चेक-5-कथा यूके
लंदन. 19 अप्रैल 2010
इस साल का अंतर्राष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान कहानीकार और नाटककार-रंगचिन्तक
हृषीकेश सुलभ को पिछले साल प्रकाशित उनके कहानी संग्रह वसंत के
हत्यारे पर देने का निर्णय लिया गया है. कथा यूके के महासचिव एवं कथाकार
तेजेन्द्र शर्मा के अनुसार यह सम्मान हृषीकेश सुलभ को लंदन के हाउस ऑफ कॉमन्स में 8
जुलाई को प्रदान किया जायेगा.
अब तक यह सम्मान चित्रा मुद्गल, संजीव, ज्ञान चतुर्वेदी, एस आर हरनोट, विभूति
नारायण राय, प्रमोद कुमार तिवारी, असग़र वजाहत, महुआ माजी, नासिरा शर्मा और भगवान
दास मोरवाल को प्रदान किया जा चुका है.
15 फ़रवरी 1955 को बिहार के सिवान जिले के लहेजी गाँव में जनमे कथाकार, नाटककार,
रंग-चिन्तक हृषीकेश सुलभ की विगत तीन दशकों से कथा-लेखन, नाट्य-लेखन, रंगकर्म के
साथ-साथ सांस्कृतिक आन्दोलनों में सक्रिय भागीदारी रही है. इनके कहानी संग्रह ‘बसंत
के हत्यारे’, ‘तूती की आवाज़’, ‘बँधा है काल’, ‘वधस्थल से छलाँग’ और ‘पत्थरकट’
प्रकाशित हैं. रंगचिन्तन की पुस्तक ‘रंगमंच का जनतंत्र’ के अलावा तीन मौलिक
नाटक ‘अमली’, ‘बटोही’ और ‘धरती आबा’ तथा संस्कृत नाटक मृच्छकटिक की पुनर्रचना
‘माटीगाड़ी’ और रेणु के उपन्यास ‘मैला आंचल’ का नाटयान्तर प्रकाशित हैं.
ज्ञात रहे कि इससे पहले श्री सुलभ को अब तक कथा लेखन के लिए बनारसी प्रसाद भोजपुरी
सम्मान, नाट्यलेखन और नाट्यालोचना के लिए डा. सिद्धनाथ कुमार स्मृति सम्मान मिल
चुके हैं.
वर्ष 2010 के लिए पद्मानन्द साहित्य सम्मान इस बार संयुक्त रूप से श्री महेन्द्र
दवेसर ‘दीपक’ को उनके कहानी संग्रह अपनी अपनी आग के लिए और श्रीमती कादम्बरी मेहरा
को उनके कहानी संग्रह पथ के फूल के लिए दिया जा रहा है. दिल्ली में 1929 में
जन्मे श्री महेन्द्र दवेसर ‘दीपक’ के इससे पहले दो कहानी संग्रह पहले कहा होता और
बुझे दीये की आरती प्रकाशित हो चुके हैं. दिल्ली में जन्मी श्रीमती कादम्बरी
मेहरा अंग्रेज़ी में एमए हैं और उन्हें वेबज़ीन एक्सेलनेट द्वारा साहित्य सम्मान
मिल चुका है. इससे पहले उनका एक कहानी संग्रह कुछ जग की प्रकाशित हो चुका है.