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बिक गयी और बन गई पारो

मुद्दा

 

बिक गई और बन गई पारो

गीताश्री, मेवात, हरियाणा से लौटकर

 

वह देवदास की पारो नहीं थी. पारो बनना भी कहां चाहती थी. लेकिन जिस साल पारो और देवदास वाली फिल्म परदे पर धूम मचा रही थी, उसी साल नैंसी की आंखों में दूर देश के सुंदर सपने भर दिए गए. इससे पहले कि नैंसी इस सपने का सच जान पाती, उसे पारो बना दिया गया.

मेवात की पारो


मेवात के घासेड़ा कस्बे के बस स्टाप पर हमारी मुलाकात नैंसी से हुई. झारखंड की नैंसी बताती है- “मुझे एक ट्रक ड्राइवर लेकर यहां आया था. उसने 500 रुपये मेरे सौतेले बाप को सौंपा और फिरोजपुर गांव में लाकर किसी के घर छोड़ कर चला गया. वो आदमी मुझसे धंधा करवाना चाहता था. उसने कहा-जा कमा कर ला. मैं यह काम नहीं करना चाहती थी, इसलिए उसके चंगुल से भाग निकली. मैं पारो नहीं बनना चाहती.”

मेवात के इस इलाके में ऐसी सैकड़ों पारो हैं. पारो यानी राज्य की सीमा पार से खरीद कर लाई गई वह लड़की, जिसका मनचाहा इस्तेमाल किया जा सकता है. बीवी बनाने से लेकर बच्चा पैदा करने की मशीन या फिर देह व्यापार कराने तक.

दिल्ली से सटे आईटी सिटी गुड़गांव के पास है मेवात का इलाका. आधा हरियाणा और आधा राजस्थान में. 6,662 बूचड़खाने वाले इस इलाके को गोकशी के लिए जाना जाता है, टकलू क्राइम यानी सोने की ईंट बेचने के धंधे के लिए जाना जाता है और पारो की खरीद फरोख्त के लिए.

गांव-गांव में पारो
मेव, जाट और अहीर बहुल इस इलाके में ‘पारो’ का खूब चलन है. बेचारगी के साथ दलील दी जाती है कि गरीबों को यहां का कोई धनाढ़य व्यक्ति अपनी लड़की नहीं देता. ऐसे में हमारे पास ‘पारो’ के अलावा कोई विकल्प नहीं है.

यहां हर कदम पर पारो मिलेगी. कई गांवों में आधी संख्या पारो की है. ये अलग बात है कि लोग अपने घरों में कैद पारो के मुद्दे पर बात करने से बचना चाहते हैं. थोड़ी चालाकी के साथ बात करें या फिर घरवालों को लगे कि बात करने का कोई लाभ मिल सकता है तो लोग थोड़ा-थोड़ा खुलने लगते हैं. तरह-तरह के किस्से आपके सामने आने लगेंगे. झारखंड, आंध्र प्रदेश, असम, बंगाल और देश के अलग-अलग हिस्सों से खरीद कर, बहला फुसला कर या जबरन उठा कर लाई गई हर पारो के पास अपनी-अपनी कहानी है लेकिन सबके हिस्से का दुख एक जैसा है, पहाड़ सा.

सलमबा गांव में एक पारो मिली- रुक्सिना. असम की हैं. पिछले सात साल से यही हैं. अपने गांव घर का रास्ता भूल चुकी हैं. किस्मत ने उन्हें एक अधेड़ मर्द अकबर की दूसरी बीबी बना दिया है. जब वह हमें मिलीं तो उनकी गोद में एक बच्चा था. बच्चे को गोद में चिपटाए, बेहद डरी सहमी-सी. घरवालो से घिरी हुई. पूछने पर टुकुर-टुकुर मुंह ताकने लगती हैं.

साथ में खड़ी एक मेवाती महिला बताती हैं- “इसका मायका गरीब है. रोटी के लाले पड़ते हैं. वहां जाकर क्या करेगी? यहां दो वक्त की रोटी तो नसीब हो रही है ना.”

दो वक्त की रोटी के नाम पर रुक्सिना की जिंदगी कैद में बदल गई. भूख का भूगोल जीवन के सारे पाठों पर भारी पड़ गया.

सपने, तस्करी और पारो
नूंह कस्बे में चार महीने पहले एक और पारो झारखंड से आई है. नाम है सानिया, उम्र कोई 15 वर्ष. ना वह सामने आई, ना उसके घरवालों ने बात की. पड़ोसियों ने बताया कि गरीबी की वजह से 50 वर्षीय मजलिस के साथ मेवात में किसी ने अपनी बेटी नहीं ब्याही. अंततः वह किसी स्थानीय एजेंट के साथ झारखंड गया और अपने लिए कम पैसे में एक पारो का इंतजाम कर लाया.

मजलिस ने अपने अरमान पूरे किए और सानिया के अरमानों पर उम्र के इस फासले ने हमेशा के लिए पानी फेर दिया.

अनवरी खातून की उम्र है 22 साल. वह मूल रूप से झारखंड के हजारीबाग की रहनेवाली हैं. पिछले साल उन्हें मेवात जिले के घासेड़ा गांव में लाकर एक अधेड़ व्यक्ति के घर में बिठा दिया गया. उन्हें झारखंड से यह झांसा देकर लाया गया कि दूर के रिश्तेदार के यहां मिलने जा रहे है. यहां आते ही अधेड़ व्यक्ति की ब्याहता बना दी गई. जबरन.

डरते-डरते अनवरी बताती हैं, “ एक आदमी ने मेरे पति से मेरे बदले दस हजार रुपये लिए.”

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Shamim (shameem.ahm@gmail.com) Mewat

 
 This is news is totally published to grab the publicity. It is a fact that there are some paros in areas of mewat but it doen't mean that arround 50% are paros here. I am also resident of this area and i commit that there are some people do this work as well. But as usual by the perspective of the society they are shameless people. another thing i want to comment on is taklu. The Mewat is known for its culture and its dominance fro freedom and certain people make it shameful who do Burgundy and taklu business and these people are the exceptions. 
   
 

sanjay kumar mishra (sanjaymallahabad) allahabad

 
 समाज का सच इस रिपोर्ट से उजागर होती है जिस पर शायद किसी का ध्यान नहीं है।
संजय कुमार मिश्र
 
   
 

Dinesh Shakya

 
 इस रिपोर्ट को पढ़ कर शर्मसार हो गया. क्या ये उसी देश की रिपोर्ट है, जिसे आज़ाद हुए 60 साल से अधिक हो गए ? अगर हां, तो हमारे समाज को चुल्लू भर पानी में डूब कर मर जाना चाहिए. और उन नेताओं को तो सबसे पहले आत्महत्या कर लेनी चाहिए जो पिछले कई सालों से आंखें बंद कर अय्याशी भरे स्वर में इंडिया शाईनिंग और जय हो का नारा देते हुए देश को सबसे आगे बताते हुए शर्माते नहीं.
धिक्कार है ऐसे समाज पर.
 
   
 

anil sharma (a.76@rediffmail.com) Bangalore

 
 यह तो सब जानते हैं मगर होगा क्या. जो चल रहा है वही चलता रहेगा. 
   
 

A.K.SHARMA (anilsharma83@yahoo.co.in) CHANDIGARH

 
 Ever increasing population,especially in the lower strata of the society and stark illiteracy prevailing among large number of Indians,are responsible for this national shame and tragedy. Very unfortunately the politicians,with vested interests have worsened the situation. This problem would keep on harassing the nation till the population amongst the lower strata is not curbed by hook or crook. 
   
 

ZULAIKHA JABEEN RAIPUR CHHATTISGARH

 
 इंसानी नजरिए की बहुत अच्छी रिपोर्ट - बधाई गीताजी. सिर्फ जिस्म के नाते औरतें हर कहीं कुचल दी जा रही हैं. जो खुद को मुसलमान कहतें हैं इनके यहां शादी में लड़की की रजामंदी की तो छोड़िए दुल्हन के दस्तखत तक नहीं लिए जाते. निकाह में इकरारनामा भी होता है इन्हें ये भी नहीं पता. जबकि इस्लामी शादी लड़की की अपनी रजामंदी के बगैर नाजायज है. काश की आपके ये रिपोर्ट वे भी पढ़ते जो मुसलमानों के ठेकेदार बने बैठे हैं. 
   
 

Sanj Bhopal

 
 Now this is time to take serious action because you have done your job now its turn of Government. Its really shameful for our country. 
   
 

manju mahima bhatnagar (manju@ei-india.com) Ahmedabad

 
 सच ही बड़ी चौंकाने वाली खबर है. एक छुपा हुआ कड़वा सच उजागर हुआ है... ऐसे ना जाने कितने सच हमारे समाज की चारदीवारों में छिपे पड़े हैं. गीताश्री इस साहसिक कदम के लिए बधाई की पात्र हैं. ऐसी खबर देना ही मात्र पर्याप्त नहीं इनके आधार पर इन कुप्रथाओं को रोकने के लिए सामाजिक संस्थाओं और सरकार को कड़ाई से कदम उठाने चाहिए तभी इस जानकारी की सार्थकता है. नहीं तो यह मात्र एक खबर बनकर रह जाएगी.  
   
 

dolly sharma bhopal

 
 जीवन का ये सच बहुत कड़वा है. 
   
 

dinesh gupta (dineshguptapti@gmail.com) bikaner

 
 जीवन का ये सच बहुत कड़वा है.
गीता श्री की प्रस्तुति यथार्थ है | ऐसा कई जगह हो रहा है |
आपकी रिपोर्ट आंख खोल देने वाली है.
 
   
 

shakti pandey (shaktidhar_pandey@yahoo.com) ranchi

 
 We have to move campign against this type of womens illegal traficking, specially focoussed frome Jharkhand and some backward states. We have to make it National Agenda to remove this illegal work and try to punish all the person behind it. 
   
 

Abhishek (am_dhr@rediffmail.com) Varanasi

 
 पत्रकारिता का दायित्व को बखूबी निभाते हुए कड़वी सच्चाई दिखाई है आपने, जिसे victim राज्य भी खुद नहीं स्वीकार करना चाहते. 
   
 

jagat mohan (jagatmohan@gmail.com) delhi

 
 अरुंधति राय, विनायक सेन, तिस्ता सितलवाड, दीपा मेहता जैसे लोग इन क्षेत्रों में काम क्यों नहीं करते.  
   
 

dalchand (dcdhaked@gmail.com) rajasthan

 
 जीवन का ये सच बहुत कड़वा है. 
   
 

Rakesh Srivastava Lucknow

 
 My salute to you for briliant Reporting. 
   
 

vijay kumar (vksappatti@gmail.com) hyderabad

 
 this is really shameful , what are our so called neta and moral police people are doing ... this is really chilling and that so near to the capital .... ye desh an poori tarah se banana country ban gayi hai ..
aapne is report ko dekar ke bahut bada kaam kiya hai ..

aapko dil se badhai ..
 
   
 

Sant kumar paswan Mokama, Patna, Bihar

 
 shame....shame....!! India sign deal on nuclear reactor and mewat ??? 
   
 

Himanshu (patrakarhimanshu@gmail.com)

 
 आपकी रिपोर्ट आंख खोल देने वाली है. लेकिन कोमा में सोए लोगों पर ऐसी हजार रिपोर्ट्स भी बेअसर हैं. 
   
 

Neeraj singh Yadav Mewat

 
 DO YOU KNOW THE SHAMEFUL STATISTICS OF MEWAT ?

8 The official figure for the average number of children in a family

166 deaths per 1,000 deliveries. The maternal mortality rate has risen as there is pressure on girls to produce as soon they reach puberty

98 percent of the pregnant young mothers are malnourished leading to pregnancy complications and death

854 females per 1,000 males. Mewat’s sex ratio stands significantly lower than the national average, 927 to 1,000.
 
   
 

Sunanda sinha Solan, Himachal pradesh

 
 इस रिपोर्ट को पढ़ कर शर्मशार हो गई. क्या ये उसी देश की रिपोर्ट है, जिसे आज़ाद हुए 60 साल से अधिक हो गए ? अगर हां, तो हमारे समाज को चुल्लू भर पानी में डूब कर मर जाना चाहिए. और उन नेताओं को तो सबसे पहले आत्महत्या कर लेनी चाहिए जो पिछले कई सालों से आंखें बंद कर अय्याशी भरे स्वर में इंडिया शाईनिंग और जय हो का नारा देते हुए देश को सबसे आगे बताते हुए शर्माते नहीं.
धिक्कार है ऐसे समाज पर.
 
   
 

प्रशांत कुमार दुबे (prashantd1977@gmail.com) भोपाल

 
 गीता श्री की प्रस्तुति यथार्थ है | ऐसा कई जगह हो रहा है |

मेरी गीता श्री और रविवार के संपादक महोदय से गुजारिश है कि इस तरह के संवेदनशील मामलों मैं विक्टिम के छायाचित्र ना लगाये जायें तो यह विक्टिम के पक्ष में ही होगा | आमतौर पर एसा देखा गया है कि हम अपनी रिपोर्ट्स को और विश्वशनीय बनाने के फेर मैं छायाचित्र प्रकाशित तो कर देते हैं, लेकिन इससे विक्टिम को पहचान का संकट हो जाता है.
 
   

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