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नक्सल आंदोलन के संस्थापक कानू सान्याल का निधन

नक्सल आंदोलन के संस्थापक कानू सान्याल का निधन

कोलकाता. 23 मार्च 2010


नक्सली आंदोलन के संस्थापकों में से एक कानू सान्याल का मंगलवार को निधन हो गया. उनका शव हाथीघीसा स्थित उनके घर में रस्सी से लटका हुआ पाया गया. पुलिस मान कर चल रही है कि पिछले कुछ समय से विभिन्न बीमारियों से परेशान कानू सान्याल ने उन्होंने आत्महत्या की है.

कानू सान्याल और चारु मजुमदार ने मिल कर बंगाल के जलपाईगुड़ी के नक्सलबाड़ी में सशस्त्र आंदोलन चलाया था, जिसके बाद वह आंदोलन पूरे देश में नक्सल आंदोलन के नाम से जाना गया.

1929 में दार्जीलिंग के कर्सियांग में जन्में कानू सान्याल अपने पांच भाई बहनों में सबसे छोटे थे. पिता आनंद गोविंद सान्याल कर्सियांग के कोर्ट में पदस्थ थे. कानू सान्याल ने कर्सियांग के ही एमई स्कूल से 1946 में मैट्रिक की अपनी पढ़ाई पूरी की. बाद में इंटर की पढाई के लिए उन्होंने जलपाईगुड़ी कॉलेज में दाखिला लिया लेकिन पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. उसके बाद उन्हें दार्जीलिंग के ही कलिंगपोंग कोर्ट में राजस्व क्लर्क की नौकरी मिली. लेकिन कुछ ही दिनों बाद बंगाल के मुख्यमंत्री विधान चंद्र राय को काला झंडा दिखाने के आरोप में उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया.

जेल में रहते हुए उनकी मुलाकात चारु मजुमदार से हुई. जब कानू सान्याल जेल से बाहर आए तो उन्होंने पूर्णकालिक कार्यकर्ता के बतौर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की सदस्यता ली. 1964 में पार्टी टूटने के बाद उन्होंने माकपा के साथ रहना पसंद किया. 1967 में कानू सान्याल ने दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी में सशस्त्र आंदोलन की अगुवाई की.

अपने जीवन के लगभग 14 साल कानू सान्याल ने जेल में गुजारे. इन दिनों वे भाकपा माले के महासचिव के बतौर सक्रिय थे और नक्सलबाड़ी से लगे हुए हाथीघिसा गांव में रह रहे थे. दो साल पहले लकवाग्रस्त होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया था. लेकिन इसके बाद उन्होंने कहीं भी भर्ती होने से इंकार कर दिया था.

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

raksha dubey (raksha2211@gmail.com) Katni

 
 congratulations for such a courageous effort. 
   
 

m.l.pandia (mlpandia@gmail.com) chandrapur

 
 क्यों नहीं हम इस तरह के लोगों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करें.
 
   
 

Mihir Goswami , Bilaspur, Chhattisgarh

 
 यह कैसा तो समय है कि सूचनायें बाढ़ की तरह हमारे चारों ओर फैल गई हैं और हम उसमें डूब-उतरा रहे हैं-
चारु मजूमदार के बाद अब कानू सान्याल की संदेहास्पद अवस्था में मौत... साहित्य के कोटे से मणिशंकर अय्यर का राज्यसभा में प्रवेश...दो वयस्कों का अपनी मर्जी से साथ रहने को कानून की हरी झंडी... मंत्री का तमाचा खा कर भी कायदे में विरोध करने वाली हमारी संवैधानिक बाध्यता... फिर हर जगह रामनवमी में 5 दीये जलाने का फरमान... रामनाम लिखने वाले बैंक.... !
ये सारी खबरें भले अलग-अलग नजर आती हों लेकिन इन सबके सूत्र आपस में गुम्फित हैं. सबके सिरे एक-दूसरे से जुड़े हुए.
 
   
 

Rector Kathuria (rectorkathuria@gmail.com) Ludhiana

 
 It is really hard to believe that struggler and revolutionary Kaanu da committed suicide.......! 
   
 

bhagat singh (bhagat.5270@yahoo.com) raipur

 
 देश के लगभग सभी समाचारपत्रों ने कानू सान्याल की आत्महत्या का निर्णय सुनाया है. जबकि वहां की पुलिस तक कह रही है कि जाँच के बाद ही कुछ कह सकेंगे. कानू दा से आपने लंबी बातचीत की है क्या आप को लगता है कि इस वैचारिक स्तर का आदमी आत्महत्या कर सकता है. आप ने स्वयं कल बिलासपुर के एक प्रोग्राम में कहा कि उन्होंने आत्महत्या नहीं की. क्या उन्होंने कोई पत्र छोड़ा है, मुझे नहीं लगता कि कोई इस स्तर का कॉमरोड बिना अपना अंतिम भाषण दिया जा सकता है.

मैंने पिछले सालों में कॉमरेड शैली (सीपीआईएम के राज्य सचिव) और कामरेड वरदराजन (सीपीआई एम की सेंट्रल कमेटी के सदस्य) की आत्महत्या को देखा है, उन्होंने भी अपना आखिरी पत्र छोड़ा था.

मैं बिल्कुल नहीं मानता की कानू दा आत्महत्या कर सकते हैं. क्या यह संभव नहीं है जिन लोगों के लिए वह असहज बन गए थे उन्होंने ही प्रतीक रूप से उन्हें शांत किया हो. हो कुछ भी सकता है. कम से कम जब तक हम इसे निधन नहीं माने और वो भी बहुत दुर्भाग्यपूर्ण.
 
   
 

Rangnath Singh New Delhi

 
 हार्दिक श्रद्धाजंलि। 
   
 

lalit kuchalia (medialalit@gmail.com) Bhopal(meerut)

 
 एक क्रांतिकारी को कभी भी आत्महत्या नहीं करना चाहिये. क्रांतिकारी कभी भी डरपोक नहीं होता. जैसा कानू सान्याल ने किया, वह दुखद है. 
   
 

सुधा ओम ढींगरा USA

 
 कानू सान्याल जी को विनम्र श्रद्धांजलि..आलोक जी द्वारा लिया गया साक्षात्कार पढ़ा..बहुत कुछ जाना. 
   
 

Ved Prakash Singh (vedaazmi@gmail.com) मुंबई

 
 आत्यहत्या सभ्यता की हार है. लेकिन अगर कानू सान्याल जैसा क्रांतिकारी आत्महत्या करता है तो उसकी जरूर कोई ठोस वजह होगी. कानू सान्याल को लाल सलाम.
 
   
 

राजीव रंजन प्रसाद (rajeevnhpc102@gmail.com) बचेली, बस्तर

 
 कानू सान्याल की आत्महत्या दु:खद है। व्यवस्था के खिलाफ एक सोच को पैदा करना और उसका प्रणेता बनना उन्हे महान भी बनाता है। उनका संघर्ष मार्ग दिखाता है तो उनकी सोच में परिवर्तन यह भी सिद्ध करता है कि आन्दोलन क्या है? कैसे होना चाहिये और क्यों होना चाहिये?

कानू जैसे क्रांतिकारी अगर एक राह बनाते हैं तो स्वयं अपनी राह की विवेचना करने से गुरेज भी नहीं करते। अपने ही रास्ते को "आतंकवाद का पथ" बताने में उन्हे कोई गुरेज नहीं होता। आलोक पुतुल जी के द्वारा लिये गये साक्षात्कार की इन पंक्तियों में बहुत कुछ है। कानू सान्याल नक्सलवाद को ले कर करते हैं - "हम कहते हैं कि ये terrorist हैं. They mainly base themselves on terror campaign पैसा से बंदूक से...... ये लोग आदमी को धमकी देकर पैसा देकर, पैसे वाले को अदा करते हैं कि कुछ कर रहे हैं. ऐसे ही, yes in the form of armed struggle. I never condemn it. पर ऐसे, you cannot do it. In the last analysis, you will be defeated. काहे कि Terror campaign से होगा नहीं unless people are with you."

यह कहने के लिये कानू सान्याल की हिम्मत, सोच और पाकहृदयता को सलाम करना होगा कि पूरी सच्चाई से अपने बनाये रास्ते अर्थात नक्सलवाद को वे आतंकवाद स्वीकारते हैं और मानते है कि इससे लूट-खसोट तो हो सकती है व्यवस्था परिवर्तन नहीं हो सकता? गुमराह नक्सली आतंकवादी मार्क्स लेनिन और माओ को क्या खाक समझेंगे...उनकी समझ में सान्याल भी आने से रहे।

कानू सान्याल को विनम्र श्रद्धांजलि।
 
   
 

bhagat singh (bhagat.5270@yahoo.com) raipur

 
 नक्सलवादी आंदोलन के भटकने पर और माओवाद की दुर्दशा पर कॉ. सान्याल के विचारों ने जनतांत्रिक रास्ते की संभावना बताई. सीपीआई (एमएल) के गठन और उसके कार्यों पर चर्चा होती रहेगी. लेकिन उन्होंने आलोक पुतुल जी से बातचीत में जो जवाब देते हुए कहा कि नक्सलवाद भटक कर आतंकवाद हो गया है, इतनी बड़ी बात केवल कानू सान्याल ही कह सकते थे. कॉमरेड कानू सान्याल को मेरा क्रांतिकारी लाल सलाम. 
   
 

vanshika kolkata

 
 kaanu sanyal ka yeh interview ...yeh snaps...all have become a part of research work..
hard to believe that struggler is no more.
alokji kya snaps album roop me raviwar par mil sakegenge
 
   
 

अशोक कुमार पान्डेय ्ग्वालियर

 
 उस अप्रतिम क्रांतिकारी को लाल सलाम! 
   
 

ajay prakash (ajay.m.prakash@gmail.com) delhi

 
 दुखद.. नक्सलबाड़ी के एक नेता का ऐसे जाना बेहद अफ़सोस जनक है
 
   
 

Suparno Ghosh , Kolkata

 
 आपकी बातचीत बहुत महत्वपूर्ण है और आज के नक्सल आंदोलन की कई परतों को उघाड़ती हैं. 
   
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