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मेरा गुनाह क्या है

मुद्दा

मेरा गुनाह क्या है

हामिद मीर इस्लामाबाद से

 

मीडिया के मेरे अनेक साथी इन दिनों एक फर्जी टेप के आधार पर मेरे पीछे पड़े हुए हैं और तालिबान के साथ मेरा रिश्ता जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. डॉन के एक वरिष्ठ स्तंभकार ने तो यहां तक दावा किया कि हामिद मीर का चरमपंथियों के साथ पुराना रिश्ता है क्योंकि मैंने ओसामा बिन लादेन का इंटरव्यू किया था. यदि ऐसी बात है तो मैं यह जानना चाहता हूं कि ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, अमेरिका की पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलिजा राइस और यहां तक कि अमेरिका की मौजूदा विदेश मंत्री हिलैरी क्लिंटन के भी मैंने जो इंटरव्यू लिए हैं उसका क्या अर्थ लगाया जाए?

हामिद मीर


सबसे पहली बात तो यह है कि ओसामा बिन लादेन का इंटरव्यू लेने वाला मैं कोई पहला जर्नलिस्ट नहीं हूं. मुझसे पहले तो राबर्ट फिस्क लादेन का इंटरव्यू ले चुके थे. उनके अलावा पीटर बर्जन और रहिमुल्लाह यूसफजई ने भी लादेन के इंटरव्यू किए हैं.

इस विरोधाभास पर गौर किया जा सकता है. डेली टाइम्स का दावा का है कि खुफिया एजेंसियां मेरे खिलाफ जांच कर रही हैं. मगर सूचना मंत्री कमार जमान काइरा ने शनिवार की रात सामा टीवी पर सार्वजनिक तौर पर कहा है कि हामिद मीर को साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है और सरकार को उनसे किसी तरह की शिकायत नहीं है. ऐसे में मैं यह सोचने को मजबूर हो गया हूं कि खुफिया तंत्र के कुछ तत्व मीडिया के मेरे साथियों को मेरे खिलाफ भड़काने की कोशिश कर रहे हैं क्योंकि मैं किसी भी खुफिया एजेंसी के नियंत्रण से बाहर हूं.

मेरा अपराध सिर्फ इतना है कि मैंने पाकिस्तान आर्मी के एक मौजूदा जनरल के खिलाफ एक लेख लिखा था.

मेरी अपनी जानकारियों के मुताबिक यह सारा ड्रामा 26 अप्रैल आर्मी जनरल नदीम एजाज के खिलाफ प्रकाशित मेरे एक लेख की वजह से है. यह जनरल पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या में शामिल था. यूएन की रिपोर्ट में उसकी ओर अंगुली उठाई गई है मगर जरदारी सरकार उसे पकड़ने में अब तक नाकाम रही है.

पंजाब के गवर्नर सलमान ताशीर की मदद से खुफिया एजेंसियों के कुछ तत्वों ने मेरे खिलाफ यह साजिश रची. उनके अखबार डेली टाइम्स ने मेरे खिलाफ इस स्कैंडल को प्रकाशित किया. डेली टाइम्स ने एकतरफा तौर पर विश्लेषण कर अपने फ्रंट पेज पर यह एकतरफा रिपोर्ट प्रकाशित कर दी. इस अखबार ने यह स्थापित करने की कोशिश की है कि मैं न केवल तालिबान का सहयोगी हूं बल्कि खालिद ख्वाजा की हत्या के लिए भी मैं ही जिम्मेदार हूं.

ऐसे हुई लादेन से मुलाकात-एक

ऐसे हुई लादेन से मुलाकात-दो

ऐसे हुई लादेन से मुलाकात-तीन

ऐसे हुई लादेन से मुलाकात-चार

ऐसे हुई लादेन से मुलाकात-पांच


हकीकत यह है कि खालिद ख्वाजा की हत्या के लिए जिम्मेदार ग्रुप की ओर से मुझे धमकी भरे ई-मेल मिले हैं और मैंने डेली जंग में 6 मई को अपने कॉलम में इनका जिक्र भी किया है.

निश्चित रूप से मैं इन्कावयरी कमेटी ऑफ आरआईयूजे (रावलपिंडी इस्लामाबाद यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स) के सामने इसी तरह के कई और तथ्य पेश करूंगा. यह कालम उर्दू में था लेकिन मैंने इसमें लिखा था कि एशियन टाइगर्स मीडिया को धमका रहे हैं.

इसके अलावा मैंने अंग्रेजी और उर्दू में ढेरों कालम लिखे हैं और तालिबान और सिक्योरिटी फोर्स दोनों की आलोचना की है. यही नहीं मैं तब स्वात जाकर वहां के हालात का जायजा लिया था जब वहां जाने पर रोक लगी थी. उसके बाद मैंने वहां तालिबान द्वारा महिलाओं पर की जा रही ज्यादियों के बारे में भी लिखा था.

फिदायीन हमलों पर सबसे ज्यादा शो मैंने किए हैं. मेरे शो में फिदायीन हमलों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने वाले अनेक स्कॉलरों को तालिबान ने मार डाला. मुफ्ती सरफराज़ नईमी, मौलाना हसन जन और मौलाना मेराजुद्दीन ऐसे ही तीन मौलाना थे जिन्हें तालिबान ने सिर्फ इसलिए निशाना बनाया क्योंकि उन्होंने मेरे शो में खुलकर राय जाहिर की थी. यहां तक कि मुझे धमकियां मिलीं इसके बावजूद मैंने अपना शो जारी रखा.

जहां तक खालिद ख्वाजा की बात है तो मेरी उनसे कोई जातीय दुश्मनी नहीं है. खाव्जा साहब की वजह से मैंने डेली औसाफ से इस्तीफा नहीं दिया था. मैंने जियो टीवी ज्वाइन करने के लिए 2002 में डेली औसफ को अलविदा कहा था. ख्वाजा साहब कई बार मेरे शो में शामिल हुए. अप्रैल में उनकी हत्या हुई और मेरी कथित बातचीत के टेप मई के तीसरे हफ्ते में सामने आए हैं. कोई भी यह जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं कि आखिर यह टेप आया कहां से? किसी की दिलचस्पी इसमें नहीं है कि आखिर ख्वाजा साहब की हत्या के लिए जिम्मेदार कौन है? कोई यह नहीं पूछ रहा है कि ख्वाजा साहब को किसने ट्राइबल इलाकों में भेजा था. इस टेप ड्रामे के पीछे सिर्फ एक ही मकसद है और वह कि कुछ लोग मेरा मुंह बंद करना चाहते हैं.

आतंकवादी के साथ मेरी कथित बातचीत का जो टेप जारी किया गया है उसमें मुझे यह कहते हुए बताया गया है कि खालिद ख्वाजा आईएसआई के नहीं सीआईए के एजेंट हैं और टेप में शामिल अज्ञात आतंकवादी दावा कर रहा है कि ख्वाजा रावलपिंडी में कुछ ब्रिगेडियरों की हत्या में शामिल थे.

सवाल यही उठता है कि यदि ये आतंकवादी तालिबान हैं और ख्वाजा भी आतंकवाद से जुड़े रहे हैं तो फिर उन्हें मारा किसने? मुझे पूरा शक है कि कुछ लोगों ने मेरी आवाज के साथ छेड़छाड़ कर यह टेप तैयार किया है.

और अंतिम बात यह हर कोई जानता है कि कोई भी आम पाकिस्तानी लोकल आई कार्ड के बिना ट्राइबल एरिया में नहीं जा सकता. हम बन्नू से आगे जा ही नहीं सकते मगर खालिद ख्वाजा दो अन्य लोगों के साथ नार्थ वजीरिस्तान तक पहुंच गए थे. आखिर किसने उन्हें बन्नू से एफएटीए तक जाने की इजाजत दी? इन सवालों का जवाब ही बताएगा कि आखिर मुझे क्यों निशाना बनाया जा रहा है.

29.05.2010, 13.55 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Rajesh (rajeshdogra2@gmail.com) Dogra

 
 you are neither Jesus nor Mohammed,neither Galileo nor nostradamus ,But you are a journalist-neither the First nor the last one. the politicians of all times would continue to accuse/try/kill the right thinking persons, so remain ready. the world needs to see many more sacrifices to see light, no need to justify your deeds.the world would know the truth as truth prevails always,What if you r there or not ! continue your fight like minded people r always with you and continue to pray for Justice. +91 98722 89049 
   
 

Sainny Ashesh (sainny.ashesh@gmail.com) Manali

 
 अब जो लोग देखेंगे तो ख्वाब और तरह के/ इस शहर पे उतरेंगे अज़ाब और तरह के
अबके तो चेहरे हैं न आँखें हैं न लब हैं/ इस अहद ने पहने हैं नकाब और तरह के
अब कूचा-ऐ-कातिल से बुलावा नहीं आता/ कासिद हैं और लाते हैं जवाब और तरह के
वाइज़ से 'फ़राज़' अपनी बनी है न बनेगी/ हम और तरह के हैं जनाब और तरह के
 
   
 

Roop Singh Chandel (roopchandel@gmail.com) New Delhi

 
 एक ईमानदार पत्रकार के खिलाफ यह साजिश शर्मनाक है. उम्मीद है कि लेखक और ईमानदार पत्रकार बिरादरी इनका साथ देगी.  
   
 

Beena (beenapandey927@gmail.com) Lucknow

 
 मीडिया बस अपना काम करे. बदनीयत इंसान बकीकत को दबाने की पूरी कोशिश तो करते ही हैं. लेकिन हामिद मीर साहब बढ़ते कदमों को रोके नहीं. सच्चाई साथ है आपके तो डर कैसा. सच तो बेबस करने की कोशिश नाकामयाब होनी ही चाहिए. 
   
 

Sanjeev Thakur (sanjeev.thakur@gmail.com) , New Delhi

 
 स्वतंत्र मीडिया जब भी ऐसा करता है, सत्ताधारी ताकतें उसे ऐसे ही कुचक्र में फंसाती हैं. हामिद मीर साहब, आप अपनी लड़ाई जारी रखें. दुनिया की सच्ची ताकतें हमेशा आपके साथ हैं. 
   
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