस्सिला और जुलिया से भी मोहब्बत हो गयी थी और उस फिल्म में उन्हें न्युसड और सेक्सुअल एक्ट में बेहद ही एक्सबप्लिसिट तरीके़ से फिल्माया गया था. इन्सेस्ट को परदे पे ग्लैमराइज़ करके ब्रास ने तहलका मचा दिया था. जब कालिगुला को निकाह की ज़रूरत पड़ी तो उसने रोम के सबसे मशहूर तवायफ़ से निकाह करके सबको भौंचक्काग दिया था’.

मिसेल को पोर्न फिल्मों में इन्सेस्ट सेक्स के फिल्मांकन से कोई दिक्कत नहीं है. उसकी नशीली निगाहों में मैंने थोड़ा सुहाने भरम को टूटते हुए पाया. ‘इन्सेस्ट एक सोशल मर्ज़ है. इसका इलाज सिनेमा नहीं है. हमारी पोर्न फ़िल्में सिर्फ़ इस मर्ज़ का परदे पे नक़ल करती हैं. ये चुराई हुईं भी स्क्रिप्ट नहीं, बल्कि सीधा-सपाट अफसाना है. ये दुनिया का ऐसा दस्तूर है जिससे हम सब कभी भी आज़ाद नहीं हो पाये हैं.’

13.09.2013, 10.00 (GMT+05:30) पर प्रकाशित


इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in