पहला पन्ना प्रतिक्रिया   Font Download   हमसे जुड़ें RSS Contact
larger
smaller
reset

इस अंक में

 

लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

हमारी चिंतना

ममता बनर्जी के नाम एक खुला पत्र

कमजोर सरकार और गैरजिम्मेवार पत्रकारिता

अमन की असली दुआ

बाबा बनाते चैनल

राज्य का कन्या ‘दान’

लहू का सुराग़

मध्य-पूर्व में अमरीकी हांका

कम से कम एक दरवाज़ा

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

चिकनी चमेली से डरता कौन है ?

सबको खारिज करने का अधिकार

ये कहां आ गये हम

यह सबके लिये चेतावनी है

 
  पहला पन्ना >साहित्य >बात Print | Share This  

चेक-5-कथा यूके

लंदन. 19 अप्रैल 2010


इस साल का अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान कहानीकार और नाटककार-रंगचि‍न्‍तक हृषीकेश सुलभ को पिछले साल प्रकाशित उनके कहानी संग्रह वसंत के हत्यारे पर देने का निर्णय लिया गया है. कथा यूके के महासचिव एवं कथाकार तेजेन्द्र शर्मा के अनुसार यह सम्मान हृषीकेश सुलभ को लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में 8 जुलाई को प्रदान किया जायेगा.
हृषीकेश सुलभ

अब तक यह सम्मान चित्रा मुद्गल, संजीव, ज्ञान चतुर्वेदी, एस आर हरनोट, विभूति नारायण राय, प्रमोद कुमार तिवारी, असग़र वजाहत, महुआ माजी, नासिरा शर्मा और भगवान दास मोरवाल को प्रदान किया जा चुका है.

15 फ़रवरी 1955 को बिहार के सि‍वान जि‍ले के लहेजी गाँव में जनमे कथाकार, नाटककार, रंग-चि‍न्‍तक हृषीकेश सुलभ की विगत तीन दशकों से कथा-लेखन, नाट्‌य-लेखन, रंगकर्म के साथ-साथ सांस्कृतिक आन्दोलनों में सक्रिय भागीदारी रही है. इनके कहानी संग्रह ‘बसंत के हत्‍यारे’, ‘तूती की आवाज़’, ‘बँधा है काल’, ‘वधस्थल से छलाँग’ और ‘पत्थरकट’ प्रकाशित हैं. रंगचि‍न्‍तन की पुस्‍तक ‘रंगमंच का जनतंत्र’ के अलावा तीन मौलि‍क नाटक ‘अमली’, ‘बटोही’ और ‘धरती आबा’ तथा संस्‍कृत नाटक मृच्‍छकटि‍क की पुनर्रचना ‘माटीगाड़ी’ और रेणु के उपन्‍यास ‘मैला आंचल’ का नाटयान्‍तर प्रका‍शि‍त हैं.

ज्ञात रहे कि इससे पहले श्री सुलभ को अब तक कथा लेखन के लिए बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान, नाट्‌यलेखन और नाट्‌यालोचना के लिए डा. सिद्धनाथ कुमार स्मृति सम्मान मिल चुके हैं.

वर्ष 2010 के लिए पद्मानन्द साहित्य सम्मान इस बार संयुक्‍त रूप से श्री महेन्‍द्र दवेसर ‘दीपक’ को उनके कहानी संग्रह अपनी अपनी आग के लिए और श्रीमती कादम्‍बरी मेहरा को उनके कहानी संग्रह पथ के फूल के लिए दिया जा रहा है. दिल्‍ली में 1929 में जन्‍मे श्री महेन्‍द्र दवेसर ‘दीपक’ के इससे पहले दो कहानी संग्रह पहले कहा होता और बुझे दीये की आरती प्रकाशित हो चुके हैं. दिल्ली में जन्‍मी श्रीमती कादम्‍बरी मेहरा अंग्रेज़ी में एमए हैं और उन्‍हें वेबज़ीन एक्सेलनेट द्वारा साहित्य सम्मान मिल चुका है. इससे पहले उनका एक कहानी संग्रह कुछ जग की प्रकाशित हो चुका है.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

brij kishor kushwaha advocate [brij1977kush@gmail.com] safipur unnao - 2011-08-17 15:50:23

 
  श्रीमान जी, मुझे लगता है कि अन्ना हजारे जी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो आंदोलन चलाया है, उसमें हम देश वासियों को बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेना चाहिये. 
   
 

durwesh [vichar2000@gmail.com] bhopal - 2011-05-24 09:41:48

 
  रघु जी,
लोकतंत्र से भ्रष्टतंत्र तक एक सफर में, लोकतंत्र का सतयुग और त्रेता युग काल कब का समाप्त हो गया. सच बोलू तो इस में कभी सत युग या त्रेता युग जैसा कुछ था ही नहीं. हम सीधे कलयुग में प्रवेश कर गये थे. सबकी निष्ठा भ्रष्ट के साथ है. क्योंकी इसने हमें पावर रुतबा पैसा दिया. इसका नशा व्ल्लाह क्या कहने. देखा नही आपने किस शान से जनाब जेल जा रहे थे. क्या आपको किसी भी चेहरे पर शर्म दिखाई दी. क्योंकि इन्हें मालूम है कि इनकी सत्ता कायम रहेगी.
रघु जी जागिये, आप भी गंगा में डुबकी लगाइये और हर हर गंगे बोलिये. या फिर ......शायद बहुत देर हो गई है.
 
   
 

Sainny Ashesh [] http://snowaborno.blogspot.com -

 
  इस देश के बहुसंख्यक वर्ग की सबसे प्रिय आरती है : \"सुख संपत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का; ॐ जय जगदीश हरे!\\\"
भ्रष्टाचार और अपना घर भरने की कला इस देश की जान से प्यारी बीमारी है. कोढ़!
इस देश का भ्रष्ट समाज यदि अपनी मूर्खताओं के कारण बुरी तरह अपने ही @##$ भगवान को प्यारा हो जाए तो क्या आश्चर्य? बला टले.
ॐ जय जगदीश हरे!
 
   
 

अतुल श्रीवास्‍तव [aattuullss@gmail.com] राजनांदगांव -

 
  रघु ठाकुर जी, मैं आपकी बातों से सहमत हूं पर क्‍या इन बातों का उन लोगों पर असर होगा जो राजनीति या फिर अफसरशाही में उच्‍च शिखर पर हैं। छत्‍तीसगढ की बात करूं तो लगभग हर सप्‍ताह इस प्रदेश का कोई न कोई अफसर करोडों का आसामी होकर एंटी करप्‍शन ब्‍यूरो की फाईलों में दर्ज हो रहा है। आपने एक का जिक्र किया, बाबूलाल अग्रवाल, उनका क्‍या हुआ। उनके अलावा जितने भी अफसरों के घर छापे पडे, करोडों का माल मिला, अखबारों में एक दिन खबरें आईं और उसके बाद उनका क्‍या हुआ, किसी को नहीं मालूम। मामला फाईलों में ही दब कर रह गया। मुझे गर्व है कि मैं छत्‍तीसगढ के संस्‍कारधानी कहे जाने वाले राजनांदगांव का निवासी हूं लेकिन शर्म भी आती है कि मेरा एक जनप्रतिनिधि एक टीवी चैनल में \'दुर्योधन\' बन गया था। उसका क्‍या हुआ, वो तो भला हो सोमनाथ दादा का जिन्‍होंने ऐसे दुर्योधनों को संसद से बाहर कर दिया, पार्टी ने भी निकाल दिया और बाद में फिर शामिल कर लिए गए पार्टी में। पद भी मिल गया। अब तो ये दुर्योधन पूर्व सांसदों की समिति के राष्‍ट्रीय सचिव बन गए हैं। पहली लाईन तो अभी याद नहीं आ रही पर दूसरी जरूर यहां कहूंगा कि .... हर शाख पर उल्‍लू बैठा है अंजाम ए गुलिस्‍ता क्‍या होगा? 
   
 

prerna Arora [prerna.istarishakti@gmail.com] Delhi -

 
  भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाना है तो जनता को ही आगे आना होगा. आपके विचारों से हम सहमत हैं. 
   
सभी प्रतिक्रियाएँ पढ़ें

इस समाचार / लेख पर अपनी प्रतिक्रिया हमें प्रेषित करें

  ई-मेल ई-मेल अन्य विजिटर्स को दिखाई दे । ना दिखाई दे ।
  नाम       स्थान   
  प्रतिक्रिया
    Please type The Number in the Box
   


 
  ▪ हमारे बारे में   ▪ विज्ञापन   |  ▪ उपयोग की शर्तें
2009-10 Raviwar Media Pvt. Ltd., INDIA. feedback@raviwar.com  Powered by Medialab.co.in