मिजोरम के लोगों का वियाग्रा
मिजोरम के लोगों का वियाग्रा
विनोद रिंगानिया
गुवाहाटी से
मानव स्वभाव रहा है कि वह अपने ऊपर आने वाली हर विपदा को अपने पक्ष में मोड़ लेता
है. पूर्वोत्तर भारत के राज्य मिजोरम में इन दिनों बांस पर फूल खिलने के रूप मे जो
विपदा आई है, उसने संतानहीन लोगों को संतान पाने का रास्ता भी दिखाया है.
उदाहरण के लिए राज्य की राजधानी आइजल के थारा और डान्गी दंपति को शादी के नौ साल
बाद तक कोई बच्चा नहीं हुआ. उन्होंने संतानहीनता के इलाज पर विभिन्न अस्पतालों में
आठ लाख रुपए भी खर्च कर डाले लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला. अंत में उन्होंने एक जुगत
अपनाई. उन्होंने बांस के बीज को उबाल कर लेना शुरू किया. यह बात 2005 की है. आज
गल्ले की दुकान का मालिक थारा एक बच्चे का पिता है.
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बांस के बीज की खपत बढ़ी |
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मिजोरम के इलाके में बड़ी
संख्या में लोग बांस के बीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं. |
थारा के अनुसार उन्होंने देखा कि बांस के बीज खाकर चूहों की आबादी में बेतहाशा
वृद्धि होती है तो निश्चय ही इन बीजों में प्रजनन शक्ति बढ़ाने की ताकत होगी.
गुवाहाटी और कोलकाता में डाक्टरों के चक्कर लगाकर थक चुके और दर्जनों ओझा-गुणियों
के तंत्र-ताबीज पहन चुके ईसाई धर्मावलंबी थारा दंपति ने बांस के बीज को आजमा कर
देखने में कोई बुराई नहीं देखी.
थारा
का कहना है कि बांस के बीज लेना शुरू करने के बाद उन्होंने कोई भी आधुनिक इलाज नहीं
करवाया. इसलिए यह मानने के कारण हैं कि उन्हें बच्चा बांस के बीजों के सेवन से ही
हुआ.
आइजल में काम करने वाले वैज्ञानिक सी रोखुमा का कहना है कि वे बांस के बीजों पर
प्रयोग कर रहे हैं और इनके विभिन्न जानवरों पर प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं. उन्हें
यकीन है कि बांस के बीजों के कारण चूहों की प्रजनन क्षमता बढ़ जाती है. हालांकि आदमी
की प्रजनन क्षमता को बांस के बीज कहां तक बढ़ा पाते हैं, इस बारे में निश्चित तौर पर
कुछ भी कहना अभी जल्दीबाजी होगी.
सौ ग्राम बांस के बीज में 60.36 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 265.6 किलो कैलोरी ऊर्जा
रहती है. मिजोरम के कृषि विभाग के अधिकारी जेम्स लालसिएमलियाना का कहना है कि इतने
अधिक कार्बोहाइड्रेट और इतनी अधिक ऊर्जा वाला कोई भी पदार्थ किसी भी प्राणी को
सक्रिय करता ही होगा, यहां तक कि सैक्स के मामले में भी.
जेम्स लालसिएमलियाना कहते हैं, "मैं आपको नाम नहीं बताऊंगा लेकिन ऐसे अनेक लोग हैं,
जिन्होंने बांस के बीज खाने के बाद अपनी सैक्स क्षमता में वृद्धि की बात स्वीकार की
है."
पाछुंगा यूनिवर्सिटी कालेज में जीव विज्ञान के प्राध्यापक के लालछंदमा इस बात से
सहमत नहीं कि बांस के बीजों में प्रजनन क्षमता बढ़ाने के गुण होते हैं. वे बांस पर
फूल के खिलने के दिनों में चूहों की बढ़ती तादाद का अलग ही कारण बताते हैं. इनका कहना
है कि इस दौरान चूहों को लगातार भोजन उपलब्ध रहता है. सामान्य दिनों में चूहे अपने
ही बच्चों को खा जाते हैं. लेकिन बांस के फूल खिलने के दौरान चूहे अपना यह स्वभाव
छोड़ देते हैं. इसलिए भी इनकी तादाद में तेजी से बढ़ोतरी होती है.
प्रजनन क्षमता बढ़ाने के अलावा भी मिजोरम के लोगों ने बहुतायत बांस के बीजों का
इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. आइजल के छिंगा वेंग के गांव पंचायत सदस्य वी
थांन्थुआमा कहते हैं कि बांस के बीजों से तैयार सूप काफी जायकेदार होता है.
सूप
बनाने से एक कदम आगे बढ़कर मिजोरम पुलिस की तीसरी बटालियन में वाइव्स वेलफेयर
एसोसिएशन की महिलाओं ने बांस के बीजों का अचार तैयार कर बिक्री के लिए रखा है.
महिलाओं का कहना है कि यह अचार जल्दी ही लोकप्रिय हो रहा है.
11.05.2008, 05.52 (GMT+05:30) पर प्रकाशित