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लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

हमारी चिंतना

ममता बनर्जी के नाम एक खुला पत्र

कमजोर सरकार और गैरजिम्मेवार पत्रकारिता

अमन की असली दुआ

बाबा बनाते चैनल

राज्य का कन्या ‘दान’

लहू का सुराग़

मध्य-पूर्व में अमरीकी हांका

कम से कम एक दरवाज़ा

सुनामी की लहरों में श्रीलंका की खेती

लेकिन असली नायक कहां हैं?

बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

चिकनी चमेली से डरता कौन है ?

सबको खारिज करने का अधिकार

ये कहां आ गये हम

यह सबके लिये चेतावनी है

 
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जनसंघर्ष की दिशा की तलाश

वर्ल्ड सोशल फोरम | अफ्रीका का यथार्थ-3

 

जनसंघर्ष की दिशा की तलाश

सचिन जैन सेनेगल से लौटकर


विश्व समाज मंच की शुरुआत उस एक संभावना के साथ हुई थी जिसमें यह माना गया था कि मौजूदा आर्थिक विकास की पूंजीवादी नीतियों से बनने वाला समाज एक समतामूलक और शोषण मुक्त समाज नहीं होगा, इसलिए हमें एक नई दुनिया के निर्माण का सपना देखना होगा. हमारे मन में यह विश्वास होना चाहिये कि इस सपने को पूरा किया जा सकेगा और हम अपने इस सपने को पूरा करने के मामले में किस दिशा में बढ़ रहे हैं, इसकी जांच पड़ताल करने और समीक्षा करने के किये हम हर साल एक मंच पर इकट्ठा होंगे.

विश्व-समाज-मंच

सेनेगल में आयोजित हुआ विश्व समाज मंच का आयोजन दो मायनों में महत्वपूर्ण है- एक कि यह अफ्रीका की धरती पर आयोजित हुआ और दूसरा इसने यह बताया कि संघर्षशील समुदायों और समूहों को यह विश्लेषण करना होगा कि राजनैतिक व्यवस्था में बदलाव के लिये हमारा संघर्ष साझा कैसे होगा. आयोजन की व्यवस्थाओं के नज़रिए से बहुत कुछ गड़बड़ था, परन्तु मध्यपूर्व और अफ्रीकी दुनिया के सवालों को एक साथ जानने-समझने का बेहतरीन अवसर भी था.

जहाँ एक तरफ ठीक उन्हीं दिनों में मिस्र में तानाशाही से मुक्ति और लोकतंत्र की बहाली के लिए लाखों लोग सड़क पर जुटे हुए थे तो वहीँ दूसरी ओर मिस्र के करीब ही पचास हज़ार लोग दुनिया में लोकतंत्र और खुशहाली के रास्तों को खोज रहे थे.

यह एक सुखद अनुभव था, जब हमने यह देखा कि हर पल लोगों में यह जाने की उत्सुकता थी कि हुस्ने मुबारक ने सत्ता छोड़ी या नहीं, इस पर बहसें थीं और चर्चाएँ भी. विश्व समाज मंच में करीब 1000 लोग ऐसे थे, जो बर्मा, कांगो जैसे देशों में राजनैतिक संघर्ष की प्रक्रिया में अपनी ही धरती से बेदखल कर दिए गये, वे अब फ्रांस, दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में राजनैतिक शरण लिए हुए हैं.

मिस्र के जन संघर्ष के मामले में डाकार में एक बड़ी रैली हुई और वहाँ के मिस्र दूतावास पर प्रदर्शन भी हुआ. इन्हीं दिनों में ट्यूनीशिय, अल्जीरिया, यमन, इरान, लीबिया सहित कई देशों में इसी तरह का राजनैतिक माहौल बनने लगा. दुनिया भर के समूह यह मान रहे थे कि हमें इन जनतंत्र के लिये जन संघर्षों के साथ खड़े होना चाहिए.

इस श्रृंखला की दूसरी रिपोर्ट पढ़ें...

अफ्रीका और यूरोप के हर अखबार में 10 दिनों तक सबसे ज्यादा जगह मिस्र और दूसरे राज्यों में हो रही हलचल को मिल रहा था क्योंकि इनसे इन देशों के हित जुड़े हुये हैं. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मध्यपूर्व और अफ्रीका का राजनैतिक माहौल क्या है. डकार के मंच में इस बार अंतर्राष्ट्रीय पलायन, देशों के राजनैतिक चरित्र और लोकतंत्र, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की लूट जैसे मुद्दों पर केन्द्रित था.

फरवरी के पहले हफ्ते में ये कार्यकर्ता यहां दुनिया भर से वर्ल्ड सोशल फोरम में हिस्सा लेने पहुंचे थे. वर्ष 2001 में ब्राजील के पोर्टो एलीग्रे से शुरू हुई सालाना बैठक का यह सिलसिला हर वर्ष बदस्तूर जारी है. एक नई और बेहतर दुनिया रचने के लिए वर्ल्ड सोशल फोरम दुनिया भर के कार्यकर्ताओं को अपने प्रस्तावों और सामूहिक गतिविधियों को साझा करने का मंच प्रदान करता है.

पहली बार वर्ल्ड सोशल फोरम की बैठक दावोस, स्विट्जरलैंड में आयोजित विश्व आर्थिक मंच के सम्मेलन के जवाब में बुलाई गई थी. मानवीय जरूरतों के मुकाबले कारपोरेट लालच की बढ़ती दखल के बीच वर्ल्ड सोशल फोरम ने यह प्रस्ताव रखने का साहस दिखाया कि वास्तव में एक और दुनिया का सृजन संभव है. और आज वर्ल्ड सोशल फोरम को एक दशक हो गया है, नवउदारवादी पूंजीवाद तथा सैन्य साम्राज्यवाद के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे सामाजिक आंदोलनों को एक जुट करते हुए तथा मानवता को समर्पित व सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध दुनिया की रचना का प्रयास करते हुए.

ब्राजील, भारत, केन्या और अब सेनेगल में हुई वैश्विक बैठकों की कड़ी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि न केवल स्थानीय, राष्ट्रीय व क्षेत्रीय फोरम बल्कि वर्ल्ड सोशल फोरम ने भी अपना बुनियादी राजनीतिक रुझान वामपंथ की ओर खिसका दिया है. अफ्रीका में एक बार फिर हुई वर्ल्ड सोशल फोरम की इस बैठक के जरिए यह कोशिश की गई कि इसका फोकस स्थानीय सच्चाईयों को वैश्विक संघर्ष से जोड़ने पर केंद्रित किया जाए.
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