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रणेन्द्र

 
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ताओ ते चिंगः लाओ त्सु

भाषांतर

 

ताओ ते चिंगः लाओ त्सु

भाषांतरः इला कुमार

 

एक

इला कुमार

वह जो सिकुड़ना जानता है
प्रथमतः विस्तृत होना जानता है

वह जो आज अवणत है
पहले उन्नत था
वह जो आज औंधा है
शुरु में ऊंचा उठा था

कुछ भी पाने के पहले
देय भाव होना ज़रुरी है
इसे वस्तुओं के स्वभाव का अवबोधन कहा जाता है

मछली जल की गहराई नहीं त्याग सकती
और
राष्ट्र के हथियारों को प्रदर्शित नहीं किया जा सकता

दो
काया या जीवनः कौन ज़्यादा महत्व रखता है
आत्मा या संपत्तिः कौन ज़्यादा मूल्यवान है
लाभ या हानिः कौन ज़्यादा दुखदायी है

जो वस्तुओं से ज़्यादा जुड़ाव महसूस करता है
वह ज़्यादा कष्ट पाता है
जो संचित करता है, वह ज़्यादा हानि झेलता है
एक संतोषी व्यक्ति कभी भी निराश नहीं होता

वह जो सही वक्र पर थमना जानता है
स्वयं को कभी मुश्किलों के बीच नहीं पाता

वह हमेशा सुरक्षित रहता है.

 

21.02.2009, 21.50 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

ritesh (riteshtikariha@gmail.com) durg

 
 well. बहुत अच्छा है भाई. भगवान उसका भला करे. 
   

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