| | राम के साथ अब गाँधी की शामत आ गई है ! आजकल भाजपा यह प्रचार कर रही है कि राम मंदिर बन जाने से महात्मा गाँधी का सपना पूरा होगा, क्योंकि वे अंतिम सांस तक राम का नाम लेते रहे. 2 अक्टूबर को नरेन्द्र मोदी द्वारा इस बात की बाकायदा घोषणा भी की गई. दर-असल अब इन लोगों के पास एक उसी आदमी के नाम का आसरा रह गया है, जो शुरू से ही इनकी आँखों का काँटा था. आज गाँधी जी इनकी पोल खोलने के लिए मौजूद न सही, मगर उनकी किताबें मौजूद हैं.
गाँधी जी ने लिखा है : "मेरा राम, हमारी प्रार्थना का राम वह राम नहीं है, जो दशरथ का पुत्र और अयोध्या का राजा था. मेरा राम सदा से है और सदा रहेगा, क्योंकि मैं सत्य को ही राम या इश्वर मानता हूँ. मैं इसीलिए कभी मंदिरों में नहीं जाता." | |