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मनमोहन सिंह को अब आई शर्म ?

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मोटापा की चिंता में दुबलाती मप्र सरकार

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प्रभाष जोशी का निधन

संस्मरण

 

प्रभाष जोशी का निधन

नई दिल्ली. 06 नवंबर 2009

 

हिंदी के वरिष्ठ पत्रकार एवं जनसत्ता के संस्थापक संपादक प्रभाष जोशी का गुरुवार को निधन हो गया. वे 73 साल के थे. उनके शोक संतप्त परिवार में पत्नी, एक पुत्री, 2 पुत्र एवं नाती-पोते हैं. गुरुवार देर रात करीब साढ़े ग्यारह बजे उन्हें दिल का दौरा पड़ा. इसके बाद उन्हें एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. श्री जोशी को पत्रकारिता में देशज भाषा को नई पहचान दिलाने के लिए जाना जाता है.


उन्होंने अपनी पत्रकारिता की शुरुआत इंदौर के नई दुनिया अखबार से की थी. कई वर्ष तक नई दुनिया में पत्रकारिता करने के बाद 1983 में वे जनसत्ता अखाबर के संस्थापक संपादक के रूप में जुड़े. जनसत्ता अखबार में उनका कागद कारे कॉलम बेहद मशहूर रहा. उनके नेतृत्व में जनसत्ता ने सीधी सरल भाषा में हमेशा महत्वपूर्ण मुद्दे उठाए जिससे जनमानस के बीच उसकी अलग पहचान बनी.

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प्रभाषजी ने अपनी लेखन में हमेशा सत्य को स्थान दिया और राजनीति, सांप्रदायिकता जैसे मुद्दों पर बिना किसी दवाब में आए बेबाक लिखा. वो जनसत्ता में हो या इंडियन एक्सप्रेस जहां भी वे रहे उनका लेखन जगत के लिए एक दस्तावेज़ सरीखा़ बन गया. वे पहले ऐसे संपादक थे जिन्होंने बाबरी मस्जिद गिरने के बाद सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ खुलकर लिखा. अकाट्य तर्कों के साथ अपनी बात को प्रभावशाली रूप से सामने लाना उनकी विशेषता थी.

 

राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर लिखने के अलावा उन्होंने क्रिकेट पर भी बहुत लिखा. क्रिकेट के बारे में उनका ज्ञान बेहद वृहद था और उन्होंने देश-विदेश में हुए कई मैचों के बारे में लिखा. उन्होंने कई पुस्तकें भी लिखीं और उनहें पत्रकारिता को जीवनपर्यान्त योगदान के लिए कई महत्वपूर्ण सम्मान भी मिले. हिंदी पत्रकारिता के शिखर पुरुष प्रभाष जोशी के चले जाने से संपूर्ण पत्रकारिता जगत शोक व्याप्त है.

 

06.11.2009, 09.55(GMT+05:30) पर प्रकाशित

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

manik (manikspicmacay.apnimaati@blogger.com) Chittorgarh,Rajasthan

 
 हिंदुस्तान के मीडिया इतिहास में बहुत बड़ी हानि है ये. गहरी संवेदनाएं.  
   
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