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इस अंक में

 

लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

हमारी चिंतना

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कमजोर सरकार और गैरजिम्मेवार पत्रकारिता

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बाबा बनाते चैनल

राज्य का कन्या ‘दान’

लहू का सुराग़

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सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

लेकिन असली नायक कहां हैं?

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सबको खारिज करने का अधिकार

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यह सबके लिये चेतावनी है

 
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प्रतीक्षा के आश्वासन में

एक प्रेम की एकतरफा कथा

 

प्रतीक्षा के आश्वासन में

 

शुभदे,

किसी घटना की पुनरावृत्ति के अहसास को अभिव्यक्त करने के लिए अंग्रेज़ी में एक बहुत अच्छा शब्द है– देजा वू. एक ही सुख का अहसास दूसरी बार भी हो सकता है यह मैंने तब जाना, जब आपका पत्र मिला. यह आपके पत्र पाने का सुख है. कभी विस्तार से लिखूँगा कि मेरे लिए आपके पत्रों का सुख कितना बड़ा सुख था.

जो पत्र उन सात बरसों में आपने मुझे लिखे थे उनका क्या हुआ यह मैं नहीं जानता. एक दिन वो मेरी किताबों के पीछे से ग़ायब हो गए थे. शायद मेरे परिजनों ने जला दिए या फिर किसी तालाब में फेंक दिए. लेकिन किसी की स्मृति को कौन छीन सकता है? मेरी स्मृति के उन पत्रों का अक्स आपके ताज़ा पत्र में झलकता है. यदि आपने शब्दों को अपनी सर्जना का माध्यम बनाया होता तो मैं यक़ीन के साथ कह सकता हूँ कि आप एक अच्छी लेखिका होतीं.


लेकिन जो मेरा यक़ीन है, वह सिर्फ़ मेरा यक़ीन है. मेरा यक़ीन था कि आप प्रतीक्षा के आश्वासन के बाद सचमुच प्रतीक्षा करेंगीं. मेरा यक़ीन था कि एक दिन मैं जीवन के उस मोड़ पर पहुँच ही जाउँगा जहाँ से मैं आपको पुकार कर कहूँगा कि अब आपकी प्रतीक्षा ख़त्म हुई, मेरा जीवन आपकी प्रतीक्षा कर रहा है. मेरा यक़ीन था कि उस दिन हम किसी की परवाह किए बिना एक नया जीवन शुरु करेंगे. उस जीवन में सिर्फ़ प्रेम होगा और सृजन होगा.

मैं अक्सर सोचता था कि हम ऐसे जिएँगे कि लोग सोचने लगेंगे कि इनके जीवन में सृजनात्मकता (यानी वही जिसे आप क्रिएटीविटी कहती हैं) है इसलिए ये प्रेम करते हैं या इन दोनों के जीवन में प्रेम इतना अधिक है कि कि वही सृजन करता रहता है. लोग सोचते रहेंगे. और हम, उनकी परवाह किए बिना, इस भीड़ भरी दुनिया में अपने लिए एक जगह बनाएँगे, अपना एक नाम बनाएँगे. अंग्रेज़ी में जिसे ‘एनीबडी’ कहते हैं, वह हम नहीं होंगे. हम ‘समबडी’ होंगे. अपनी अलग पहचान के साथ.

मेरा यक़ीन ही मेरा ख़्वाब था और उसे ही मैं सच में तब्दील करना चाहता था. लेकिन मेरा यक़ीन एक दिन टूट गया.

आपको पता है कि जिस दिन मैंने आपकी शादी का कार्ड देखा मैं दफ़्तर में काम कर रहा था. शाम को चार बजे का वक़्त रहा होगा. जैसे ही मैंने वह कार्ड देखा, मैं बदहवास-सा हो गया. मेरे हाथ एकाएक ठंडे पड़ गए. मुझे आसपास की आवाज़ें सुनाई पड़नी बंद हो गईं और मैं काम करना छोड़कर चुपचाप बैठ गया....ख़ैर ये क़िस्सा फिर कभी.

क्या यक़ीन केवल राज़ साझा करने का नाम है?


मैं यक़ीन की बात कर रहा था. मेरा यक़ीन तो टूट गया लेकिन उस यक़ीन का क्या जो आपके दिल में मेरे लिए कभी बन ही नहीं पाया. कहने को तो आपने यह भी कहा था कि मैं एक दिन बहुत बड़ा बनूंगा. लेकिन अपने कहे हुए पर भी आपने ख़ुद कभी यक़ीन नहीं किया. वरना आप मुझे इस तरह छोड़ कर नहीं जातीं. आप प्रतीक्षा करती रहतीं. मैं यह दावा नहीं कर रहा कि मैं बड़ा हो गया, लेकिन हाँ, लोगों की उम्मीदों से बड़ा तो हो ही गया.

जैसा कि मैंने पिछले पत्र में आपको लिखा था कि हमारे बीच यक़ीन का एकतरफ़ा रिश्ता रहा है. आपने अपने पत्र में इस बात का प्रतिकार किया है. जो तर्क आपने दिए हैं उनमें दम है. ठीक है कि आपने मुझ पर बहुत भरोसा किया और मुझे अपना हमराज़ बनाया. लेकिन क्या यक़ीन केवल राज़ साझा करने का नाम है?

ज़िंदगी को साझा करने के लिए ज़िंदगी के राज़ को साझा करने से कुछ ज़्यादा की ज़रुरत होती है शुभदे.

शेष फिर,
आपका,
गंधर्व.

19.07.2009, 11.56 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Pratik kumar Singh Gaya, Bihar

 
 गांधी जी ने एक बात कही थी-प्रेम कभी दावा नहीं करता, वह हमेशा देता है. प्रेम हमेशा कष्ट सहता है, न कभी झुंझलाता है और न ही कभी बदला लेता है.

आपके पत्रों को पढ़ कर लगता है कि आप कहीं न कहीं इन दोनों ही ग्रंथियों से परेशान है. जीवन में यह सब तो होता ही है. इसे भूल कर उठें और नई जिंदगी की शुरुवात करें.

सिकंदर भी कहा करते थे कि-प्यार एक भूत की तरह है, जिसके बारे में बातें तो सभी करते हैं, पर इसके दर्शन बहुत कम लोगों को हुए हैं.
 
   
 

Saurabh Tiwari Pune, INDIA

 
 प्रेम पाने का नाम नहीं है, खोने का नाम है. प्रेम के भी खोने का. जहां पाना होता है, वह तो बहुत छोटा हिस्सा है. खोना बड़ा हिस्सा है. आपके पत्र से लगता है कि आपमें कहीं न कहीं पाने की इच्छा थी. सब कुछ पाने की. अपने बड़े आदमी होने के करिअर को पाने की और प्रेम को भी पाने की. 
   

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