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इस अंक में

 

भाषा वसुधाः बोलियों का कुंभ

चुनावी मसाले की सोंधी महक

मोटापा की चिंता में दुबलाती मप्र सरकार

यह सबके लिये चेतावनी है

थप्पड़ के नाम पर

ये कहां आ गये हम

तब तो मतलब है चुनाव आयोग का

मनमोहन सिंह को अब आई शर्म ?

भूमि-सुधार के अनसुलझे सवाल

जल, जंगल, जमीन, जिंदगी... सब बर्बाद !

बुरी नज़र वाले तेरा डैम फूल

लुप्त होने के कगार पर हैं असुर

भाषा वसुधाः बोलियों का कुंभ

मोटापा की चिंता में दुबलाती मप्र सरकार

चुनावी मसाले की सोंधी महक

आरटीआई के बारे में नहीं जानते हम

मैं आदमखोर नहीं था

रामकथा पर रार क्यों ?

आत्महत्या की फसल

 
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महिला मतदाता का मत

जनमत

 

महिला मतदाता का मत

योगेंद्र यादव

 

आखिरी दौर से ठीक पहले लोकतंत्र का बेताल फिर विक्रमादित्य के लिये एक सवाल खोज लाया. जिस देश में प्रधानमंत्री की कुर्सी की दौड़ में एक दलित महिला का दावा जोर पकड़ रहा हो, जहां देश की सबसे पुरानी और बड़ी राजनीतिक पार्टी की कमान एक महिला के हाथ में हो, वहां राजनीतिक नतीजों और बहस के बीच महिलाओं का वोट क्यों दिखाई नहीं देता ? वो कहाँ खो जाता है?

महिला मतदाता


सवाल मौजू था. यह देखते हुए की इस आखिरी दौर में जिन तीन बड़े राज्यों में वोट डाले जा रहे हैं, वहां की राजनीति तीन महिलाओं के आस पास घूम रही है. तमिलनाडु में जयललिता, उत्तरप्रदेश में मायावती और पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी. बेशक इन तीनो की सामाजिक ज़मीन, सोच और सत्ता तक पहुँचने के रास्ते अलग अलग हैं. लेकिन ये तीनों भारत की मौजूदा राजनीति में महिलाओं की ताकत की नुमाइंदगी करती हैं. कहने वाले सनकी या जिद्दी कह सकते हैं. लेकिन जरा सोचिये कि अगर मर्दों के वर्चस्व वाली राजनीति में एक महिला जिद्दी न हो तो भला कैसे वो कैसे टिकेगी.

आज इस सवाल का जवाब तलाशने के लिये हमारे पास बेहतरीन मौका है. हम आखिरी दौर में देश के चार कोनों में हो रहे चुनाव पर करीबी नज़र डालें. दक्षिण में तमिलनाडु, पूर्व में पश्चिम बंगाल, उत्तर में हिमाचल, उत्तराखंड और पश्चिम सरहद पर पंजाब और जम्मू कश्मीर से गुजरते हुए इस गम होते सवाल के जवाब तक पहुँच सकते हैं.

इस बार तमिलनाडु में महिलाओं का वोट एक लहर पैदा करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है. कई छोटी छोटी पार्टियों में सिमटे छोटे छोटे वोट बैंक के चलते इस राज्य में जितना बड़ा गठबंधन होगा, उतनी ही उसकी जीत की उम्मीद बढ जाती है. वायको की एमडीएमके 2006 में ही जयललिता के पाले में आ गयी. इसी का नतीजा था कि डीएमके को आम चुनावों में मिली 17 फीसदी की बढ़त विधानसभा चुनावों में महज 5 फीसदी पर सिमट गयी थी. फिर इस बार लेफ्ट और पीएमके ने भी पाला बदलते हुई जयललिता का दामन थाम लिया है.

अगर यह पार्टियाँ पिछले विधानसभा चुनावों में पाए अपने आधे वोट भी हासिल कर लें तो यह डीएमके की बढ़त को खत्म कर देंगी. और जयललिता की अगुवाई में इस गठबंधन को एक आसान जीत हासिल हो सकती है. फिर पिछले विधानसभा चुनावों में जयललिता ने पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के पांच फीसदी ज्यादा वोट हासिल किये थे. अगर महिलाओं का यह वोट इस बार भी जयललिता के साथ जुड़ा रहता है तो उनकी संभावित जीत एक लहर में तब्दील हो सकती है.

लेकिन इस चुनावी गणित से इतर डीएमके का कामकाज का रिकॉर्ड भी उनके खिलाफ ही जाता दिख रहा है. पिछले विधानसभा चुनाव में सीएनएन-आईबीना, हिन्दू-सीएसडीएस के सर्वे में यह बात उभर कर आयी थी कि हार के बावजूद जयललिता की लोकप्रियता में बहुत कमी नहीं आयी है. विधानसभा चुनाव में जीत कर डीएमके ने वोटर से किये अपने वादों को पूरा तो किया, लेकिन बिजली और पानी जैसे बुनियादी मुद्दों से निबटना उनके लिये चुनौती बना रहा.

भ्रष्टाचार के आरोप और करुणनिधि की पारिवारिक कलह से आम वोटर का मोहभंग है. मौजूदा चुनावों के नतीजों पर श्रीलंका की मानवीय त्रासदी का कितना असर पडेगा, यह कहना मुश्किल है. दिक्कत यह है कि इस सवाल पर दोनों पार्टियों का रिकार्ड पाखंड और दोमुहीं बातों से भरा है. तमिलनाडु में सवाल यही है कि जयललिता वाले गढ़बंधन की जीत कितनी भारी होगी.

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तमिलनाडु की तरह पंजाब ,हिमाचल और उत्तराखंड में मौजूदा सरकारें बचाव की मुद्रा में है. पंजाब देश में पुरुषों की तुलना में महिलाओं के कम अनुपात की एक बड़ी मिसाल है. लेकिन इसके बावजूद पंजाब में आज भी महिलाओं के मुद्दे राजनीतिक एजेंडे में जगह नहीं बना पाए हैं. यहाँ आज भी अकाली-बीजेपी गठबंधन और कांग्रेस अपना पुराना राग अलाप रहे हैं. अकाली -बीजेपी अपनी सरकार की गिरती साख से जूझ रही है.

अकाली में छिडी विरासत की लडाई उसकी परेशानी का सबब है. दूसरी और कांग्रेस मनमोहन सिंह के जरिए सिख प्रधानमंत्री के कार्ड को खुलकर खेलने में लगी है. इन सबके बीच सत्ताधारी अकाली -बीजेपी गठबंधन के लिये कुछ सीटें बचाना ही बड़ी चुनौती है. चंडीगढ़ में कांग्रेस बीजेपी और बीएसपी के बीच त्रिकोणीय लड़ाई देखी जा सकती है.आगे पढ़ें

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