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मोदी से पूछिए न !

मुद्दा

 

मोदी से पूछिए न !

कनक तिवारी

नरेंद्र मोदी


निहित स्वार्थों को राजनीतिक बिसात पर हितबद्ध होकर विन्यस्त करने वाले इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने टीवी चैनलों को वाकई बुद्धू का बक्सा बना दिया है. कुछ टीवी चैनल सूचनाओं, स्वार्थों, उगाहे गए धन, पूर्वग्रहों, और पक्षपातों के संदूक बन गए हैं. वे जनता को बुद्धू समझते हैं. पेड न्यूज़ अर्थात् भुगतान किए गए समाचारों की तरह टीवी चैनलों के इंटरव्यू भी प्रायोजित तथा नाटकों की तरह रिहर्सल किए हुए साफ साफ दिखाई पड़ते हैं. इंटरव्यूकार क्रिकेट के खेल में जानबूझकर ढीली ढाली गेंदें जिनमें कभी वाइड बॉल और नो बॉल भी होती हैं फेंकते हैं. अतिथि नेता आसानी से चौके छक्के मारता है. देश के लाखों दर्शक फिक्स किया हुआ बौद्धिक मैच देखते हैं. वे नेता को महान, ज्ञानवान, चरित्रवान और भगवान तक समझने लगते हैं. उन्हें नहीं मालूम होता कि प्रदर्शित नाटक के पीछे कितने कुटिल कुचक्र और इरादे हैं. व्यापार है और षड़यंत्र भी हैं.

देश के सबसे सक्रिय यायावर और प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठने के लालायित नेता नरेन्द्र मोदी का हालिया इंटरव्यू एक मुख्य चैनल में तीन इंटरव्यूकारों ने लिया. सभी प्रश्न ढीले ढाले, संयत भाषा में, सहमी हुई मुद्रा में एक के बाद एक तयशुदा तकनीक के तहत पूछे गए से लगे.

सबके उत्तर प्रामाणिक तौर पर दमखम के साथ आंकड़ों की अंकगणित को भी साधते हुए नरेन्द्र मोदी द्वारा सधी हुई शैली में दिए गए. उन दर्शकों को भी इंटरव्यू अच्छा लगा जो अन्यथा नरेन्द्र मोदी की कट्टरवादिता के समर्थक नहीं हैं. मुशायरा सफल रहा. दरी बिछाने, दरी उठाने वाले बेहद व्यावसायिक नज़र आए.

प्रत्यक्ष इंटरव्यू में प्रतिप्रश्नों की झड़ी लगनी चाहिए. कोई प्रतिप्रश्न नहीं हुआ. स्कूली बच्चों की तरह गुरुजी से सवाल पूछे गए. गुरुजी मुस्कराते, गंभीर होते, आक्रामक होते, करुण दिखते जवाब देते रहे. जननेता को सफलता के लिए कविता के नवरसों की जानकारी होनी चाहिए.

नरेन्द्र मोदी से कुछ बुनियादी सवाल पूछे जा सकते थेः-

1. मोदी ने महात्मा गांधी की स्मृति में गुजरात में अहिंसा विश्वविद्यालय खोलने का वर्षों पहले ऐलान किया था. उस अहिंसा विश्वविद्यालय का क्या हुआ? वह अब तक दिखाई सुनाई क्यों नहीं पड़ता? अपने सभी राजनीतिक भाषणों में नरेन्द्र मोदी गुजरात के ही विश्वसंत महात्मा गांधी के नाम का उल्लेख तक क्यों नहीं करते? उन्हें गांधी से क्यों एलर्जी है? अहमदाबाद स्थित महात्मा गांधी के भारत में सबसे पहले स्थापित साबरमती आश्रम के लिए गुजरात सरकार क्या कुछ करती है? उस आश्रम को विश्व प्रसिद्ध हेरिटेज के रूप में विकसित किए जाने का मोदी प्रशासन का कोई इरादा क्यों नहीं है? गांधी के आदर्शों के लिए स्थापित अहमदाबाद के गुजरात विद्यापीठ की हालत संसाधनों, सरकारी रुचि और सरोकार की दृष्टि से खस्ता क्यों है? इस संस्थान को गांधी अध्ययन केन्द्र के रूप में विश्व स्तर की प्रसिद्धि क्यों नहीं मिल सकती? जलगांव (महाराष्ट्र) में एक निजी उद्योगपति द्वारा निर्मित गांधी तीर्थ मोदी की ईष्र्या का विषय क्यों नहीं है?

2. गुजरात के विकास की कथा कहते मोदी उन प्रतिमानों को लेकर श्वेत पत्र क्यों नहीं निकालते जो देश के कई प्रदेशों तथा राष्ट्रीय औसत से भी मोदी सरकार के कार्यकाल की असफलता कहते हुए पिछड़े हुए हैं? भारत के संविधान में शिक्षा, स्वास्थ्य, भोजन, पेयजल, यातायात आदि कई अधिकार जनता को सरकारी क्षेत्र से मिलने के प्रत्यक्ष, अप्रत्यक्ष वायदे हैं. क्या मोदी वादा करेंगे कि निजी स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों, आवासीय कॉलोनियों वगैरह के मुकाबले आम आदमी के लिए सरकारें नेहरू और इन्दिरा गांधी के युग की तरह सुविधाएं जुटाकर देंगी. विद्युत, खनिज और तेल इत्यादि महत्वपूर्ण उद्योगों में एकाधिकारवादी कॉरपोरेट दुनिया को अपनी आॅक्टोपस गिरफ्त में देश को ले लेने की हरकतों पर अंकुश लगाने की कोशिश की जाएगी?

3. अपनी पत्नी को परित्यक्त करने को लेकर मोदी राष्ट्रीय जीवन के सबसे बड़े पत्नीविहीन पुरुष पदधारी बनने की यात्रा में इतने वर्षों तक रहस्यमय बनकर पिछले चुनावों तक चुनाव प्रपत्रों में पत्नी वाले कॉलम को निरंक क्यों रखते रहे?

4. सरदार पटेल की अंत्येष्टि में नेहरू के शामिल होने, चीन की शैक्षणिक विकास दर, तक्षशिला को बिहार में होने जैसी बीसियों इतिहास और भूगोल की गलतियां करने को लेकर मोदी ने खंडन या माफीनामा क्यों जारी नहीं किया?

5. कश्मीर की विशेष स्थिति की धारा-370 को समाप्त करने का ऐलान करने वाले मोदी इसी मुद्दे पर जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी की संविधान सभा में भूमिका का खुलासा क्यों नहीं करते?

6. मुसलमानों, ईसाइयों पारसियों आदि सभी अल्पसंख्यकों के धर्मों के कानूनी प्रावधानों को खत्म कर समान नागरिक संहिता बनाने का मोदी की अगुवाई में दिया गया आश्वासन यह क्यों नहीं बताता कि इस मुद्दे पर उनके संस्थापक पिता श्यामाप्रसाद मुखर्जी ने संविधान सभा की उपसमिति के समक्ष क्या लिखित राय जाहिर की थी? यह भी कि भाजपा ने पूरे देश में केवल एक मुसलमान को लोकसभा चुनाव लड़ने की टिकट क्यों दी है?
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