इस अंक में
भाषा वसुधाः बोलियों का कुंभ
चुनावी मसाले की सोंधी महक
मोटापा की चिंता में दुबलाती मप्र सरकार
यह सबके लिये चेतावनी है
थप्पड़ के नाम पर
ये कहां आ गये हम
तब तो मतलब है चुनाव आयोग का
मनमोहन सिंह को अब आई शर्म ?
भूमि-सुधार के अनसुलझे सवाल
जल, जंगल, जमीन, जिंदगी... सब बर्बाद !
बुरी नज़र वाले तेरा डैम फूल
लुप्त होने के कगार पर हैं असुर
आरटीआई के बारे में नहीं जानते हम
मैं आदमखोर नहीं था
रामकथा पर रार क्यों ?
आत्महत्या की फसल
जॉन ज़ेरज़नराज्य का शत्रु
प्रीतीश नंदीईमेल का अंत
राहुल राजेशशिक्षा:जीवन या नौकरी के लिये
हितेन्द्र पटेलहिन्दी जातीयता के सवाल
लोकसभा चुनाव 2009
मुसलमानों की राजनीतिक त्रासदी
देश के मुसलमानों के इर्द-गिर्द बुने कुछ मिथकों के मकड़जाल ने उन्हें राजनीतिक दलों का बंधक बना दिया है. इस मकड़जाल से मुक्ति के लिए उन्हें एक आम हिंदुस्तानी वोटर की तरह देखना होगा. भारतीय मुसलमान की हालत फिल्मी परदे और राजनीति के मैदान में एक-सी है. चुनाव विशेषज्ञ योगेंद्र यादव का विश्लेषण.
लोकतंत्र के बेताल का सवाल हमारे देश का भाग्य विधाता अपनी ही सरकार से हारा, अपने भाग्य को कोसने पर मज़बूर क्यों है ?
आम चुनाव ऊर्फ ऐसा देश है मेरा आज़ादी के 60 साल बाद भी राजस्थान उपेक्षित है लेकिन उसकी आस्था लोकतंत्र में ही है.
घोषणापत्रों में अलग क्या है ! राजनीति का वह बुनियादी सच यह है कि आज मुख्यधारा के सभी दल वैचारिक रूप से एक-दूसरे के बेहद करीब खड़े हैं.
सार्थक लोकतंत्र का सपना चुनाव लड़ने की एक अनिवार्य शर्त यह होनी चाहिए कि उस व्यक्ति के सार्वजनिक जीवन की पृष्ठभूमि हो लेकिन ऐसा नहीं है.
कौन बनाएगा प्रधानमंत्री कौन बनेगा प्रधानमंत्री? किसकी होगी सरकार? जैसी बहसों के बीच दो बुनियादी सवाल गुम होते जा रहे हैं. कौन बनाएगा प्रधानमंत्री? कैसा होगा लोकतंत्र?
चुनाव में युवा वोटर की गूंज क्या सचमुच इस देश में ऐसा नौजवान या युवा वोटर मौजूद है, जो अपने दम पर भारतीय राजनीति और चुनावों की दिशा तय कर सके?
धर्मनिरपेक्षता का तराजू चुनावी मैदान में उतरे विभिन्न राजनैतिक दलों की धर्मनिरपेक्षता के प्रति कितनी प्रतिबध्दता है, यह जानना भी महत्वपूर्ण है.
देश को अडवाणी के योगदान आडवाणी फॉर पीएम का इश्तेहार वेब पर इस वक्त हर कहीं है. लेकिन लालकृष्ण अडवाणी का इस देश को योगदान क्या है ?
फिर तेरी कहानी याद आई जैसे ही चुनाव खत्म होगा, कृषि और कृषकों की समस्याओं से संबंधित सारी बातें फिर से पूरी तरह से भुला दी जाएंगी.
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