पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

सूचकांक से कहीं ज्यादा बड़ी है भुखमरी

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

प्रतिरोध के वक्ती सवालों से अलग

गरीबी उन्मूलन के नाम पर मज़ाक

जनमत की बात करिये सरकार

नेपाल पर भारत की चुप्पी

लोहिया काल यानी संसद का स्वर्णिम काल

स्मार्ट विलेज कब स्मार्ट बनेंगे

पाकिस्तान आंदोलन पर नई रोशनी

नर्मदा आंदोलन का मतलब

रिकॉर्ड फसल लेकिन किसान बेहाल

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

अंतिम सांसे लेता वामपंथ

युद्ध के विरुद्ध

किसके साथ किसका विकास

क्या बदल रहा है हिन्दू धर्म का चेहरा?

मोदी, अमेरिका और खेती के सवाल

 
  पहला पन्ना >विचार > Print | Share This  

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

विचार

 

मधुमेह की महामारी कीटनाशक के कारण?

जे के कर

 

diabetes

हाल ही में मैं अपने प्राइमरी स्कूल के एक दोस्त जो पेशे से चार्टर्ड अकाउंटटेंट है से अपने दवा दुकान के लिये ऑनलाइन जीएसटी भरने के सिलसिले में मिलने गया. उसी दिन ही बातचीत के दौरान मुझे ज्ञात हुआ कि वह मधुमेह से पीड़ित है. मेरे बाल्यकाल के मित्र जिससे मैं करीब चार दशक बाद मिला था के साथ कुछ ही पल गुजारने के बाद ही मुझे महसूस हुआ कि मधुमेह ने मेरे दोस्त के मुंह की हंसी छीन ली है.

संयोग से उसी दिन शाम को मेरी मुलाकात अपने प्राइमरी स्कूल के दिनों के दूसरे दोस्त से भी हुई. सरदार होने के बावजूद उसमें जीवंतता का अभाव नज़र आया जो मुझे दूसरे पंजाबियों से मिलने के दौरान महसूस होता है. मेरे प्राइमरी स्कूल के ही एक अन्य दोस्त जो सरदार है प्लमोनरी हाइपरटेंशन से पीड़ित है तथा जिसे घर में ही रोज ऑक्सीजन लेना पड़ता है इन दोंनों से ज्यादा जिंदादिल तथा जोशखरोश वाला है.

दरअसल मेरे दोनों को टाइप 2 मधुमेह ने जकड़ रखा है. दूसरी तरफ मैं खुद दमा, किडनी, हाइपोथाइराडिज्म, उच्च रक्तचाप तथा चक्कर का मरीज होने के बावजूद एक जिंदादिल इंसान हूं. बीमार हूं परन्तु बीमारी का अहसास तभी होता है जब या तो दमा बढ़ जाता है या चक्कर आने लगता है. पिछले तीन दशकों से दवा-मरीज और चिकित्सकों से जुड़े होने के बावजूद मुझे पहली बार इस बात का अहसास हुआ कि मधुमेह जिंदा इंसान की जिंदगी छीन लेता है. वैसे हमारे देश में मधुमेह के मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है.

भारत को तो मधुमेह की राजधानी ही कहा जाता है. दुनिया में सबसे ज्यादा मधुमेह के रोगी भारत में ही पाये जाते हैं. मधुमेह को जीवनशैली का रोग माना जाता है. जीवनशैली का रोग अर्थात् मॉर्डन जमाने के अत्यधिक कैलोरी वाले खाने तथा शारीरिक श्रम या व्यायाम की कमी के कारण पनपने वाला रोग.

रिसर्च सोसाइटी फॉर स्टडी ऑफ डाइबिटीज इन इंडिया (RSSDI) के अनुसार देश में 7 करोड़ लोगों को मधुमेह की बीमारी हैं. ग्लोबल बर्डन ऑफ डिसीज की रिपोर्ट के अनुसार साल 2005 और 2015 के बीच भारत में मधुमेह के कारण मरने वालों की संख्या में 50 फीसदी की वृद्धि हुई है. साल 2015 में मधुमेह के कारण 3 लाख 46 हजार लोगों की मौत हो गई थी. जहां दुनिया के अन्य देशों में मधुमेह से पीड़ितों में ज्यादातर 60 साल की उम्र के हैं वहीं भारत में जिन लोगों को मधुमेह हुआ है उनमें से 40-59 आयुवर्ग की संख्या अधिक है. इसका अर्थ होता है कि भारत में मधुमेह एक दशक पहले लोगों को अपनी जकड़ में ले लेता है.

यदि यह केवल जीवनशैली का रोग है तो क्यों यह अपनी चपेट में ग्रामीण भारत के लोगों को भी ले रहा है. साल 2015-16 के दौरान किये गये नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं में से 5.2% तथा शहरों की 6.9% महिलाओं के रक्त में शर्करा की मात्रा 140 mg/dl के करीब है तथा ग्रामीण क्षेत्र की 2.3% एवं शहरों की 3.6% महिलाओं के रक्त में शर्करा की मात्रा 160 mg/dl है. इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्र के पुरुषों में से 7.4% तथा शहरों में 8.8% के रक्त में शर्करा की मात्रा 140 mg/dl है. इसी तरह से ग्रामीण क्षेत्र के पुरुषों में से 3.5% तथा शहरों के 4.4% पुरुषों के रक्त में शर्करा की मात्र 160 mg/dl के करीब है.

इस आंकडे से जाहिर है कि यदि मधुमेह केवल जीवनशैली का ही रोग होता तो शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र में इसकी पीड़ितों की संख्या में महज 1% का अंतर न होता, यह होता और ज्यादा. अर्थात् शारीरिक मेहनत करने वाले तथा जंक फूड न लेने वाले ग्रामीण भी करीब-करीब शहरी आबादी के समान ही मधुमेह के रोग से ग्रसित हैं. ऐसा ही विचार हमारे परिवारिक मित्र के घर में हुये एक कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के एक जनरल फीजिशियन ने भी व्यक्त किया था. उन्होंने बताया कि वे उस समय हैरान रह गये थे जब उनके पास गांव की एक महिला आई जिसे मधुमेह ने जकड़ रखा था.

डॉक्टर साहब के लिये हैरानी की बात यह थी कि जंकफूड से दूर तथा मेहनत करने वाली ग्रामीण महिला को भी मधुमेह ने जकड़ लिया था. बातों ही बातों में डॉक्टर साहब ने आशंका व्यक्त की कि कीटनाशकों के कारण मधुमेह की बीमारी बढ़ी है. उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की मधुमेह रोग विशेषज्ञ कल्पना दाश ने दिसंबर 2015 में बीबीसी को आशंका व्यक्त की थी कि सब्जियों में कीटनाशकों का इस्तेमाल भी मधुमेह के लिए ज़िम्मेदार है.

दिसंबर 2015 में प्रकाशित बीबीसी के छत्तीसगढ़ के संवाददाता द्वारा की गई पड़ताल से इसका खुलासा हुआ था कि छत्तीसगढ़ में आश्चर्यजनक रुप से बेहद ग़रीब और श्रमिक वर्ग मधुमेह का शिकार हो रहा है. ग्रामीण इलाकों में भी मधुमेह तेज़ी से फैल रहा है.
आगे पढ़ें

Pages:

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.in