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लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

हमारी चिंतना

ममता बनर्जी के नाम एक खुला पत्र

कमजोर सरकार और गैरजिम्मेवार पत्रकारिता

अमन की असली दुआ

बाबा बनाते चैनल

राज्य का कन्या ‘दान’

लहू का सुराग़

मध्य-पूर्व में अमरीकी हांका

कम से कम एक दरवाज़ा

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

चिकनी चमेली से डरता कौन है ?

सबको खारिज करने का अधिकार

ये कहां आ गये हम

यह सबके लिये चेतावनी है

 
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इस सर्वे से सावधान

बहस

 

इस सर्वे से सावधान

अजय प्रकाश


दिल्ली स्थित सर्वे कंपनी ‘मार्केटिंग एंड डेवेलपमेंट रिसर्च एसोशिएट्स’ (एमडीआरए) मौलवियों और मुस्लिम युवा धार्मिक नेताओं से एक सर्वे कर रही है. सर्वे कंपनी ने पूछने के लिए जो सवाल तय किये हैं, उनमें से बहुतेरे आपत्तिजनक, खतरनाक और षडयंत्रकारी हैं. सवालों की प्रकृति और क्रम जाहिर करता है कि सर्वें कंपनी के पीछे जो ताकत लगी है उसने मुस्लिम धार्मिक नेताओं की राय पहले खुद ही तय कर ली है और मकसद देश में सांप्रदायिक भावना को और तीखा करना है. नमूने के तौर पर तीन सवालों का क्रम देखिये-

सर्वे किसके खिलाफ


1. क्या आप सोचते हैं कि पाकिस्तानी आतंकवादी आमिर अजमल कसाब को फांसी देना उचित था या कुछ ज्यादा ही कठोर है?

2. क्या आप और आपके दोस्त सोचते हैं कि मुंबई केस में कसाब को स्पष्ट सुनवाई मिली है या यह पक्षपातपूर्ण था?

3. क्या आप सोचते हैं कि मुंबई आतंकवाद के लिए कसाब की फांसी की सजा पर दुबारा से सुनवाई करके आजीवन कारावास में बदल दिया जाये,वापस पाकिस्तान भेज दिया जाये या फांसी की सजा को बरकरार रखना चाहिए?

एमडीआरए सर्वे कंपनी द्वारा पुछवाये जा रहे इन नमूना सवालों पर गौर करें तो चिंता और कोफ्त दोनों होती है. साथ ही देश के खुफिया विभाग की मुस्तैदी पर भी सवाल उठता है कि आखिर वह कहां है जब समाज में एक नये ढंग के विष फैलाने की तैयारी एक निजी कंपनी कर रही है.

इन सवालों पर कोई मौलवी या मुस्लिम धर्मगुरू जवाब दे इससे ज्यादा जरूरी है कि सर्वे करने वालों से पूछा जाये कि कसाब से संबंधित प्रश्न आखिर क्यों किया जा रहा है जबकि मुंबई की एक अदालत ने इस मामले में स्पष्ट फांसी का फैसला अभियुक्त को सुना दिया. तो फिर क्या कंपनी को संदेह है कि धार्मिक नेता अदालत के फैसले के कुछ उलट जवाब देंगे? अगर नहीं तो इन्हीं को इन सवालों के लिए विशेष तौर पर, क्यों चुना गया? वहीं कंपनी के मालिकान इस क्या इस बात से अनभिज्ञ हैं कि एक स्तर पर कोर्ट की यह अवमानना भी है.

दूसरी महत्वपूर्ण बात और इस मामले को प्रकाश में लाने वाले दिल्ली स्थित भारतीय मुस्लिम सांस्कृतिक केंद्र के प्रवक्ता वदूद साजिद बताते हैं-‘कसाब एक आतंकी है जो हमारे मुल्क में दहशतगर्दी का नुमांइदा है. दूसरा हमारा कोई वह रिश्तेदार तो लगता नहीं. रिश्तेदार होने पर किसी की सहानुभूति हो सकती है,मगर एक विदेशी के मामले में ऐसे सवाल वह भी सिर्फ मुस्लिम धार्मिक गुरूओं से, संदेह का गहरा करता है.’

सर्वे कंपनी की नियत पर संदेह को लेकर हम अपनी तरफ से कुछ और कहें उससे पहले उनके द्वारा पूछे जाने वाले महत्वपूर्ण सवाल यहां चस्पा कर देना ठीक समझते हैं जो देश भर के मुस्लिम धार्मिक गुरूओं और मुस्लिम युवा धार्मिक नेताओं से पूछे जाने हैं.सवालों की सूची इसलिए भी जरूरी है कि खुली बहस में आसानी हो,इस चिंता में आपकी भागीदारी हो सके और ऐसे होने वाले हर धार्मिक-सामाजिक षड्यंत्र के खिलाफ हम ताकत के साथ खड़े हो सकें.

बस इन प्रश्नों के साथ कुछ टिप्पणियों की इजाजत चाहेंगे जिससे हमें संदर्भ को समझने में आसानी हो.ध्यान रहे कि सर्वे टीम ने ज्यादातर प्रश्नों के जवाब के विकल्प हां, ना, नहीं कह सकते और नहीं जानते की शैली में सुझाया है.
प्रश्न इस प्रकार से हैं-

1.न्यायमूर्ति राजेंद्र सच्चर कमेटी रिपोर्ट के बारे में आपकी क्या राय है? क्या यह मुसलमानों की मदद कर रही है या नुकसान कर रही है?

टिप्पणी- जब लागू ही नहीं हुई तो मदद या नुकसान कैसे करेगी. सवाल यह बनता था कि लागू क्यों नहीं हो रही है?

2. आपके समुदाय में धार्मिक नेताओं के प्रशंसक घट रहे हैं, पहले जैसे ही हैं या पहले से बेहतर हैं?

टिप्पणी- धार्मिक गुरू इसी की रोटी खाता है इसलिए कम तो आंकेगा नहीं. बढ़ाकर आंका तो खुफिया और मीडिया के एक तबके की मान्यता को बल मिलेगा जो यह मानते हैं कि मुस्लिम समाज धार्मिक दायरे से ही संचालित होता है.ऐसे में पुरातनपंथी,धार्मिक कट्टर और अपने में डूबे रहने वाले हैं, कहना और आसान हो जायेगा और मुल्क के मुकाबले धर्म वहां सर्वोपरि है,का फ़तवा देने में भी आसानी होगी.

क्या आप सोचते हैं कि युवा मुस्लिम को राजनीति में ज्यादा भाग लेना चाहिए या धर्म के प्रचार में सक्रिय रहना चाहिए या दोनों में?


3. आपकी राय में आज मुस्लिम युवा धर्म तथा धर्म गुरूओं से प्रेरित होते हैं या बाजारी ताकतें जिसमें इंटरनेट और टीवी शामिल हैं, प्रभावित कर रहे हैं?

टिप्पणी-यह भी उनके रोटी से जुड़ा सवाल है. दूसरा कि इसका जवाब सर्वे कंपनी के पास होना चाहिए,धार्मिक गुरूओं के पास ऐसे सर्वे का कोई ढांचा नहीं होता.

4. पूरे देश और देश से बाहर मुस्लिम नेताओं से संपर्क के लिए आप इंटरनेट का इस्तेमाल ज्यादा कर रहे हैं या नहीं?

टिप्पणी-कई बम विस्फोटों में जो मुस्लिम पकड़े गये हैं उन पर यह आरोप है कि वे विदेशी आकाओं से इंटरनेट के जरिये संपर्क करते थे. ऐसे में इस सवाल का क्या मायने हो सकता है?

4 ए. आपकी राय में समुदाय सामाजिक मामलों में राजनैतिक नेताओं से ज्यादा प्रभावित है या धार्मिक नेताओं से?

टिप्पणी - इस प्रश्न का बेहतर जवाब जनता दे सकती है?

5. आपकी राय में हिंसा, गैर कानूनी गतिविधियां और आतंकवादी गतिविधियां क्यों बढ़ रही हैं, इस प्रवृति को क्यों बढ़ावा मिल रहा है?

टिप्पणी-सभी जानते हैं कि यह सरकारी नीतियों की देन है. लेकिन मुस्लिम धार्मिक नेता इस बात को जैसे ही बोलेगा तो वैमनस्य की ताकतें ओसामा से लेकर हुजी के नेटवर्क से उसे कैसे जोड़ेंगी,यह तथ्य हम सभी को पिछले अनुभवों से बखूबी पता है.

6. क्या आप सोचते हैं कि युवा मुस्लिम को राजनीति में ज्यादा भाग लेना चाहिए या धर्म के प्रचार में सक्रिय रहना चाहिए या दोनों में?

टिप्पणी-यह भी रोटी से जुड़ा सवाल है.इसलिए जवाब सर्वे कंपनी को भी पता है और मकसद सबको.

7. मुस्लिम युवाओं की नकारात्मक छवि हर तरफ क्यों फैल रही है. इसके लिए कौन और कौन से बातें जिम्मेदार हैं, क्या आप कुछ ऐसी बातें बता सकते हैं?
टिप्पणी-इसका सर्वे कब हुआ है कि मुस्लिम युवाओं की छवि नकारात्मक है. दूसरे बात यह कि अगर सवालकत्र्ता यह मान चुका है कि छवि नकारात्मक है तो उससे बेहतर जवाब और कौन दे सकता है.

8. कुछ के अनुसार न्यूज मीडिया और विदेशी एजेंसी शिक्षित युवा मुस्लिम को गैर कानूनी गतिविधियों के लिए भर्ती कर रही हैं, क्या इस पर आप विश्वास करते हैं या इस तरह की घटना आपको पता है?
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

saurav (talktosaurav143@gmail.com) lko

 
 आपका लेख पढ़ कर अच्छा लगा. आपने हकीकत को दर्शाया है. 
   
 

JASBIR CHWLA Indore

 
 बहुत ही आपत्तिजनक सर्वे है. जानबूझ कर मुसलमानों की नकारात्मक छवि पेश की जा रही है. इसके पीछे कोई छुपा एजेंडा है. इसकी गहन जाँच होनी चाहिए. सरकार देखे, किसका स्वार्थ है? 
   
 

शाह आलम (jucsindia@gmail.com) , अध्यक्ष, जर्नलिस्ट्स यूनियन फॉर सिविल सोसायटी,ई-36,गणेशनगर नई दिल्ली-92

 
 जर्नलिस्ट्स यूनियन फॉर सिविल सोसायटी ने एक निजी कम्पनी की ओर से युवा मुस्लिम धर्मगुरुओं के बीच की जा रहे उस सर्वे का विरोध किया है, जिसमें मुसलमानों की छवि को राष्ट्रविरोधी के रूप में पेश करने की कोशिश की जा रही है. संगठन ने 6 जुलाई को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष शफी कुरैशी को इस संबंध में ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले हस्तक्षेप की मांग की. राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन ने पूरे तथ्य में कार्रवाई का आवाश्वसन दिया है.

एमडीआरए द्वारा किए जा रहे इस सर्वे का मकसद मुस्लिम युवाओं की छवि को कट्टर व आतंकवादियों का हिमायती बताना है. जब मुंबई की एक अदालत अजमल आमीर कसाब को सजा सुना चुकी है, तो इस इस पर सवाल उठाना अदालत की भी अवमानना है. देश में पहले से ही मुस्लिम समुदाय के लोगों से दोहरा बरताव किया जा रहा है. इस सर्वे से ऐसे व्यवहार को प्रमाणिकता दिलाने की कोशिश की जा रही है.

संगठन के विजय प्रताप ने कहा कि सर्वे में जिस तरह से एकतरफा सवाल पूछे गए हैं, उससे साफ जाहिर होता है कि सर्वे करने वालों का मकसद मुस्लिमों की छवि को राष्ट्रविरोधी साबित करना है. उन्होंने कहा कि थोड़े से धर्मगुरुओं के बीच ऐसे सर्वे के आधार पर एक पूरे समुदाय के खिलाफ नफरत की मानसिकता का निर्माण करने की कोशिश की जा रही है. मुकेश चौरासे ने बताया कि अल्पसंख्यक आयोग को सौंपे गए ज्ञापन में संगठन ने इस तरह के सर्वे पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है. जबकि विजय प्रताप ने कहा कि इस सर्वे पर सभी न्यायप्रिय संस्थाओं को आगे आकर अपना विरोध दर्ज कराना चाहिए.
 
   
 

Subhash Rai Agra

 
 अजय प्रकाश जी, आप ने बहुत अच्छा किया कि यह तथ्य सबके सामने पेश किया पर मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं दिख रही है. क्या मुस्लमान धर्मगुरु इस देश में नहीं रहता है? अगर वह इसी देश का नागरिक है तो उससे इन सवालों के उसी तरह के जवाब की अपेक्षा की जानी चाहिए, जैसा एक आम देशभक्त नागरिक देगा. मसलन कसाब के मामले में जो तीन सवाल प्रमुखता से आप ने रखा है, उनके जवाब अगर मुझे देने हों तो मैं कहूँगा कि कसाब को फांसी देना बिलकुल उचित है, उसके मामले की ठीक से सुनवाई हुई है और उसकी सजा में कोई परिवर्तन नहीं होना चाहिए, और उसे पाकिस्तान भेजे जाने की बिलकुल जरूरत नहीं है, उसे तुरंत फांसी दी जानी चाहिए.

मैं मानता हूँ कि मुझे इस देश से प्यार है और मैं यह भी मनाता हूँ कि जिसे भी देश से प्यार होगा वह यही जवाब देगा. अगर किसी मुस्लिम धर्मगुरु से यही सवाल किये जा रहे हैं, तो उसे इनके जवाब देने में किंचित भी परेशानी आखिर क्यों होनी चाहिए? इसमें कौन सा षडयंत्र है? क्या देश के सभी नागरिको को देश के सन्दर्भ में किसी भी सवाल का जवाब देने को तैयार नहीं रहना चाहिए? और जो इसके लिए तैयार नहीं है उसकी देशभक्ति पर शक नहीं किया जाना चाहिए? एक बात और अगर आप को पाठकों की सच्ची प्रतिक्रिया की दरकार थी तो आप को हर सवाल के साथ अपनी टिप्पणी नहीं लगानी चाहिए थी. इससे तो पढ़ते-पढ़ते एक आग्रह बन जायेगा और आप को सही प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी. धन्यवाद.
 
   
 

priyanka kaushal (priyankajournlist@gmail.com) raipur

 
 ये सर्वे केवल दिल्ली में हो रहा है या और भी कहीं? ये बड़ा ही आपत्तिजनक है, इस पर तत्काल रोक लगनी चाहिए। 
   
 

manoj (manoj.b@etv.co.in) bilaspur

 
 बहुत अच्छा प्रयास है. वास्तव में आपने इस विषय को सामने लाकर देशहित में सराहनीय काम कर रहे हैं. 
   
 

zulaikha jabeen Raipur- Chhattisgarh

 
 ये सब या ऐसा बहुत कुछ तो होना ही है दोस्त. जबकि कसाब की फांसी के उन्माद में देश हेमंत करकरे और उनके साथियों की हत्या से आंख मूंद कर सवाल नहीं उठायेगा. इस देश को ये या ऐसा बहुत कुछ भुगतना ही पड़ेगा. मुसलमानों का क्या है, वे काटे जाते थे, काटे जा रहे हैं आगे भी काटे जायेंगे- इसमें नया या अनोखा क्या है? देशभक्ति के चोले में देशद्रोही सामने हैं-देश के लिए फिक्रमंद हाशिए पर. फिर भी एक अच्छी रिपोर्ट के लिये बधाई. 
   
 

bhagat singh raipur c.g.

 
 बेहद शर्मनाक है. एमडीआरए द्वारा किये जा रहे इस सर्वे पर तुरंत रोक लगनी चाहिये और इन पर कार्रवाई होने चाहिये. मुझे लगता है कि ये काम मुसलमानों के खिलाफ काम करने वाली किसी संघी संस्था का हो सकता है. 
   
 

huzaifa (samaachaara@gmail.com) lucknow

 
 जो सवाल पूछे जा रहे हैं बिल्कुल गलत हैं. ऐसे लोग जो यह सवाल पूछने आए उन्हें पकड़ के कपड़े उतार के मारना चाहिए. 
   
 

Hasrat Arjjumend (harjjumend@yahoo.co.in) New Delhi

 
 Dear Mr. Ajay Prakash, You have written good article. However, the contexts have diffused in the article. In the bid to portray the leftist views the fundamental elements connected to Maulvis and Muslim leaders or Muslim youths are missed or ill-represented. The alternative questions you have written need elaboration. Otherwise they confuse the reader rather than making the contexts clear. Also the author's ideology and opinions are blurred, which should not be the case in expressions of thoughts. I am really confused what you want to establish. 
   
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