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बौद्धिक बेहूदगी और बेहद बौद्धिक अंबेडकर

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एक अनवरत लड़ाई का नायक

मिसाल-बेमिसाल

 

एक अनवरत लड़ाई का नायक

आशीष कुमार अंशु चेन्नई से लौटकर


उमाशंकर तमिलनाडु के किसी राजनेता से कम लोकप्रिय नहीं हैं. राजनीति और अफशरशाही के गलियारे में लोग उनका नाम सम्मान से लेते हैं. वे इन दिनों तमिलनाडु के चुनाव में व्यस्त हैं. वे चुनाव नहीं लड़ रहे, उनके जिम्मे चुनाव कराना है. इस चुनाव का परिणाम चाहे जो भी आये लेकिन इतना तय है कि उमाशंकर के जीवन में हार-जीत का खेल चलता रहेगा.

umashankar-ias

भ्रष्टाचार के खिलाफ कोई भी लड़ाई कभी आसान नहीं होती. यह बात उमाशंकर से बेहतर कोई नहीं समझ सकता. तमिलनाडु के दलित आईएएस अधिकारी सी उमाशंकर पर जैसे भ्रष्टाचार से लड़ने का एक जुनून है और इस लड़ाई की कीमत भी उन्हें चुकानी पड़ती है. सत्ता के खिलाफ एक के बाद एक लड़ाई के कारण उमाशंकर का तबादला होता रहता है या निलंबन. हालांकि कुछ समय पहले ही उमाशंकर की फिर से नौकरी में वापसी हुई है लेकिन कौन जाने, किस राजनीतिक दल की निगाह कब उन पर टेढ़ी हो जाये.

सी उमाशंकर 1990 में नौकरी में आए. नौकरी को अभी पांच साल ही हुए थे, जब 1995 में डीआरडीए (डिस्ट्रीक्ट रुरल डेवलपमेन्ट एजेन्सी) के अंदर बतौर परियोजना अधिकारी पिछड़ी जाति और जनजाति के लिए इस्तेमाल होने वाले श्माशान के शेड्स के नाम पर हुए पैसे के दुरुपयोग पर उन्होंने सवाल उठाया. उमाशंकर ने ना सिर्फ सवाल उठाया बल्कि इसके खिलाफ वे लोक हित याचिका लेकर चेन्नई उच्च न्यायालय में भी गए. इस मामले की सीबीआई जांच हुई और दोषियों को सजा मिली.

1996 में डीएमके की सरकार आई. सरकार ने उमाशंकर को संयुक्त सतर्कता आयुक्त के पद पर बिठाया. उमाशंकर ने आयुक्त रहते हुए अपने कार्यकाल में दो सौ करोड़ के साउथ इंडिया शिपिंग कॉरपोरेशन शेयर विनिवेश घोटाला, एक हजार करोड़ का ग्रेनाइट खदान लीज घोटाला, भूखंडों और तमिलनाडु हाउसिंग बोर्ड के मकानों का फर्जी व्यक्तियों के नाम पर आवंटन का मामला, पैंतालिस हजार टीवी एंटिना और बुस्टर की खरीद, कोयम्बटूर मेडिकल कॉलेज की 20 एकड़ जमीन को पट्टे पर महिलाओं और बच्चों के विकास के नाम पर स्टार होटल और क्लब के लिए दे दिए जाने का मामला, वह भी साधारण किराए पर दिये जाने जैसे कितने ही मामले में उन्होंने भ्रष्टाचारियों को निशाना बनाया.

उमाशंकर के अनुसार उन्होंने अपने कार्यकाल में कई बड़े नामों को भ्रष्टाचार का दोषी पाया, जिसमें मुख्य सचिव स्तर के और वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर आसीन अधिकारी और कुछ पूर्व मंत्री भी शामिल थे.

बकौल उमाशंकर- “ मैं काफी निराश था. मैंने पाया कि उन लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती है, जो ऊंचा रसूख रखते हैं, चाहे वे भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे हों. इस स्थिति को देखकर मैंने सरकार से निवेदन किया कि वह मुझे संयुक्त सतर्कता आयुक्त के पद से मुक्त करे.”
फरवरी 1999 में उमाशंकर जिलाधिकारी के तौर पर तिरुवरुर में नियुक्त हुए. यहां वे अपने जिले में ई-गवर्नेंस लेकर आए. पूरे भारत में किसी जिले के अंदर यह पहला प्रयोग था. एक प्रतिष्ठित समाचार पत्र ने उस वक्त खबर बनाई कि ई-गवर्नेंस के कदम के बाद तिरुवरुर जिला देश भर के अन्य जिलों से बीस साल आगे निकल चुका है. एक पत्रिका ने उसके बाद सदी का नायक बनाकर उमाशंकर को पेश किया.

मई 2006 में डीएमके फिर सत्ता में आई. उमाशंकर को एलकॉट (ईएलसीओटी) का कार्यकारी निदेशक बनाया गया. यह राज्य सरकार के स्वामित्व वाली कंपनी थी. उस समय उमाशंकर ने ई-टेंडर लाकर कांट्रेक्ट देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की बड़ी कोशिश की. वे निविदा मूल्यांकन (टेंडर इवेल्यूशन) की नई प्रक्रिया लेकर आए, जिसमें बोली लगाने वाले ठेकेदारों की भी भूमिका थी.

उमाशंकर के अनुसार जब उन पर एलकॉट की जिम्मेवारी थी, उस दौरान मुख्यमंत्री एम के करुणानिधि की तीसरी पत्नी राजथी अम्माल ने उन्हें अलवारपेट स्थित अपने दफ्तर में बुलाया. उमाशंकर के अनुसार उन्होंने इस बुलावे के बाद मिलना उचित नहीं समझा और कायदे से उन्हें इंकार भी कर देना चाहिए लेकिन वे शिष्टाचार के नाते मिलने चले गए.

वहीं राजथी अम्माल ने उन्हें एक खास आदमी को मछुआरों के लिए खरीदे जाने वाले 45,000 वायरलेस सेट का टेंडर देने की बात कही. उमाशंकर का पक्ष स्पष्ट था कि यह टेंडर, ई-टेंडर की प्रक्रिया से ही तय होगा, जिसे वे नहीं छेड़ना चाहते.

एलकॉट, एक दूसरी निजी लिमिटेड कंपनी न्यू इरा टेक्नोलॉजिज लिमिटेड जो थिंगराजा चेटियार द्वारा नियंत्रित था, दोनों कंपनियां ने मिलकर एलनेट टेक्नालॉजी के नाम से एक साथ काम शुरु किया. जिसमें एलकॉट का हिस्सा 26 फीसदी का था और न्यू इरा टेक्नालॉजी की हिस्सेदारी 24 फीसदी थी और बाकि बचे शेयर आम जनता के लिए थे.

दो कंपनियों के संयुक्त उद्यम एलनेट ने इटीएल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी शुरु की, इस सोच के साथ कि चेन्नई के पालिकारानाई में एक सूचना प्रोद्योगिकी पार्क सह विशेष आर्थिक क्षेत्र शुरु करेंगे.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

satish k. [satish.kamatkar@yahoo.com] betul - 2012-03-23 12:36:12

 
  देश को ऐसे ही अधिकारी की जरूरत है पर इस देश के राजनेता ऐसा नहीं होने देंगे.  
   
 

kapil sharma [kapilsharmaiimcelhi@gmail.com] new delhi - 2011-07-22 10:18:13

 
  इस देश में दो लोगों से लड़ना बहुत ही कठीन है, एक कठमुल्ला भावनाओं से और दूसरे सत्ताधारी भगवानों से....खैर...इन भगवानों से ऊपर वाला भगवान ही बचा सकता है. 
   
 

s p sagar [sagarsp9@gmail.com] kull hp - 2011-05-05 11:16:08

 
  अब ऐसा लगता है कि समय करवट लेने वाला है. तभी कुछ लोग कुछ करने के लिये उठ खड़े हुये हैं. 
   
 

umesh [] raipur - 2011-04-30 12:17:59

 
  ऐसी एक खबर भी हज़ारों लोगों को राहत देती है, जो कहीं न कहीं भ्रष्टाचार से लड़ रहे हैं और अपने को अभिमन्यु जैसी हालत में फंसे हुये पाते हैं. भ्रष्ट अधिकारियों-कर्मचारियों के साथ राजनेताओं का गठबंधन बेहद खतरनाक है. 
   
 

chandrakanta [chandrakanta.80@gmail.com] new delhi - 2011-04-29 19:08:54

 
  उमाशंकर जी का यह सार्थक प्रयास उन तमाम लोगो के लिए एक सबक है, जो ये कहते नहीं अघाते कि तथाकथित निम्न समझी जानेवाली जातियों से आने वाले प्रशासक /जज भ्रष्ट ही होते हैं क्यूंकि कोई भी प्रशासनिक पद उन्हें आरक्षण की थाली में परोस कर दे दिया गया है ..

नैतिक आचरण ,योग्यता और ईमानदारी किसी भी वर्ग/जाति में मिल सकती है
निश्चित ही उमाशंकर जी प्रशंसा और सहयोग के पात्र हैं ..
 
   
 

pawan kumar [kumarp5463@gmail.com] iit,guwahati - 2011-04-29 06:04:11

 
  Unless and until officers like- Umashankar ji are here,the fight against corruption can never end.the incident also speaks the fact that bureaucracy does not consists only corrupt officials but officers like- Umashankar are also there. Now the time speaks of the need when some more from the bureaucracy comes out and wage war against corruption. Salute to Umashankar ji.also thanks for bringing such a beautiful piece of news. 
   
 

S.R.Darapuri I.P.S.(Retd) [srdarapuri@gmail.com] Lucknow(UP) - 2011-04-29 03:33:27

 
  Hail Umashankar! Please continue your fight against corruption because it is anti people. Corrupt people/ politicians are every where. They have to be exposed at any cost. 
   
 

satyendra [] India - 2011-04-29 03:27:48

 
  अगर आम लोगों को भ्रष्टाचार की इतनी ही चिंता होती तो ये कम्मुनिस्ट कबका केन्द्र सरकार पर काबिज हो चुके होते. दिल्ली के अजय भवन में कभी भी देखा जा सकता है कि ३० साल तक सांसद, २० साल तक मंत्री रहे लोग किस तरह फटेहाल घूमते हैं. ये नजारा न तो अकबर रोड पर देखने को मिलता है और न ही अशोक रोड पर.

देश की जनता निश्चित रूप से उमाशंकर जैसे लोगों को महान चिरकुट समझती है और भविष्य में भी समझेगी. उनके ऊपर सरकारें जो आरोप लगाती हैं, उस पर विश्वास करेगी. अगर इस मामले में उमाशंकर जी को कोई गलतफहमी हो तो कहीं से सांसद-विधायक क्या, सभासद का चुनाव लड़कर देख लें, गलतफहमी दूर हो जायेगी!
 
   
 

Arun Khote [arun.khote@gmail.com] Lucknow - 2011-04-29 03:14:07

 
  Grand salute to Uma Shankar Bhai. He is a real hero and country must acknowledge him. If we realy wanted to fight against corruption then we should stand for such heros.  
   
 

Ramendra Mishra [ram19mishra@gmail.com] Delhi -

 
  संजय जी ने ठीक ही कहा है. उमाशंकर जैसे अच्छे अफसरों की तुलना हर्ष मंदर जैसे लोगो से न करे. ये उमाशंकर के अच्छे कार्य की बेज्जती है. 
   
 

Sanjay Kumar Tiwari [sanjay.tiwari@gmail.com] Raipur -

 
  भगत सिंह जी, आप जैसे लोग हर्षमंदर जी जैसे एनजीओबाज को सलाम करने लगे तो हो गया. ये वही हर्षमंदर हैं न जो छत्तीसगढ़ में पहले तो इस्तीफा दे दिया, बाद में जब गुजरात का दंगा हुआ तो देश भर में सियापा करने लगे कि गुजरात के दंगे से दुखी हो कर मैं इस्तीफा दे रहा हूं. गिर पड़े तो हर-हर गंगे और बिल्ली के भाग्य से छिंका टूटना जैसी कहावतें हर्षमंदर जी के लिये ही बनी हैं. हर्षमंदर जी ने प्रौढ़ शिक्षा के नाम पर छत्तीसगढ़ में क्या किया, उसकी फाइलें अभी तक जांच में हैं.

 
   
 

bhagatsingh [] raipur -

 
  इस रिपोर्ट को पढ़ कर मुझे हर्षमंदर जी की याद आ गई. सलाम इस अफसर को. 
   
 

Sandeep Roy [sandeep_roy@yahoo.com] Bilaspur, Chhattisgarh -

 
  Such news inspires us!!!
Please keep posting such news.
genius person, should be awarded.
 
   
 

Deepak [deepakrajim@gmail.com] Abudhabi -

 
  एक अच्छी रपट ! 
   
 

omdev [om_dev@rediffmail.com] noida -

 
  very nice to dalit administater and tamil govt 
   
 

Kalidas [kalidasmsw@gmail.com] Tata Institute of Social Sciences,Mumbai -

 
  it reflects the Caste discrimination in the service sector.we are not still the independent really. 
   
 

sunder lohia [lohiasunder2@gmail.com] Mandi Himachal Pradesh -

 
  उमाशंकर जैसे अफसर व्यवस्थापिका में व्याप्त भ्रष्टाचार की अंधेरी सुरंग के दूसरे छोर पर टिमटिमाते हुये दीपक के समान हैं, जिस पर देश की जनता इस उम्मीद से देख रही है कि कभी तो वो सुबह आयेगी ही. 
   
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