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महात्मा गांधी के दर्शन की बीज पुस्तक कही जाने वाली
‘हिन्द
स्वराज’
को प्रकाशित हुये 100 साल हो गये हैं और गांधीजी की यह कालजयी कृति
एक बार फिर से विमर्श के केंद्र में है. 3 व 4 अक्टूबर 1995 को
‘हिन्द
स्वराज’
को केंद्र में रख कर महात्मा गांधी 125वीं जयंती समारोह ने भोपाल
में एक महत्वपूर्ण आयोजन किया था. यहां प्रस्तुत आलेख उसी समारोह
में व्यक्त किये गये विचारों के संपादित अंश हैं, जिसे हमें उस
आयोजन के संयोजक व गांधीवादी चिंतक कनक तिवारी ने उपलब्ध कराया है. |