विश्व कविता से एक चयन
विश्व कविता से एक चयन
अंगरेजी से अनुवादः
पीयूष दईया
एक कोविद प्रेयसी
इज़ोबेल केम्पबेल
आइरिश कवि
बताओ उसे यह सब एक झूठ है
मैं उसे अपने जीवन जितना प्यार करती हूं ;
उसे मुझसे जलने की ज़रूरत नहीं-
मैं उसे प्रेम करती हूं और उसकी पत्नी है रक़ीबा
अगर वह मुझे मार दे अब डाह के कारण
उसकी पत्नी द्वेष से मर जाएगी ,
वह मर जाएगा अपनी पत्नी के लिए दुख के चलते-
एक रात में हम तीनों मृत.
सारी आशीषें पृथ्वी से स्वर्ग तक
माथे पर औरत के जिससे मुझे है घृणा,
और मरद मैं जिसे प्यार करती अपने जीवन जैसा,
अचानक मौत हो उसका भाग्य .
विरोध
केनेको मित्सुहारू
जापानी कवि, 1895-1975
अपनी जवानी में
मैं पाठशाला के विरुध्द था.
और अब, वापस,
मैं काम करने के विरुध्द हूं.
सबसे उपर यह आरोग्य
और है आचारसंस्कार जिससे मुझे चिढ़ है भरसक.
आरोग्य और ईमानदारी से ज्यादा क्रूर
मनुष्य के लिए कुछ और नहीं.
बेशक मैं ' जापानी आत्मा ' के विरुध्द हूं
और कर्तव्य व मानवीय संवेदना से मुझे उल्टी आती है.
मैं किसी भी सरकार के पक्ष में नहीं , कहीं की क्यों न हो भले
और लेखकों और कलाकारों की बिरादरी को तो अपना चूतड़ दिखाता हूं.
जब मुझसे पूछा जाय कि मैं किसलिए पैदा हुआ
बिना झिझक , मैं जवाब दूंगा , '' विरोध करने को. ''
जब मैं पूर्व में हूं
मैं जाना चाहता हूं पश्चिम में.
बायीं पर मैं अपना कोट ढीला करता हूं , मेरे जूते दायें और बायें.
अपना पायजामा मैं पीछे से आगे पहनता हूं और घोड़े पर सवारी उसके पिछवाड़े की ओर चेहरा
किये करता हूं.
अन्य सब जिससे घृणा करते हैं मैं पसंद करता हूं
और मेरी सर्वोपरि घृणा वे लोग हैं जो महसूसते हैं वही एक
मैं यह विश्वास करता हूं : विरोध करना
जीवन में अकेली शानदार चीज है.
विरोध करना जीना है.
विरोध करना अपने आपे पे पकड़ बनाना है.
आगे पढ़ें
बजाते ख़ुद को
गियाकोमो लियोपार्डी
इतालवी कवि, 1798-1837
अब रहोगे सदा निश्चल ,
मेरे थके दिल मैंने सोचा था जिसे सनातन,
है चल बसा वह आखिरी धोखा. मरा हुआ. हमारे लिए, मैं जानता हूं
आत्मीय आस न केवल
चली गयी है छले जाने की , बल्कि इच्छा भी.
निश्चल पड़ रहो हमेशा तुम्हारा
कचूमर निकल चुका काफ़ी और बेमतलब
सारी हलचलें थीं तुम्हारी; पृथ्वी तुम्हारी आहों के काबिल नहीं.
उब और कड़वाहट
है जीवन; और बाकी, कुछ नहीं; संसार मिट्टी है.
अब चुप पड़े रहो निराशा
आखिरी बार के लिए हमारी तरह की सीरत वालों को बदा है
केवल मरना अब तुम कर सकते हो अवज्ञा
अपनी, ओ ! कुदरत--क्रूर
शक्ति जो, छिपी हुई--विहित करती आम होनी ,
और चीज़ों के सारे अमाप खालीपन की.
हरा
जुआन रामोव जिमएनेझ
स्पहानी कवि, 1881-1958
हरी थी कुवांरी, हरी, हरी !
हरी थी आंखें उसकी, हरे थे बाल.
हरे जंगल में जंगली उसके गुलाब
न थे लाल न थे सफ़ेद, हरे बल्कि.
हवा से हरी आयी वह
लिए उसके गयी बदल हरे में धरा सकल.
चमकता वस्त्रा का उसके पैमाना
न था नीला न था सफ़ेद, हरा बल्कि.
हरे समन्दर उपर आयी वह.
और आकाश तक हरे में तब गया बदल.
सदा रखेगा खुला छोड़ जीवन मेरा
छोटा एक दरवाजा अंदर उसके आने को.
अजनबी
एल्डो पैलेझेस्चही
इतालवी कवि, 1885-1974
इतालवी से भाषान्तर : जेरोम रोथेनबर्
क्या तुमने उसे आजरात यहां से जाते देखा था ?
मैंने उसे देखा था.
क्या तुमने उसे कल रात यहां से जाते देखा था ?
मैंने उसे देखा था, मैं उसे देखता हूं यहां रात के बाद एक और रात.
क्या उसने तुम्हारी ओर नज़र डाली थी ?
बेशक लेकिन उसकी नज़र कभी बदलती नहीं ,
उसकी नज़र तुम्हें देखती है उपर ,
तुम्हारे उपर नज़र रखती है , आकाश जहां शुरू होता है ,
पृथ्वी खत्म होती है, वहां बाहर
जहां सूर्य तले
रोशनी की एक झीनी लकीर है जो अब भी वहां है.
और फिर अंधेरा है जब वह बदल लेता है अपना मार्ग.
बिलकुल अकेला ?
बिलकुल अकेला.
और वह कैसे कपड़े है पहना ?
काले में, हमेशा काले में.
20.02.2009,
19.28 (GMT+05:30) पर प्रकाशित