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आईसिस और तेल की राजनीति

विचार

 

आईसिस और तेल की राजनीति

राम पुनियानी


लगभग एक माह पहले (अगस्त 2014), मुस्लिम कार्यकर्ताओं-अध्येताओं के एक समूह ने विभिन्न शहरों में प्रेस वार्ताएं आयोजित कीं. उन्होंने आईसिस द्वारा की जा रही क्रूर हिंसा की भर्त्सना करते हुए वक्तव्य जारी किये. इन वक्तव्यों पर सबसे ऊपर, बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा गया था, ‘इस्लाम मीन्स पीस’ (इस्लाम का अर्थ है शांति). बयान में कहा गया था कि ‘‘भारतीय मुसलमान, ईराक और सीरिया में आईसिस द्वारा अल्पसंख्यकों पर किए जा रहे भीषण अत्याचारों की कड़ी निंदा करते हैं. हम धार्मिक असहिष्णुता और इस्लाम के नाम पर हिंसा और उत्पीड़न की भी निंदा करते हैं.’’ मैंने इस वक्तव्य को कई जगह भेजा. एक व्यक्ति का जवाब आया, ’’‘इस्लाम का अर्थ है शांति’ यह, इस सदी का सबसे बड़ा चुटकुला है‘’.

आईसिस


अभारत में इन दिनों लवजिहाद के बारे में प्रचार, जंगल में आग की तरह फैल रहा है. जाहिर है कि इस मुद्दे को सांप्रदायिक तत्वों द्वारा हवा दी जा रही है. शादी के साथ-साथ धर्मपरिवर्तन करने और लड़कियों द्वारा पीछे हट जाने की चन्द घटनाओं का इस्तेमाल, यह बताने के लिए किया जा रहा है कि मुस्लिम पुरूष, हिंदू लड़कियों से धोखा देकर विवाह कर रहे हैं और इसका उद्देश्य उन्हें मुसलमान बनाना है. एक मित्र ने मुझसे जानना चाहा कि क्या मैं ऐसे 100 मामले भी बता सकता हूं, जब मुस्लिम लड़कियों ने हिंदू पुरूषों से शादी की हो. मेरी किस्मत अच्छी थी कि और मैं 100 से भी अधिक ऐसे दंपत्तियों की सूची बनाने में सफल रहा. हिंदू पुरूष, मुस्लिम पत्नि के नाम से गूगल सर्च करने पर कई मर्मस्पर्शी प्रेमकथाएं सामने आईं. यह शायद उल्टा लवजिहाद है (http://on.fb.me/1rUe5da) पहले से ही जहरीले हो चुके वातावरण में अल कायदा के अल जवाहिरी ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें कहा गया है कि अल कायदा अपनी गतिविधियों का भारत में विस्तार करेगा.

इस्लाम और मुसलमानों के बारे में इतनी सारी भ्रांतियां फैला दी गई हैं और जनसाधारण के मन में इतनी गलतफहमियां बैठा दी गईं हैं कि किसी से यह कहना ही मुहाल हो गया है कि वे धर्म, और राजनीतिक लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए धर्म के दुरूपयोग, के बीच अंतर करें. देश और दुनिया में दिल को हिला देने वाली जो घटनाएं हो रही हैं उनके लिए इस्लाम और मुस्लिम समुदाय को दोषी बताया जा रहा है. आमजन अन्य धर्मों को तो ‘नैतिकता और शांति’ के साथ जोड़ने को तैयार हैं परंतु इस्लाम को नहीं. कई समूहों और संगठनों द्वारा ‘सहमति के उत्पादन’ के चलते, मुसलमानों का एक ऐसा चित्र बनाया जा रहा है जो न तो सही है और ना ही विश्व में शांति की स्थापना में मददगार साबित होगा. सभी मुसलमानों को एकसा बताया जा रहा है. चंद अपराधी मुसलमानों और इस्लाम के कट्टरवादी संस्करण को असली इस्लाम बताया जा रहा है, जिससे दशकों से चले आ रहे पूर्वाग्रह और मजबूत हो रहे हैं.

आईसिस का जन्म अलकायदा की कोख से हुआ है. अलकायदा के लड़ाकों को अमरीका और आईएसआई द्वारा स्थापित किये गये मदरसों में प्रशिक्षित किया गया था. इस बात के पर्याप्त प्रमाण हैं कि अमरीका, पश्चिम एशिया के तेल संसाधनों पर कब्जा करना चाहता है. इस क्षेत्र के बारे में अमरीका की नीति को इन शब्दों में बयान किया जा सकता है, ‘‘तेल इतना कीमती है कि उसे वहां के निवासियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता.’’ अमरीका की पश्चिम एशिया नीति को समझने के लिए आपको बड़े-बड़े विद्वानों की मोटी-मोटी किताबें पढ़ने की जरूरत नहीं है. आपको केवल हिलेरी क्लिंटन की एक छोटी सी वीडियो क्लिप भर देखनी होगी. वीडियो क्लिप में वे बड़ी शान से और बिना किसी लागलपेट के कहती हैं कि अमरीका ने मुस्लिम युवकों को प्रशिक्षित कर अल कायदा का निर्माण किया था. (bit.ly/1rUewnQ) इस क्षेत्र के इतिहास पर एक नजर डालने से ही हमें समझ में आ जायेगा कि मुस्लिम युवकों को प्रशिक्षित करने के लिए इस्लाम के तोड़ेमरोड़े गये वहाबी संस्करण का इस्तेमाल किया गया था.

अल कायदा का अमरीका ने केवल निर्माण ही नहीं किया वरन उसने उसे धन और हथियार भी उपलब्ध करवाये ताकि अल कायदा, अफगानिस्तान पर काबिज रूसी सेनाओं से मोर्चा ले सके. धीरे-धीरे, जब अलकायदा के भयावह अत्याचारों की खबरें छन-छन कर बाहर आनी शुरू हुईं तब अमरीकी मीडिया ने इस्लाम को ही दानवी प्रवृत्तियों का स्त्रोत बताने के लिए 9/11/2001 के बाद से ‘इस्लामिक आतंकवाद’ शब्द का इस्तेमाल शुरू कर दिया.
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