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अयोध्या में राम मंदिर निर्माण संभव

मुद्दा

 

अयोध्या में राम मंदिर निर्माण संभव

संदीप पांडेय


अयोध्या विवाद के फैसले को लेकर काफी पहले से हिन्दुत्व साम्प्रदायिक ताकतों ने एक बार फिर से अयोध्या में राम मन्दिर का राग अलापना शुरू कर दिया है.

बाबरी मस्ज़िद


1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस व राम मंदिर निर्माण के मुद्दे ने देश की राजनीति को बहुत नुकसान पहुंचाया है. आम जनता के मुद्दों, जैसे गरीबी, बेरोजगारी, किसानों की समस्या, संसाधनों की कमी, भ्रष्टाचार, आदि को काफी पीछे ढकेल दिया. इस भावनात्मक मुद्दे में लोगों को उलझा कर जन विरोधी आर्थिक नीतियां लागू की गईं, जिसका फायदा पूंजीपति वर्ग व देशी-विदेशी कम्पनियों को हो रहा है किन्तु आम जनता परेशान है.

यह तो गनीमत है कि 2004 में राष्ट्रीय लोतांत्रिक गठबंधन चुनाव हार गया व संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार बनी, नहीं तो हालत और भी खस्ता होती. कम से कम सूचना के अधिकार, राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारण्टी, वन अधिकार व आने वाले खाद्य सुरक्षा अधिनियमों से ऐसा प्रतीत तो होता है कि सरकार आम जनता के मुद्दों के प्रति भी थोड़ा-बहुत सोचती है. वर्ना राष्ट्रीय लोतांत्रिक गठबंधन की सरकार तो शायद हमें राम मंदिर व राम सेतु के अलावा कुछ सोचने ही नहीं देती.

दूसरी तरफ बाबरी मस्जिद ध्वंस के बाद ही इस देश में श्रृंख्लाबद्ध बम धमाके व आतंकवादी कार्यवाइयों को अंजाम दिया जाने लगा. इस लिहाज से बाबरी मस्जिद ध्वंस भारत में आतंकवादी घटनाओं की जननी है. वैसे भी संविधान की रक्षा की शपथ खा कर तत्कालीन मुख्य मंत्री कल्याण सिंह ने लोकतंत्र की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं.

हालांकि बीच में ऐसा भ्रम फैलाया गया था कि इस्लामिक संगठन भारत में आतंकवादी कार्यवाइयों को अंजाम दे रहे थे किन्तु अब जब कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सम्बन्धित अभिनव भारत का नाम मालेगांव, हैदराबाद की मक्का मस्जिद, अजमेर व समझौता एक्सप्रेस जैसे बम कांडों में आ रहा है तो ऐसा प्रतीत होता है कि भारत को इस्लामिक से ज्यादा हिन्दुत्व आतंकवाद ने क्षति पहुंचाई है. शक की बुनियाद पर तमाम मुस्लिम नौजवान जेलों में कैद हैं किन्तु दिन दहाड़े बाबरी मस्जिद गिराने वाला एक भी व्यक्ति जेल में नहीं है. यह विभिन्न सरकारों व शासन-प्रशासन के साम्प्रदायिक चरित्र का भी द्योतक है.

असल में साम्प्रदायिक विचारधारा का लोकतंत्र से कोई तालमेल हो ही नहीं सकता चूंकि यह विचारधारा संकीर्णता की परिचायक है. बल्कि साम्प्रदायिकता की परिणति सिर्फ फासीवादी सोच में ही हो सकती है. यह खुशी की बात है कि जनता ने साम्प्रदायिक विचारधारा को उ.प्र. में नहीं बल्कि पूरे देश में नकारा है. हम उम्मीद करते हैं कि जनता दोबारा साम्प्रदायिक शक्तियों के झांसे में नहीं आएगी. राजनीतिेक उद्देश्य की पूर्ति के लिए धार्मिक भावनाओं का दोहन पूर्णतया अनैतिक है.

देश के नागरिकों को अयोध्या विवाद पर न्यायालय के फैसले का सम्मान करना चाहिए. जो पक्ष फैसले से संतुष्ट नहीं है, वह सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है. किन्तु सड़क पर उतर कर किसी भी किस्म का शक्ति प्रदर्शन या लोगों की धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश असंवैधानिक कार्यवाही होगी.

यदि केन्द्र व राज्य सरकार इनके साथ सख्ती से निपटती है और आम हिन्दू इन्हें अपनी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करने देता है तो देश का महौल शांत बना रहेगा व साम्प्रदायिक सद्भावना सुरक्षित रहेगी.


मंदिर निर्माण को लेकर संघ परिवार से जुड़े संगठनों ने तमाम किस्म की कवायदें शुरु कर दी हैं. अयोध्या के मंदिरों में हनुमान चालीसा के पाठ हो रहे हैं. मोबाइल फोन पर एसएमएस भेजे जा रहे हैं. हिन्दुत्ववादी संगठनों के नेताओं के बयान आ रहे हैं. विश्व हिन्दू परिषद के अध्यक्ष अशोक सिंघल का कहना है कि अयोध्या स्थित कारसेवकपुरम में मंदिर निर्माण हेतु पत्थर तराशे जा रहे हैं. न्यायालय के फैसले से पहले इस किस्म की कार्यवाइयां व बयान तो न्यायालय की अवमानना माने जाने चाहिए व न्यायालय को इनका संज्ञान लेना चाहिए.

देश व अयोध्या की आम जनता के लिए बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि कोई मुद्दा ही नहीं है. यह संघ परिवार ने जबरदस्ती देश के ऊपर थोपा है. अयोध्या के आम लोगों से बातचीत कर पता चलता है कि यहां लोग इस मुद्दे से कितने परेशान हैं. अयोध्या का आम जन-जीवन प्रभावित हुआ है. लगातार सुरक्षा बलों की उपस्थिति से यहां तनाव बना रहता है. जब-तब कर्फ्यू लगने की आशंका अलग रहती है.

विवादित स्थल के राम लला को छोड़ अन्य मंदिरों में दर्शन हेतु आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में गिरावट आई है, जिससे अयोध्या की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है. अयोध्या में बड़ी संख्या में लोगों की आजीविका मंदिरों पर निर्भर है. इनमें चढ़ने वाले फूलों की खेती से लेकर पूजा-पाठ की सामग्री के निमार्ण के काम में लगे तमाम लोग शामिल हैं, जिनमें कुछ मुसलमान परिवार भी हैं.

हम उत्तर प्रदेश सरकार से उम्मीद करते हैं कि जो भी इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश करे उसके साथ सख्ती से पेश आएगी. हम यह खतरा नहीं मोल उठा सकते कि संघ परिवार के लोगों को देश में दंगे भड़काने की छूट दी जाए. देश में धर्मनिरपेक्ष लोग व मुसलमान, जो भी फैसला आएगा उसे मानने को तैयार बैठे हैं. किन्तु संघ परिवार के अचानक सक्रिय होने से ऐसा मालूम पड़ता है कि यदि फैसला इनके अनुकूल न गया तो वे उसे नहीं मानेंगे. यदि केन्द्र व राज्य सरकार इनके साथ सख्ती से निपटती है और आम हिन्दू इन्हें अपनी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ नहीं करने देता है तो देश का महौल शांत बना रहेगा व साम्प्रदायिक सद्भावना सुरक्षित रहेगी.

असल में राम मंदिर निर्माण का मुद्दा संघ परिवार के गले की हड्डी बन गया है. इस मुद्दे का इस्तेमाल भारतीय जनता पार्टी की राजनीति को बढ़ाने के लिए ही किया गया. यदि संघ परिवार का उद्देश्य वाकई में मंदिर निर्माण होता तो वह उस किस्म की राजनीतिक दृढ़ता दिखा सकता था, जैसी मायावती ने दिखाई है, जिन्होंने राज्य की राजधानी में सरकारी जमीन पर, पेड़ काटकर, जनता के धन से, कानून बना कर दलित स्मारकों का निर्माण करा दिया है. परंतु संघ परिवार का उद्देश्य कभी मंदिर निर्माण रहा ही नहीं है. उन्हें तो सिर्फ इस मुद्दे का राजनीतिक दोहन करना है, जो मंदिर बन जाने पर संभव न होगा.

यदि संघ परिवार वाकई में अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण चाहता है तो वह इसे कारसेवकपुरम की भूमि पर क्यों नहीं बना लेता? क्या जरुरी है कि मंदिर विवादित स्थल पर ही बने? विश्व हिन्दू परिषद के स्वामित्व वाली जमीन पर राम मंदिर बना कर इस विवाद को भी हमेशा-हमेशा के लिए विराम दिया जा सकता है.

 

20.09.2010,00.03 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

anurag jha (anurag) bihar

 
 तेरा राम जी करेंगे बेड़ा पार, उदासे मन काहे को डरे. 
   
 

Beena (beenapandey927@gmail.com) Lko

 
 क्यों हर कोई सिर्फ अपनी बात मनवाने पर तुला हुआ है? माना कि हम लोकतंत्र में जी रहे हैं, लेकिन हमारे यहाँ संविधान नाम की भी कोई चीज़ है. अयोध्या मुद्दे पर हम सभी ने बरसों इंतजार किया है, थोड़ा से धैर्य की और आवश्यकता है. जो मामला कोर्ट में है, उस पर किसी भी तरह की बेवजह की टीका-टिप्पणी उचित नहीं. जो भी कहना-सुनना है वो फैसले के बाद ही की जाये तो ही ठीक है. कहते हैं न " घरी गई थोड़ी रही अरे वो भी बीती जाय". 
   
 

parshuram mahadev () mumbai

 
 पहले बाबर से पूछ के आओ कि उसने राम मंदिर क्यों तोडा और कितने हिन्दुओं का खून बहाया फिर ये लेख लिखना. बंधुवर, तुम्हें कितने धनराशी मिली ये लेख हिन्दुओं के अगेंस्ट में लिखने को. देश में आज सब कुछ बिक गया है. समाचार देने वाला और लिखने वाला, टीवी चैनल सब बिक गए हैं. कोई बात नहीं. याद रहे अति का हमेशा ही अंत होता है. पाप का घड़ा एक दिन जरूर फूटता है. सत्यमेव जयते, हर-हर महादेव, जय श्री राम बनाये बिगड़े सब काम. 
   
 

Sainny Ashesh (sainny.ashesh@gmail.com)

 
 बुजुर्गों ने सच कहा है : "अपनी गली में कुत्ता शेर !" इस से क्या फर्क पड़ता है कि राम या अल्लाह के नाम पर वह हिन्दुस्तान में भौंकता है या पकिस्तान में? 
   
 

PRAMOD INDIA

 
 राम मंदिर तो बनेगा. भारत में मंदिर नहीं बनेगा तो क्या पाकिस्तान में बनेगा. राम मंदिर वही बनेगा. वरना. हम कुछ बनने ही नहीं देगे. मंदिर के अलावा.  
   
 

VIRENDRA SINGH CHOUHN (SINGHVIRU@GMAIL.COM) MP MANDSOUR

 
 राम की कसम, राम मंदिर बनेगा, चाहे कुछ भी हो जाये. 
   
 

Ram Prasad Singh (hindusamvad@rediffmail.com) VARANASI

 
 मिस्‍टर संदीप पाण्‍डेय, क्‍या आप इन इस्‍लामिक जिहादी मानसिकता के लोगों की गारन्‍टी लेते है क्‍या कि सौ करोड् हिन्‍दुओं के आस्‍था केन्‍द्र श्रीराम की जन्‍मस्‍थली पर एक आक्रमणकारी लुटेरे और म्‍लेच्‍छ के नाम पर फिर गुम्‍बद बनने दिया जाय तो उसके बाद भारत में किसी प्रकार की इस्‍लामिक आतंकवादी घटनायें नही होगी.

मैं आपको सलाह देता हूं कि दुनिया में इनके द्वारा किये जा रहे मार-काट दंगा-फसाद पर भी गौर करें तभी आप इनकी चरित्र के बारे में समझ पायेंगे. मैं नही समझता कि जिस देश में ये मुगल हमलावर हजारों वर्षो तक मठमन्दिरों को नष्‍ट कर लूटपाट, हत्‍यायें और बलात्‍कार करते रहे अब एक मन्दिर दे देने से मुस्लिम शान्‍त हो जायेंगे. धर्मान्‍धता की आंधी में बढते रहना ही इनका एक मिशन है.
 
   
 

raja (raj1stlove@gmail.com) gopeshwar

 
 आप ने जो लिखा है वो बात एक हद तक ठीक लगती है, किन्तु ये समझना जरुरी है कि मुदा क्या है. मुद्दा मंदिर या मस्जिद का नहीं है, मुद्दा तुष्टिकरण का है और इस बात के लिए तो हर सरकार चाहे वो बीजेपी हो या कांग्रेस दोनों अपने-अपने तरीके से काम करती हैं. तो इस परिस्थिति में तो लगता है कि कोई अन्य राजनीतिक विकल्प भारत की जनता के सामने लाया जाये. लेकिन क्या आपके अनुसार है कोई विकल्प? है तो जनता को उस विकल्प के बारे में बतायें. 
   
 

Amit

 
 You r thinking that by writing anything to insult the majority people of country u will become secular ? u can't see it is always non-Hindu person who r dividing country and Hinduism is only force binding India it is because of traitors of your kind that India is not emerging as strong it could be in both internal and external matters. 
   
 

Sainny Ashesh (sainny.ashesh@gmail.com)

 
 गीता में कहीं भी किसी संगठित धर्म की वकालत नहीं की गई है. 'सवा-धर्म' अर्थात व्यक्ति-व्यक्ति के निजता के भाव में रहते जीने-मरने की बात है.

भगवत गीता का अर्थ है ईश्वर का गीत. विक्षिप्त या गुमराह भीड़ की 'हुआ-हुआ' नहीं. गीता और महाभारत का दर्शन कब्ज़ा करने की निरर्थकता को दर्शाता है और सिर्फ मनुष्य की चेतना के विकास की राह दिखाता है.

भगवत गीता किसी भी किस्म के संगठित कायरों के लिए नहीं है, मनुष्यों के लिए है, जो अपने धर्म यानि स्वभाव के अनुसार जीते-मरते हैं, भीड़ की आदतों से नहीं. इसीलिये गीता में किसी भी संगठित धर्म का नाम नहीं मिलेगा. जय कृष्ण.
 
   
 

kiran (kiran@gmail.com) rudrapur

 
 सच में ये किसी ब्राह्मण के शब्द हैं या किसी और के .अगर सच में ब्राह्मण के हैं तो मुझे शर्म आती है आप को ब्राह्मण कहते हुए. आप जैसे कायार लोग ही देश की संस्कृति की रक्षा नहीं कर सकते. मैं मानती हूँ हिन्दू मुस्लिम भाई-भाई हैं. इस बात में कोई दो राय नहीं कि जो कुछ भी वहां बने लेकिन आम जनता या कोई बेकुसूर उस से अफेक्टेड ना हो ... लेकिन राम हमारे प्रभु उन की जन्मस्थली को किसी और के हाथ में कैसे जाने दें. मेरी माने तो एक तरह मंदिर दूसरी तरफ मस्ज़िद बनवा दो क्योंकि आम जनता को हिन्दू-मुस्लिम से लेना देना नहीं. लेकिन मानवता की रक्षा होनी चाहिए. अब हिन्दू का जागने का वक़्त आ गया है वरना कभी अंग्रेज तो कभी मुसलमान हम पर हुकूमत करते रहेंगे. हम हमेशा गुलाम ही रह जायेंगे. मुस्लिम को परेशान मत करो, उनका भी हक है लेकिन ये जमीन हिन्दू की है. इस पर उनकी हुकूमत रहेगी. मुस्लिम मेहमान बन के आये हैं, मेहमान बन के हिंदुस्तान में रहें तो बढ़िया होगा. 
   
 

Tamal Das Mumbai

 
 Paid media and congress paying much attention over the Ayodhya issue because it want to divert the attention of the people from the issues like corruption and inefficiency of the UPA government.  
   
 

Aacharya Parmeshwar Dausa

 
 Dear Pandey ji, I am much surprised that still some people claim to be an Hindustani even after vomiting such poisonous words against Hindus. Now I am able to learn that why Hindus are not so powerful because of such Vibhishans. I would like you to read and learn Bhagvad Geeta. Thank you. 
   
 

Mohit (mohitSri94@gmail.com) Meerut

 
 एक रास्ता और है कि जो भी बने, राम के नाम पर बने, चाहे वो मस्ज़िद हो या मंदिर या कुछ और. राम तो सबके हैं. 
   
 

Ashok Kumar (ajaychemistry@gmail.com) Delhi

 
 पांडेय जी, आप जैसे लोगों की वजह से ही यहां बाबर ने हिम्मत करके बाबरी मस्जि़द बनाई थी. सारी दुनिया जानती है कि केवल हिंदू धर्म को नीचा दिखाने के लिये यहां मस्ज़िद बनी थी. वैसे भी जो चीज बाबरी (पागल) हो जाती है, उसको तो मरना ही पड़ता है. कुछ भी हो जाये, राम मंदिर तो वहीं बनेगा. 
   
 

anukul kanpur

 
 So many pseudo-seculars in this country are earning their livelihood precisely by this type of anti Hindu articles/songs. This will not last for long.For example our Muslim brothers are also started voting for so called communal Mr. Narendra Modi(Kathlal assembly constituency in Gujarat). 
   
 

Sainny Ashesh (sainny.ashesh@gmail.com)

 
 एक ख़ास निकृष्ट किस्म के लोग हर कहीं मौजूद हैं. उन्हें कहीं से कुछ नहीं सीखना है. ये लोग अपने-अपने गिरोह के बंधुआ हैं. यहाँ तक कि उनके अपने भीतर अगर कुछ सुन्दर और सार्थक विचार उठता है तो वे उसे अपने गिरोह के खूंखार विचार के सामने बहुत हानिकारक पाते हैं.
जो लोग सचमुच मुर्दा होकर नहीं जीना चाहते, उन्हें इन लोगों को इनके हाल पर छोड़ देना होगा. हाँ, इस से पहले अपनी एक विवेकशील और जीवंत दुनिया अलग से रचने की ईमानदार तैयारी अपरिहार्य है. मरना सबको है, लेकिन गीदड़ों की मौत सिर्फ भीड़ के लोग मरते आये हैं. जब तक ये मौजूद हैं, इन मुर्दों में सिर्फ एक भीड़ से आई हुयी घटिया ज़िन्दगी मुर्दा साँसें ले रही है.
अब बहुत हुआ. फैसले कुछ भी आते रहें, जब तक संगठित गीदड़ मौजूद हैं, कभी भी नयी किस्म की 'हुआ-हुआ' शुरू हो जायेगी. एक पक्के इलाज की दरकार है, वर्ना हर समझ-बूझ वाला शख्स लाचार है. हर व्यक्ति, अगर वह सचमुच इन लोगों से परेशान है, तो उसे सबसे पहले अपना उपाय स्वयं करना आना चाहिए. अगर उपाय नहीं आता तो ज़िन्दगी के नाम पर बुरी मौत जीने और उसी में मर जाने को तैयार रहिये.
 
   
 

Vivek (kumarvivek07@gmail.com) Rajasthan

 
 यह विवाद विराम देने के लिए पैदा नहीं किया गया, यदि मान लीजिये यहाँ राम मंदिर बन भी गया तो फिर ये लोग क्या करेंगे? इन्हें आम जनता के दुःख दर्द से तो दूर-दूर तक कोई लेना देना है नहीं. कोई हिन्दू मर रहा है मरे, मुस्लिम मरे तो मरे, सच पूछो तो कोई भी इन्सान मरे तो मरे, इनकी गिद्द दृष्टी केवल अपने वोट या अपने फायदे पर होती है. कोई भी राजनीतिक पार्टी इस चीज से अछूती नहीं है.

बाबरी मस्जिद तोड़ने वालों ( जो भी वयक्ति अपने विवेक के तराजू पर तोले बिना कोई भी काम करता है तो उसमे और भेड़ में कोई अंतर, कमसे कम मेरी नज़र में तो नहीं है) भेड़ों को सजा मिल भी गयी तो क्या ? इन भेड़ों के पीछे छुपी gndwani की रथयात्रा का, लोकतंत्र की किसी प्रयोगSALA ने कुछ उखाड़ लिया क्या जो अब नया होगा? लोकतंत्र की डुगडुगी इन्ही भेड़ों के लिए है जो किसी भी बगुले के पीछे सर नीचा किये चल देती हैं |

दर असल इस भेडपन की मात्र हर एक इन्सान में कमोबेस पाई जाती है और जब आस्था का प्रश्न हो तो कुछ ज्यादा ही | कुछ प्रकार के रेवड़ (संप्रदाय) तो इतने कट्टर होते है की वह अपने ग्वाले के लिए कोई बात सुनने के लिए तयार ही नहीं भले ग्वाला उन्हें एक एक कर कटवाए या उनके जीने के मुलभुत अधिकार ही छीन ले | ऐसी इस्थिति में जो है जैसा है उसे अपने रास्ते जाने दें और अपने काम से काम रखने के अलावा हमारे पास कोई रास्ता बचा है क्या ?
 
   
 

shirish aphale (snaphale@gmail.com) Pune

 
 राम मंदिर तो बनेगी, चाहे कुछ भी हो जाये. 
   
 

Zafar Alam khan (zafar.pioneer.bhopal@gmail.com) Bhopal

 
 Pandey Ji, hat's off to u for the so daring article with lot many facts that needs to be brought in public. I believes that neither terrorists do not have any religion nor they have any colour. they are only terrorists - enemies of humanity and should strongly be dealt with without considering their religion, only than we could move on the path of development and prosperity. 
   
 

Lucky Saggi () Chandigarh

 
 How much amount you got from Congress and Muslim league for publish this type of anti-hindu news???  
   
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