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इस अंक में

 

लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

हमारी चिंतना

ममता बनर्जी के नाम एक खुला पत्र

कमजोर सरकार और गैरजिम्मेवार पत्रकारिता

अमन की असली दुआ

बाबा बनाते चैनल

राज्य का कन्या ‘दान’

लहू का सुराग़

मध्य-पूर्व में अमरीकी हांका

कम से कम एक दरवाज़ा

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

चिकनी चमेली से डरता कौन है ?

सबको खारिज करने का अधिकार

ये कहां आ गये हम

यह सबके लिये चेतावनी है

 
 पहला पन्ना > मुद्दा > पश्चिम बंगालPrint | Send to Friend 

रगों में जिंदगी नहीं मौत भर दी

रगो में दौड़ा दी मौत

 

उमारह जमाली

कोलकाता से

ठसाठस भरी हुई लोकल ट्रेन में एक दूसरे पर गिरते पड़ते लोग ,चिपचिपाती गर्मी और उमस से सबका हाल बेहाल.. ,पसीने की गंध और खुली टोकरियों से उठती कच्ची मछली की दुर्गन्ध...जैसे साँस लेना भी दुश्वार हो. हर स्टेशन के साथ डब्बे में एक शोर घुसता है और साथ में थोड़ी सी हवा.

लेकिन यह हवा सबके हिस्से की हवा नहीं है. कम से कम 5 साल की रिमी के लिए तो नहीं ही है, जिसे उसके भाई राजू ने गोद में उठा रखा है.

रिमी थैलेसीमिया, एचआईवी और हेपेटाइटिस बी से पीड़ित है और उसे मासिक रक्त परिवर्तन और स्वास्थ्य परीक्षण के लिए महीने में 4 से 5 बार कोलकाता लाना पड़ता है. आज उसे पहली बार उसका भाई राजू कोलकाता ले कर जा रहा है.

अब राजू पर है रिमी की जिम्मेवारी

रिमी के परिवार ने यह निर्णय लिया है कि राजू की स्कूल की पढाई बंद कर दी जाए..इस के सिवा कोई और चारा ही नही है


एक हाथ से अपनी 5 साल की बहन को गोद में उठाए राजू अपने दूसरे हाथ से सहारे के लिए डब्बे में लगे हैंडल को जोर से पकड़े रहने की कोशिश करता है लेकिन हर बार पसीने की चिपचिपाहट से हाथ फिसल जाता है. जैसे एक-एक कर उसकी जिंदगी की खुशियां फिसलती चली गई हैं. वह बेबसी के साथ अपनी छोटी बहन की ओर देखता है और उसकी आंखों से आंसू छलकने लग जाते हैं.

 

चौबीस परगना के तालदा गांव की रिमी को एचआईवी संक्रमण अपने माता या पिता से विरासत में नही मिला. थैलेसीमिया की शिकार रिमी अपने नियमित रक्त परिवर्तन के दौरान एक सरकारी अस्पताल के कर्मचारियों की अक्षम्य और जानलेवा लापरवाही का शिकार हो गई. अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही से उसे एचआईवी और हेपेटाइटिस संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया और अब वह कतरा-कतरा मौत से जूझ रही है.

पश्चिम बंगाल में थैलेसीमिया से ग्रस्त कम से कम 300 ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें अलग-अलग अस्पतालों में इसी तरह की लापरवाही का सामना करना पड़ा और अब एच आई वी से ग्रस्त ये बच्चे अपनी मौत का रास्ता देख रहे हैं.

ईलाज नहीं मौत मिली
एक दिन पहले ही पश्चिम बंगाल के बसंती में पंचायत इलेक्शन के दोरान हुई भयावह हिंसा की चपेट में आ कर राजू और रिमी की मां कनक सरदार की मृत्यु हुई है और अभी उनका एक दूसरे अस्पताल में पोस्टमार्टम चल रहा है.

पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर हाथों में अपना सर थामे रिमी के पिता शंखो सरदार करुण स्वर में कहते हैं- “सब कुछ ख़त्म हो गया है..रिमी का क्या होगा? वह कल से तकलीफ से तड़प रही है..उसको बहलाना केवल कनक ही जानती थी..वह कल से बुखार में भुन रही है और अपनी मां को ढूँढ रही है ..हम उससे कहते हैं कि तुम्हारी मां अभी टौफी लेने गई है..लेकिन हम कब तक उसको सभालेंगे..हमारा तो जीवन ही बिखर गया.”


शंखो की चिंता अकारण ही नही है.


शंखो एक प्राइवेट अस्पताल के आपातकालीन विभाग में ढाई-तीन हज़ार प्रतिमाह कमाने वाले एक अस्थाई एंबुलेंस चालक हैं. कल तक उनकी पत्नी कनक घर की तमाम ज़िम्मेदारी सँभालने के साथ-साथ रिमी को महीने में कई-कई बार चेकअप और रक्त परिवर्तन के लिए लाने ले जाने की ड्यूटी मुस्तैदी से अंजाम देती थीं. रिमी को 24 घंटे बुखार रहता है और हेपेटाइटिस के कारण उसका पेट असामान्य तौर पर बढ़ा हुआ है. वह ठीक से खड़ी भी नही हो सकती है और उसकी साथ हर समय किसी का रहना ज़रूरी है.

अब घर के काम काज और पढ़ाई के बोझ के साथ रिमी की देख भाल और उसको लेकर हर महीने कलकत्ता के चक्कर काटना यह तमाम जिम्मेदारियां अनायास ही राजू के नाज़ुक कंधों पर आ पड़ी हैं .वह ये सब किस तरह कर पायेगा ? उसकी आंखों में माँ की मृत्यु के दुःख के अलावा ये सवाल भी साफ नज़र आ रहा है.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

maria (mariamustafa@yahoo.com) usa

 
 govt. should act fast. The victime should get justice soon. 
   
 

Devdas Mishra (devdas.mishra@yahoo.co.in)

 
 Thank you for the excellent story which boldly highlights the condition of the poor health system in India. It is shameful that in India which now boasts of its growing economy and development case like Rimi is still happening. I agree with some of your readers that in our country there must be thousands who have been infected with deadly disease like HIV by the blood banks and hospitals. Because of stigma the disease carries almost all with HIV or Aids try to keep their infection as secret as possible and rarely cases like Rimi's become public. One more thing: I liked the pictures used in the story. 
   
 

Dr. Mohd Atif Khan (dratifkhan@rediffmail.com)

 
 The writer happens to be my sister in law.I have been in this profession for the last eighteen years and having received my training from govt hospitals and Institutes have come accross many such stories. The problem here is just the tip of iceberg,since many more such cases go undecdetected and unnoticed. This tells about the pathetic state of our health care.Our health care policies need a major revamp. Hope Mr. Health Minister is listening. 
   
 

Dr ajay kumar saxena

 
 सभी डाक्टरों को कटघरे में खड़ा करना सही नहीं है. मैं भी एक डॉक्टर हूं और पिछले 15 सालों से इस पेशे में हूं और आज भी मैं अपने पेशेंट से 5 रुपए ही फीस लेता हूं. बहुत सारे डॉक्टर ऐसे हैं, जो आज भी सेवा भाव से काम कर रहे हैं और ऐसे डाक्टर भी आपको सब जगह मिल जाएंगे. 
   
 

प्रियंका बाड़मेर

 
 जिन लोगों ने रिमी की जिंदगी छिन ली, उनको कड़ी सजा देनी चाहिए. ऐसे लोग चिकित्सा सेवा के नाम पर बदनुमा दाग है. हम ये लगातार देख रहे हैं कि जो पेशा ईश्वर के समतुल्य माना जाता था, उसमें ऐसे लोग भर गए हैं जो दानव का रुप धरे हुए हैं और उन्हें केवल पैसा चाहिए. पैसे की हवश में ये लोग किसी की भी जिंदगी से खिलवाड़ करने से नहीं चुक रहे हैं. छोटे-छोटे शहरों में इन लोगों ने नर्सिंग होम बना रखे हैं और जनता की गाढ़ी कमाई को दोनों हाथ से लूट रहे हैं. 
   
 

sunil kumar tiwari

 
 Bihar main bhi es tarah ke maamle saamne aaye hain. desh bhar main es mudde par abhiyan chala chahiye. 
   
 

kaduvasach.blogspot.com

 
 रिमी एवँ परिजनोँ कि "सामाजिक स्थिती एवँ परेशानियोँ " को देखते हुये, सरकार-मानवअधिकार आयोग-समाजसेवी संघठनो को उचित कदम उठाने चाहिये। 
   
 

Rajesh priyadershi

 
 good story. plz give me details contact address of RIMI.  
   
 

Himanshu Sinha (patrakarhimanshu@gmail.com)

 
 CBI ki jaanch honi chahiye aur desh main es tarah ki laparvai ke liye alag kanoon banaya jaana chahiye 
   
 

Agnima

 
 पश्चिम बंगाल की वाम सरकार को इस पूरे मामले की जांच करवानी चाहिए और दोषियों को सजा दी जानी चाहिए. मुझे लगता है कि देश के दूसरे राज्यों में भी इस तरह के और मामले हो सकते हैं, उनकी भी जांच के लिए सरकार को पहल करनी चाहिए. 
   
 

kumar abhishek

 
 Rimi ki kahani sun kar aankh bhar aai. jin logon ki laparvahi se rimi es halat main pahunchi hai, unhen faansi ki saja di jaani chahiye. 
   
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