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पंचायत ने डायन बता कर जीभ काट ली

मुद्दा

 

पंचायत ने डायन बता कर जीभ काट ली

आवेश तिवारी सोनभद्र से

 

यह हिंदुस्तान में महिलाओं के खिलाफ पंचायतों के द्वारा चलाये जा रहे बर्बर अभियान का सबसे खौफनाक हिस्सा था. लगभग दो सौ लोगों की भीड़ के सामने पंचों में बैठे लोगों ने जागेश्वरी के दोनों हाथों और पैरों को जकड रखा था. जागेश्वरी का पति, अँधा पिता और उसके 2 माह से लाकर 8 साल तक के चार बेटों के रुदन से पूरा करहिया काँप रहा था.

जागेश्वरी


पंचायत ने कहा- जीभ बाहर निकालो. जागेश्वरी ने जीभ थोड़ी-सी बाहर निकाली. वहीं मौजूद सहदेव के बेटे ने उसकी जीभ अँगुलियों से पकड़ी और बाहर खिंच दी और एक ही प्रहार में उसे तेज धार बलुए से अलग कर दिया.

पंचायत का मानना था कि जागेश्वरी डायन है और उसकी वजह से ही उसके पडोसी सहदेव के एक नवजात बच्चे की अकाल मौत हुई थी.

दलित और महिला मुख्यमंत्री मायावती के पूर्वी उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जनपद के करहिया गाँव में घटी इस घटना का जायजा लेने जब हम वहां पहुंचे तो अस्पताल के बाहर एक पेड़ के नीचे लेटी हुई जागेश्वरी असहनीय दर्द के बावजूद अपने दो माह के बच्चे को दूध पिला रही थी. सरकारी अस्पताल के जिस कमरे में उसे रखा गया था, वहां से भी उसे बाहर खदेड़ दिया गया था क्योंकि अस्पताल में चिकित्सक नदारद थे.

प्रशासन खामोश
उधर घटना के लगभग 2 दिन बीतने के बावजूद पुलिस केवल एक ओझा समेत दो व्यक्तियों को गिरफ्तार कर पायी थी. घटना के 72 घंटे के बाद भी सोनभद्र का कोई अधिकारी अब तक गांव नहीं पहुंचा था.

जब हम करहिया पहुंचे तो जागेश्वरी का बूढ़ा और अँधा बाप बिस्तर पर पड़ा आंसू बहा रहा था. जागेश्वरी के तीनों बच्चे भूख से बेहाल दरवाजे की ओट में खड़े होकर माँ का इन्तजार कर रहे थे.

दूसरी ओर पंचायत और गाँव के लोग डायन के जीभ काटे जाने से खुश थे. हालाँकि जागेश्वरी की जीभ काटे जाने के बाद बीती रात सहदेव का एक और बच्चा अचानक चल बसा.

गाँव की ही रुपेश्वरी से जब हमने पूछा कि इतने लोगों के सामने आपकी गाँव की ही महिला की जीभ काट डाली, आप लोगों ने कुछ क्यों नहीं किया? उनका जवाब था- पंचों के फैसले के खिलाफ हम कैसे जा सकते हैं. वो बड़े बुजुर्ग हैं. उन्होंने जो भी फैसला लिया होगा, सोच समझ कर ही लिया होगा.

किस्से और भी
सोनभद्र का करहिया अब से पहले पुलिसिया ज्यादतियों का एक बड़ा केंद्र रहा है. कुछ वर्ष पूर्व जनजाति बहुल इस गाँव में चार युवकों को नक्सली बताकर पुलिस ने मुठभेड़ में मार डाला था और उनकी शिनाख्त भी कर ली गयी थी लेकिन कुछ माह पहले उनमें से एक युवक जिन्दा निकल आया तो पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ.

लेकिन इस बार तो गांव ही अपनी हिंसा के साथ सामने खड़ा था. गांव वालों की मानें तो गाँव के रामदयाल गोंड ने कोई बेटा न होने की वजह से अपनी बेटी जागेश्वरी की शादी गाँव के ही रमाशंकर से कर दी और उसे घर दामाद बना दिया.

रविवार को गाँव के ही सहदेव गोंड नामक एक व्यक्ति के 4 माह के बच्चे की मौत हो गयी. सहदेव ने इस मौत को लेकर गाँव के ओझा लखन को बुलाया और पूरी बात बतायी. ओझा ने बताया कि तुम्हारे बच्चे की मौत जागेश्वरी की वजह से हो रही है, इसके जीभ की बलि लेनी होगी तभी बच्चा बचेगा.

सहदेव ने मंगलवार को पंचायत बुलाई और भरी पंचायत में ओझा के मत को रखा, पंचायत में मौजूद सभी पुरुष सदस्यों ने ओझा की बातों से सहमति जताई और फिर जागेश्वरी पर पूरी पंचायत का कहर बरप पड़ा.

पंचायत के निशाने पर अब गाँव का ही राजेंद्र नामक एक युवक है, जिसने पंचायत के इस कारनामे की सूचना सर्वप्रथम पुलिस को और फिर मीडिया को दी.


सोनभद्र में महिलाओं को डायन बताकर उनका उत्पीडन करने की ये पहली घटना नहीं है अभी पिछले माह ही यहाँ के कोन इलाके से दो महिलाओं को गाँव बाहर निकालने का आदेश दे दिया गया था.

बैरपुर की घटना भी नहीं भुलाई जा सकती, जब 2006 में अनुसूचित जनजाति की तीन लड़कियों को सामूहिक बलात्कार के बाद गाँव से बाहर निकाल दिया गया था और उन्हें बिना किसी छत के खुले आसमान के नीचे रहने को विवश कर दिया गया था. पंचायत का मानना था कि बलात्कार के बाद ये लड़कियां अछूत हो गयी हैं.

निशाने पर दलित
आश्चर्यजनक रुप से दलित महिला मुख्यमंत्री वाले इस राज्य की पुलिस आदिवासी महिलाओं के साथ बलात्कार, हिंसा और अन्य किसी अपराध को उनकी परम्पराओं का हिस्सा मानती है और ज्यादातर मामलों में प्राथमिकी तक दर्ज नहीं की जाती.

जागेश्वरी के परिजनों ने बताया कि पुलिस वाले पहले इस मामले में हमें चुप रहने को कह रहे थे. हमने किसी से कुछ कहा भी नहीं लेकिन न जाने कैसे बात खुल गयी. वहीं पंचायत के निशाने पर अब गाँव का ही राजेंद्र नामक एक युवक है, जिसने पंचायत के इस कारनामे की सूचना सर्वप्रथम पुलिस को और फिर मीडिया को दी.

जागेश्वरी का पति रमाशंकर कहता है कि अब हम गाँव जायेंगे तो पंचायत के लोग हमें मार डालेंगे. जागेश्वरी कुछ कहना चाहती है रमाशंकर से मगर बोल नहीं पाती और उसकी आँख से आंसू छलक पड़ते हैं.

 

05.08.2010, 22.50 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Rama\ (snghramanj2005@gmal.cm)

 
 ये सिर्फ मायावती राज का सवाल नहीं है. ये समस्या हर उस पिछड़े इलाके में है, जहाँ शिक्षा और वैज्ञानिक सोच नहीं पहुंची है. आज जोगेश्वरी तो कल भागेश्वरी. कहीं न कहीं पूरे देश में इस तरह की अन्धविश्वास भरी घटना होती रही है. किसी को कोसने के बदले समाज को जगाने का कम करें, इसी में देश की भलाई है. 
   
 

सुजीत, MH1 NEWS (sujitdtj@gmail.com) दिल्ली

 
 बहुत ही दुखद घटना है,ना जाने हम किस युग में जी रहें है. बहुत घृणा आती है ये सब सुनकर कि आज के इस आधुनिक युग में भी लोगों की मानसिकता किस हद तक नीची है. जहाँ की महिला मुख्य मंत्री हो और वो भी दलित, जो हमेशा दलितों के हित की बात करती है लेकिन इस घटना के बाद ना तो पुलिस कोई कदम उठाती है और ना ही सरकार ने कुछ किया. यह सब शर्मनाक है. 
   
 

वन्दना गुप्ता (rosered8flower@gmail.com) दिल्ली

 
 आज का समाज कैसे खुद को सभ्य कह सकता है जब आज भी वीभत्सता अपने चरम पर है………कैसे कोई इस देश को विकास की ओर अग्रसित कह सकता है ? क्या ये ही विकास है कि हम आज भी आदिम युग मे जी रहे हैं? सरकार सिर्फ़ अपने लिये जीती है उसे देश और उसके समाज से कोई मतलब नही और कानून उसके हाथ की कठपुतली है तभी तो देश मे हर वर्ग के लिये अलग अलग कानून है अगर सबके लिये एक ही कानून हो और उसका सख्ती से पालन हो तो क्या ऐसा संभव था ? नही , मगर कौन चाहता है कि आज कानून मे कोई संशोधन हो अगर ऐसा हुआ तो उनकी मनमानी कैसे चलेगी ? कैसे वो देश को बाँटकर शासन कर पायेगी? जनता तो सिर्फ़ मरने और पिसने के लिये होती है उसका भला कोई क्यूँ चाहेगा जब तक जनता खुद ही जागरूक नही होगी। जब हम जैसे लोग खुद ही वोट देकर ऐसे नाकारा लोगों के हाथों मे देश की बागडोर सौंपेंगे तब तक ऐसे हादसे होते ही रहेंगे. जब तक जागरुकता नही आयेगी तब तक एक सभ्य समाज का निर्माण भी नही हो सकता। 
   
 

सुमेधा तिवारी , कानपुर

 
 पता नहीं हम किस जमाने में जी रहे हैं. ऐसे लोगों को तो फांसी की सजा होनी चाहिये. लेकिन लगता नहीं की सरकार आरोपियों को गिरफ्तार भी करेगी. आखिर एक पुरुष प्रधान समाज में तो यह सब होता ही रहता है! पुरुषों की यह सोच भला उन्हें अपनी ही बिरादरी के खिलाफ कैसे कार्रवाई करने देगी...!!! शर्मनाक है यह सब कुछ. 
   
 

Sainny Ashesh (sainny.ashesh@gmail.com) western himalayaas

 
 ये जाहिल लोग जब तक संगठित हैं, औरत की जीभ तब भी काटी जायेगी, जब वह कुछ कह भी नहीं रही है. मगर उस जीभ का क्या करें जो दुनिया के सबसे बड़े हिंदी विश्व विद्यालय के उपकुलपति की है और सुशिक्षित रचनाकार स्त्री को भी छिनाल या डायन बताती है.

क्या ये देश जुबान की पहचान कभी नहीं कर पायेगा? क्या मूक जुबान हर कहीं काटी जाती रहेगी? क्या यह देश सिर्फ कायरों, जाहिलों और गाँव या संस्थानों की सत्ता के घिनौने ठेकेदारों के बाप की जायदाद होकर रह गया है?
 
   
 

Himanshu (patrakarhimanshu@gmail.com) नोएडा

 
 वीएन राय के इंटरव्यू को मुद्दा बना कर देश भर में शोर मचाने वाली महिलायें अगर जागेश्वरी के मुद्दे पर भी बहन मायावती से मिलने का साहस कर सकें तो अच्छा लगेगा. वीएन राय ने जो कुछ कहा, न कहा लेकिन उससे कहीं बड़ा मुद्दा जागेश्वरी का है. जसम और वृंदा करात से खास उम्मीद की जानी चाहिये कि वह इस मुद्दे पर भी आवाज़ उठायेगा. 
   
 

अंकिता सेन , बोरिंग कैनाल रोड, पटना 800 013

 
 आखिर हम लोग किस जमाने में जी रहे हैं. एक तरफ तो हम इंदिरा नुई और अरुंधति राय के बारे में बात करते हैं, दूसरी ओर एक औरत की जुबान ही काट दी जाती है. यह दुष्कृत्य भी एक पंचायत करती है.ऐसे में अगर उस पीड़ित महिला के बच्चे अगर आने वाले दिनों में नक्सली बन जायेंगे तो इसके लिये कौन जिम्मेवार होगा ? इसके बाद नितीश कुमार से लेकर चिदंबरम तक शौर मचाने लगेंगे कि नक्सलवाद कानूनी समस्या है. 
   
 

Vikas Kumar (vikas2003@gmail.com) , Noida, UP

 
 आज भी हमारे समाज में यह सब कुछ हो रहा है, यह शर्मनाक है. हम सबको शर्म आनी चाहिये. मायावती जी के राज्य में अब यही देखना बचा रह गया था. 
   
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