स्वयंवर में चुने गए राम
स्वयंवर में चुने गए
'राम'
नीरज
दुर्ग,
छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के एक छोटे से गांव में मंगलवार को आदिवासी युवती अन्नपूर्णा ने एक
स्वयंवर में अपने पति का चुनाव करके पुरानी परंपराओं को एक बार फिर से ताज़ा कर दिया.
इस स्वयंवर में कोई धनुष तो नहीं तोड़ा गया लेकिन यहां अन्नपूर्णा के धार्मिक सवालों
का जवाब देना था और आठवीं पास अन्नपूर्णा के सवाल का सही जवाब देकर बारहवीं पास
घनाराम भुरकुरिया स्वयंवर के विजेता बने.
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घनाराम ने अन्नपूर्णा के सवाल
का जवाब दिया और इस आधुनिक स्वयंवर के विजेता बने. |
यह अपनी तरह का अनूठा आयोजन था. हजारों लोगों की भीड़ छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले
के छोटे से गांव घुमका में उमड़ी हुई थी. भीड़ में शामिल हर कोई इस समय का
साक्षी बनना चाहता था.
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स्वयंवर
आखिर इस ‘कलयुग’ में स्वयंवर रचाया जा रहा था, जिसके बारे में लोगों ने अब तक केवल
धार्मिक ग्रंथों या पुराने किस्सों में ही सुना-पढ़ा था.
तैयारी
इस स्वयंवर की तैयारी पिछले महीने से चल रही थी. गांव-गांव में पम्पलेट चिपकाए गए
थे, लाउडस्पीकर से सूचना दी जा रही थी.
22 साल की अन्नपूर्णा ने अपने स्वयंवर के लिए शर्त रखी थी कि कि युवक आदिवासी हल्बा
समाज का हो और उसकी उम्र 22 से 26 वर्ष के बीच हो. इसके अलावा इस इलाके के धमतरी,
लोहारा, गुरुर, बालोद और गुंडरदेही तहसील के युवक ही इस स्वयंवर में भाग ले सकते
थे. स्वयंवर की महत्वपूर्ण शर्त थी अन्नपूर्णा के पांच सवालों के जवाब.
इस स्वयंवर को लेकर आदिवासी हल्बा समाज शुरु में तो नाराज था लेकिन जैसे-जैसे
स्वयंवर की तैयारी ने जोड़ पकड़ना शुरु किया, समाज के लोग साथ होते गए. स्वयंवर से
पहले 4 दिन तक यज्ञ चला. हालांकि ग्राम पंचायत ने भी इस आयोजन के बहिष्कार का
निर्णय लिया था. हल्बा समाज तो इसके विरोध में था ही. ये और बात है कि युवा हल्बा
प्रकोष्ठ से जुड़े युवक इस मुद्दे पर रामरतन ठाकुर और अन्नपूर्णा के साथ थे.
स्वयंवर रचाने वाली अन्नपूर्णा के पिता रामरतन ठाकुर भृत्य के पद पर कार्यरत हैं.
रामरतन कहते हैं- “ समाज के विरोध के बाद भी हमने स्वयंवर की तैयारी की क्योंकि हमें
उम्मीद थी कि इस धार्मिक आयोजन में ईश्वर की कृपा से सभी लोग साथ देंगे और ऐसा ही
हुआ.”
और ये रहा सवाल
मंगलवार को जब स्वयंवर होना था, तब तक 6 युवकों ने अपनी दावेदारी पेश की थी लेकिन
नियत समय पर मंच पर केवल पड़ोसी गांव रानाखुज्जी के घनाराम ही पंहुचे थे.
अन्नपूर्णा और उनके साथ मंच पर खड़े 5 पंडितों ने जब घनाराम से सवाल पूछा-“ क्षिति
जल पावक गगन समीरा, पंच तत्व से अधम शरीरा ” तो भीड़ सवाल का जवाब सुनने के लिए
बेकाबू हो गई. हालत ये हुई कि व्यवस्था को बनाए रखने के लिए तैनात पुलिस को हल्का
बल प्रयोग करने पड़ा.
बहरहाल 13 साल पहले हरिद्वार के एक धार्मिक गुरु की संगति लेने वाले घनाराम ने जवाब
दिया और स्वयंवर के विजेता घोषित कर दिए गए.
घनाराम के पिता ने हालांकि विवाह की तारीख घोषित नहीं की लेकिन उन्होंने उम्मीद
जताई कि जल्दी ही विवाह की रस्म अदा कर दी जाएगी.
इस स्वयंवर से अन्नपूर्णा भी खुश हैं. रामचरित मानस में अगाध श्रद्धा रखने वाली
अन्नपूर्णा अपने पिता को ही अपना गुरु मानती हैं.
वे कहती हैं- “ मैंने जैसा पति चाहा था, मुझे वैसा ही पति मिला. मेरी इच्छा थी कि
जब पुराने जमाने में लड़की स्वयंवर रचा सकती थी तो अब क्यों नहीं ?”
किसानी के अलावा गिट्टी का कारोबार करने वाले स्वयंवर विजेता घनाराम कहते हैं-“
समाज के कुछ लोग इस स्वयंवर के खिलाफ थे लेकिन मुझे लगा कि क्यों नहीं अपनी किस्मत
आजमाई जाए. इसलिए मैं इस स्वयंवर में शामिल हुआ.”
लेकिन समाज का विरोध फिर हुआ तो ?
घनाराम का जवाब था- “ चाहे कोई विरोध करे अब अन्नपूर्णा मेरी है और जैसे भी होगा हम
साथ-साथ रहेंगे.”
लोगों की नजर अब इस बात पर लगी है कि समाज के विरोध के बाद भी इस स्वयंवर के वर बने
‘राम’ अपनी ‘सीता’ का किस तरह साथ निभाते हैं.
08.07.2008,
20.42 (GMT+05:30) पर प्रकाशित