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क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

आलेख

 

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

राम पुनियानी


जाने माने विधिवेत्ता फाली एस नरीमन ने हाल में एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही. वर्तमान राजनैतिक स्थिति के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ‘‘हिंदू धर्म, पारंपरिक रूप से, अन्य सभी भारतीय धर्मों से तुलनात्मक रूप में सबसे अधिक सहिष्णु रहा है परंतु हाल में कट्टरवादियों द्वारा फैलाये जा रहे धार्मिक तनाव और घृणा फैलाने वाले भाषणों से ऐसा लगता है कि...हिंदू धर्म अपना सौम्य चेहरा बदल रहा है...’’.

हिंदू


इन दिनों आरएसएस की विचारधारा, अर्थात हिंदुत्व विचारधारा, से जुड़े संगठन लगातार ऐसी बातें कह रहे हैं जिनसे यह ध्वनित होता है कि भारत हमेशा से हिंदू राष्ट्र है और रहेगा. उनमे से कुछ भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता भी प्रगट कर रहे हैं. हिंदू एक धर्म है. हिंदुत्व एक राजनैतिक विचारधारा है. हिंदुत्ववादी संगठन तरह-तरह की बेहूदा बातें कर रहे हैं. वे दूसरे समुदायों के प्रति घृणा का वातावरण पैदा करने के लिए जहां एक ओर लव जिहाद जैसे मुद्दे उठा रहे हैं तो दूसरी ओर यह भी कह रहे हैं कि ‘‘हम सब हिंदू हैं’’.

इसके साथ ही, उदारवादी हिंदू धर्म पर हमले भी हो रहे हैं जिन लोगों ने एक मुस्लिम परिवार में जन्में सूफी संत शिरडी के सांई बाबा को अपना भगवान मान लिया है, उनसे यह कहा जा रहा है कि उन्होंने ठीक नहीं किया. हिंदुत्ववादी कई अलग-अलग बातें कह रहे हैं और उनके दावों में परस्पर विरोधाभास भी है. परंतु सबका लक्ष्य एक ही है-किसी न किसी तरीके, किसी न किसी बहाने से धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाना. जो मूल प्रश्न पूछा जाना चाहिए वह यह है कि क्या संघ परिवार से उठ रही आवाजें, हिंदू धर्म का प्रतिनिधित्व करती हैं या वे हिंदू धर्म के नाम पर राजनीति करने का प्रयास है. यह प्रश्न अधिक जटिल इसलिए बन जाता है क्योंकि इन दिनों अलकायदा और आईसिस जैसे कई संगठन, इस्लाम के नाम पर अपनी कुत्सित गतिविधियां चला रहे हैं

स्वाधीनता आंदोलन में महात्मा गांधी और मौलाना आजाद जैसे नेता शामिल थे जो अपने-अपने धर्मों में गहरी आस्था रखते थे. परंतु जहां तक उनकी राजनीति का प्रश्न है, वह पूरी तरह से धर्मनिरपेक्ष थी. उसी दौर में सावरकर और मोहम्मद अली जिन्ना जैसे लोग भी थे जो ‘धार्मिक’ तो नहीं थे परंतु हिंदू धर्म और इस्लाम के नाम पर अपनी राजनीति करते थे.

संघ परिवार, हिंदू धर्म को इस धर्म की एक संकीर्ण धारा-ब्राह्मणवाद-से जोड़ रहा है. हिंदू धर्म किसी एक पुस्तक, पैगम्बर या पुरोहित वर्ग पर आधारित नहीं है. हिंदू धर्म में ढे़र सारे देवता हैं, ईश्वर की कई तरह की मीमांसाएं हैं और सैंकड़ों पवित्र ग्रंथ हैं.

स्वाधीनता आंदोलन के दौरान गांधीजी ने यह दिखाया कि किस प्रकार हिंदू धर्म की उदारवादी परंपराओं का इस्तेमाल कर, धर्म को राजनीति से पृथक रखा जा सकता है. गांधीजी ने भारतीय राष्ट्रवाद की नींव रखी. उनका भारतीय राष्ट्रवाद, उस हिंदू राष्ट्रवाद से एकदम अलग था, जिसके प्रतिपादक हिंदू महासभा और आरएसएस थे. इन संगठनों का हिंदू धर्म संकीर्ण और असहिष्णु था.

चूंकि अधिकांश हिंदू, गांधीजी के अनुयायी थे, इसलिए हिंदू महासभा-आरएसएस का असहिष्णु हिंदू धर्म हाशिए पर पड़ा रहा. परंतु पिछले तीन दशकों में राममंदिर आंदोलन से शुरू होकर, राजनीति में ‘दूसरों’ के बारे में असहिष्णु दुष्प्रचार का बोलबाला बढ़ता ही जा रहा है. इस समय देश पर भाजपा का शासन है. स्वाभाविक तौर पर भाजपा और उससे जुड़े संगठनों को राज्य का संरक्षण प्राप्त है और इसलिये वे और खुलकर धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरूद्ध घृणा फैला रहे हैं.

वे उन लोगों को आतंकित करना चाहते हैं जो राजनीति और धर्म के उनके संस्करण से सहमत नहीं हैं. आरएसएस की राजनीति केवल ‘दूसरों’ को आतंकित करने तक सीमित नहीं है. वह उन हिंदुओं पर भी निशाना साध रही है जो संघ से भिन्न राय रखते हैं. मुझ जैसे लोगों को रोजाना अपमानित करने वाले और अश्लील भाषा में लगभग गालियां देने वाले संदेश बड़ी संख्या में मिलते हैं.

जैसे-जैसे धर्म के नाम पर राजनीति परवान चढ़ती जायेगी, समाज में असहिष्णुता भी बढ़ेगी. हमारे सामने चुनौती यह है कि हम लोगों को कैसे यह समझायें कि धर्म और धर्म के नाम पर राजनीति एकदम अलग-अलग चीजें हैं. इस संदर्भ में श्री नरीमन का वक्तव्य, उस प्रजातांत्रिक उदारवादी वर्ग की आह है, जो संघ परिवार के नेतृत्व में चल रही हिंदुत्वादी राजनीति के तेजी से आगे बढ़ते कदमों से अचंभित और परेशान है.

29.09.2014, 18.37 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

vinodkochar [vinodkochar043@gmail.com] - 2015-12-18 15:25:35

 
  आरएसएस हिंदुत्व को राष्ट्रवाद के रूप में मनवाने की मूर्खतापूर्ण जिद पर अपने जन्मकाल से ही अड़ा हुआ है|जबकि हिंदुत्व एक भारतीय जीवनपद्धति है जो सारी दुनिया मे बेमिसाल रही है|आरएसएस की चरित्र निर्माण की परिभाषा ही नहीं है|इसीलिए भ्रष्ट,शोषकऔर रूढ़िवादी हिन्दू भी अगर आरएसएस का स्वयंसेवक है तो उसे आरएसएस सच्चरित्र ही मानती है|नरेंद्र मोदी के मुखौटे के पीछे2014से देश की केंद्रीय सत्ता पर आरएसएस का कब्ज़ा हो जाने के बाद सेदेश में इनको अच्छा लगने वाला संकीर्ण हिंदुत्व भारत के सर्वसमावेशी उदात्त हिंदुत्व को नष्ट करने पर आमादा मालूम पड़ रहा है|इस घृणित लक्ष्य को पाने में,भगवानन करे,अगर आरएसएस सफल हो गया तो असली भारत की मौत सुनिश्चित है| 
   
 

Aashu Rameez [Aashurameez4@gmail.com] saharanpur - 2015-10-25 12:49:47

 
  Aap bahut achchha likhte hai aapka likha sahi disha
dikhata hai , aaj hamaare bharat ko aap jaisi hastiyo
ki behad jaroorat hai , aapka aashorwad bana rahe
 
   
 

choudhary sahab [madan4jat@gmail.com] jaipur - 2015-06-30 11:14:45

 
  सब कुछ बकवास लिखा है। RSS के बारे में आपकी सोच बिल्कुल गलत है।  
   
 

Punamchand [punamchand.bhargaw@gmail.com] Jodhpur - 2015-02-05 07:18:25

 
  आप का धन्यवाद कि आप ने हमे हमारे ईतिहास से अवगत करवाया 
   
 

Punamchand [punamchand.bhargaw@gmail.com] Jodhpur - 2015-02-05 07:18:13

 
  आप का धन्यवाद कि आप ने हमे हमारे ईतिहास से अवगत करवाया 
   
 

sumit [] Bangalore - 2014-10-11 16:51:08

 
  ये आपकी सोच कुछ अच्छी नहीं है क्युकी हिन्दू धरम के बरे मे ना तो हमे कोई बताता है और ना ही कोई फ़ोर्स करता है की ये करो वो करो और हिन्दू ना तो कभी किसी को पहले कोई चोट पहुचाए है और ना ही कभी पहुचाएंगे.पर हां ये जरूर है की दूसरे धरम मे जरूर फ़ोर्स किया जाता है ये सब कुछ करने को 
   
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