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कैथरीन मैन्सफील्ड

कविता

 

 

कैथरीन मैन्सफील्ड

अनुवादः महेश वर्मा

 

 

तितली की हँसी

कैथरीन की कविता

 

हमारी दलिया खाने की तश्तरियों के बीचोबीच
चित्रित थी एक नीली तितली
और हर सुबह नाश्ते के समय स्पर्धा सी होती हमारे बीच
कि पहले कौन पहुँचता है तितली के नज़दीक.
और तभी कहा करती दादी माँ : "बेचारी तितली को
मत खा जाना तुमलोग."
इसपर हमलोग हँसने लगते.
वह हमेशा यह कहती और हमेशा हम हँसना शुरू कर देते.
यह एक प्यारा सा नन्हा मज़ाक था रोज़ का.

यह तय था कि एक सुनहरी सुबह
संसार की सबसे धीमी हँसी हँसती हुई,
तितली को उड़ जाना था हमारी तश्तरियों से,
और बैठ जाना था दादी माँ की गोद में.

अकेलापान

 

अब यह अकेलापन है जो नींद के बजाए
आता है रात को , मेरे बिस्तरे के बगल में बैठने के लिए.
एक थके हुए बच्चे की तरह लेटी हुई, मैं प्रतीक्षा करती हूँ उसके पदचाप की,
मैं देखती हूँ उसको बाहर , कोमलता से बहते हुए प्रकाश में.
अचल बैठा हुआ, ना बाएँ ना दाहिने घूमे,
और थका हुआ, थक कर शिथिलता से सर झुकाए.
बूढ़ा है वह भी, उसने भी लड़ी हैं लड़ाइयाँ.
इसीलिए उसे पहनाई गयी है जयपत्रों की माला.

उदास अंधेरे में धीरे से शांत होती हुई लहरें
बिखर जाती हैं बांझ किनारों पर , असंतुष्ट.
एक अजीब सी हवा बहती है...फिर सबकुछ शांत.
मैं तैयार हूँ अकेलेपन की ओर मुड़ने के लिए, थामने के लिए उसका हाथ,
उससे चिपकी हुई , प्रतीक्षारत, जब तक बन्ध्या धरती
भर ना जाए वर्षा की भयानक एकस्वर आवाज़ से.

 

01.08.2009, 16.00 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

dr.aarti (samaysakhi@gmail.com) bhopal

 
 this is open window of views,& hearts.it say me somthing.ilike very much.thanks for publisher. 
   
 

Abhijeet Sen (abhijeet4288@rediffmail.com) Raigarh

 
 O' butterfly, Please close to my heart, Please color to my life, so that, I can forget my agony.  
   
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