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मेरे उस्ताद मेहदी हसन

संस्मरण

 

मेरे उस्ताद मेहदी हसन

अफज़ल सुभानी


पाकिस्तान से बाहर का मैं पहला शागिर्द हूं, जिसे मेहदी हसन साहब ने गंडा बांध कर विधिवत शिष्य बनाया है. अपने गुरु को मैं जितनी बार देखता हूं, मेरा मन उनके प्रति आदर से भर जाता है.

मेहदी हसन


कला की सुंदरता, संगीत, आध्यात्म केवल महसूस किये जा सकते हैं, उन्हें समझा पाना लगभग नामुमकिन है. जब आप उस्ताद मेहदी हसन की आवाज़ को ग़ज़ल, ठुमरी या सिर्फ गुनगुनाने के रूप में सुनते हैं तो वो आपके अंतर में ऐसा भाव पैदा करती हैं जिसे सिर्फ महसूस किया जा सकता है. सच कहूं तो इसे बयान कर पाना लगभग नामुमकिन है.

मुझे आज भी याद है, जब हमने उनके लकवाग्रस्त होने के बाद फोन पर बात की थी. मैं उनकी महान आवाज़ नहीं पहचान पाया. मैं रो पड़ा. लकवा ने उनके वोकल कॉर्डस पर असर डाला था.

मैं टोरंटो, कनाडा में एक घर के पास से गुज़र रहा था तभी मुझे मेहदी हसन की एक गजल सुनाई पड़ी. मैं चकित रह गया क्योंकि उस इलाके के रहवासी एशियाई मूल के नहीं थे.

परदेस में आवाज
मैंने जाँच-पड़ताल करने का फैसला किया और जिस घर से आवाज आ रही थी, वहां मैंने दस्तक दी. कुछ ही देर में लगभग पचास साल की एक महिला बाहर आई. मैंने अपनी शंका उन्हें बताई तो उन्होंने कहा कि एक दिन वो एक देसी बाज़ार में खरीदारी करने गई थीं, और तभी उन्हें किसी के गाने की आवाज़ सुनाई दी. उस आवाज़ ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया. यह एक ऐसी आवाज़ थी जो उन्होंने कभी नहीं सुनी थी, वे उस रिकार्ड को खरीद ले आईं.

इन सब बातें में सबसे ज्यादा चौंकाने बात मेरे लिए ये थी कि वह महिला ना ही कोई संगीतकार थीं ना ही उन्हें संगीत से ज्यादा लगाव था. इसे आप मेहदी हसन साहब की आवाज का जादू कह सकते हैं.

उस्ताद मेहदी हसन ने अपनी आवाज़ को शास्त्रीय राग सुनाने का ज़रिया बनाया था. जब भी वे कोई ग़ज़ल गाते, उस राग को एक नया आयाम मिलता था. इसे आप उनकी हर रचना में साफ महसूस कर सकते हैं.

हमारे संगीत की दुनिया के एक अन्य महान कलाकार मन्ना डे ने मेहदी हसन की “अब के हम बिछड़े तो शायद कभी ख्वाबों में मिले ” सुनने के बाद अपने अनुभव साझा करने के लिए मेहदी हसन को सात पन्नों की एक लंबी चिट्ठी लिख मारी.

संगीत बनाम आध्यात्म
उस्ताद मेहदी हसन असल में एक बहुत सरल व्यक्तित्व के मालिक हैं. संगीत के प्रति अपने प्यार के अलावा बाकी सब भी संगीत के बराबर या उसी के साथ मिल सकने वाला होना चाहिए अन्यथा उसे महत्वहीन मान लिया जाता है. दूसरे शब्दों में वे संगीत के साथ आध्यात्म के स्तर से जुड़े हैं.

एक वाकया मेरे जेहन में आ रहा है.

वो एक सर्द सुबह थी और उस्ताद मेहदी हसन दूसरे कुछ फनकारों के साथ वीज़ा प्राप्त करने के लिए दरवाज़ा खुलने का इंतजार कर रहे थे.

सुप्रसिद्ध तबला वादक तारी ने ख़ां साहब से पूछा, “ क्या आपको ठंड लग रही है ? हम सब तो बर्फ जैसा जमे हैं, हमें दरवाज़ा खुलने तक कॉफी शॉप में इंतज़ार करना चाहिए”.

इस पर ख़ां साहब ने आश्चर्यजनक रूप से कहा, “बिल्कुल नहीं, मैं तो एक धुन बनाने में व्यस्त हूं”.

मुझे हमेशा लगता है कि मेरे उस्ताद के लिए संगीत आध्यात्म की तरह है और वे हर हालत में उसमें डूबते-उतराते रहते हैं.

मुझे आज भी याद है, जब हमने उनके लकवाग्रस्त होने के बाद फोन पर बात की थी. मैं उनकी महान आवाज़ नहीं पहचान पाया. मैं रो पड़ा. लकवा ने उनके वोकल कॉर्डस पर असर डाला था.

पर बहुत ही कम समय में वो समय भी आया जब उन्होंने अपनी उसी आवाज़ में घोषणा की “मेरी आवाज़ वापस आ गई है” मैंने उन्हें इतना खुश कभी नहीं सुना.


04.05.2008, 00.22 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

raza husain [razahusain0786@gmail.com] lucknow - 2012-06-14 15:40:47

 
  मेहदी हसन जैसे कलाकार सदी में एक बार पैदा होते हैं. ये जगह खाली हो गई है और कोई दूसरा इसको नहीं भर सकता. 
   
 

awdhesh vimal [awdhshvimal@gmail.co] bilaspur - 2012-06-13 19:29:40

 
  अगर मैं मेहदी हसन साहब की आवाज़ को एक संस्कृति कहूं तो इसमें कोई दो राय नहीं, और मैं चाहता हूं कि इस संस्कृति का निर्माता इसे और संवारे. इन्हीं दुआओं के साथ... 
   
 

अन्वेषा [] भोपाल - 2012-06-13 18:04:10

 
  मेहदी हसन साहब आप हमें बहुत याद आएंगे... 
   
 

Aijaz khan noorani [finalcutfilms77@rediffmail.com] delhi,india - 2009-01-03 16:33:31

 
  mai mehdi hasan saheb ka bahut bada fan hoon.aur rabbul izzat se dua karata hu ki,khudaye pak unko har pareshani aur takleef se kooso door rakhe,aaamin,mai khud ek shair hoon,meri dili khwahish hai ke mehdi hasan saheb mujh gharib ki gazal ko gakar use amar bana sakte hain........kaaash
मैं महदी हसन साहब का बहुत बड़ा फैन हूं. और रब्बूल इज्जात से दुआ करता हूं कि, खुदा-ए-पाक उनको हर परेशानी और तकलीफ से कोसों दूर रखे, आमीन. मैं खुद एक शआयर हूं, मेरी दिली ख्वाहिश है कि मेहदी हसन साहब मुझ गरीब की गज़ल गाकर उसे अमर बना सकते हैं..... काश
 
   
 

jagdish singh [jds4ever@gmail.com] jodhpur,, india - 2009-01-01 20:43:40

 
  Without any doubt Mehdi Hasan sahab has got the greatest voice ever. Listening to him is just like listening the nature and god. The ghazal "Zindgi mai to sabhi pyar kiya karte hai" is awesome. May god bless him good health n long life and may we get chance to hear him for long. 
   
 

guddolulla [guddolulla1@yahoo.com] 152 heritagelane streamwood il.60107 usa - 2008-07-17 19:15:17

 
  aazi mehndi bhai jee to doosre kunden lal kai sehgal hai
chicago mai suna thaa
kia dil ko chhoo lenei wali avaaz hai
rub vadian umara kere
guddo
khudha hafiz
 
   
 

KRISHNA SHARMA [krishnagdutt2@gmail.com] - 2008-05-19 13:30:15

 
 
KHUDA mEHDI hASAN sAHAB KO salamat RAKHE
 
   
 

sumit sharma [sumit.yaas@gmail.com] - 2008-05-18 16:39:33

 
  uske gale me khuda ki ajib barkat hai.
wo bolta hai to ek roshni si hoti hai.
 
   
 

Sanjeev Tiwari [] - 2008-05-06 11:06:11

 
  मेहदी हसन साहब सच में खुदा का नेमत हैं. हम उनकी लंबी उमर और सेहत के लिए कामना करते हैं. 
   
 

anwar suhail [anwarsuhail_09@yahoo.co.in] - 2008-05-05 21:42:18

 
  mehdi hassan saheb hamare pujniya gaayak rahe hain unpar ye ek behtareen aalekh hai 
   
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