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रिश्तों के नासूर का दर्द

मुद्दा

 

रिश्तों के नासूर का दर्द

सारदा लहांगीर  सुंदरगढ़ से लौटकर


“मुझे पता है, मेरे दिन अब गिनती के रह गए हैं, मुझे कुछ नहीं चाहिए, मौत आने से पहले कोई मुझे मेरे बेटे से मिलवा दे.” यह व्यथा है, एक बेबस मां की जिसे कैंसर ने अपनी गिरफ्त में ले लिया है.

ब्रेस्ट कैंसर

यह बताने की जरूरत नहीं कि कैंसर एक जानलेवा बीमारी है और समाज में कैंसर पीड़ित कितने असुरक्षित हैं. कैंसर से ग्रस्त महिलाओं की हालत तो और भी बुरी है.

सुंदरगढ़ जिले के लाहुनीपाड़ा की 32 बरस की नीता को 2008 में कैंसर से पीड़ित पाया गया, तब तक यह नासूर उसके शरीर में काफी फैल चुका था. और जब उसके पति धनराज को पता चला कि उसका रोग लाइलाज है, तो उसने नीता को बेसहारा छोड़ दिया. वह अपने साथ अपने बेटे को तो ले गया, लेकिन उसने बेटी को नीता के भरोसे छोड़ दिया.

2008 से नीता अपने बेटे से नहीं मिल सकी है. 2010 में जब उसकी हालत बिगड़ने लगी, तो उसके माता-पिता को खबर की गई. वे आए भी लेकिन वे कर भी क्या सकते थे. असल में जब डाक्टरों ने बताया कि नीता के जिदंगी के कुछ महीने ही रह गए हैं, तभी धनराज ने उसे छोड़ दिया. पता चला है कि वह छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में कहीं रह रहा है.

नीता कहती है, “ मेरे पास समय नहीं है, मैं एक बार मेरे बेटे आयन को देखना चाहती हूं.”

वह भुवनेश्वर में एक निजी अस्पताल में किमियोथेरेपी के लिए आई थी. राऊरकेला महिला पुलिस थाने में 11 फरवरी को दर्ज कराई गई रिपोर्ट में नीता ने शिकायत की है कि उसके पति ने उसे और उनकी बेटी माही को उसके मायके में छोड़ दिया और खुद कहीं चला गया. उसने थाने में दर्ज कराई अपनी रिपोर्ट में लिखा है- मेरे पिता मेरे इलाज के लिए 18 लाख रुपये खर्च चुके हैं, जबकि मेरे पति ने मुझसे किसी तरह का संपर्क ही नहीं रखा.

ग्रेजुएशेन तक पढाई करने वाली नीता ने अपने ससुराल वालों पर भी 2004 में उसकी शादी के बाद से दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. नीता बताती है कि कई बार उसका सिर्फ इसलिए जबरिया गर्भपात भी कराया गया क्योंकि उसके गर्भ में कन्याभ्रूण था. उसे शक है कि गर्भपात की वजह से हुए इंफेक्शन के कारण ही उसे कैंसर हुआ है.

नीता के पिता रघुबीर प्रसाद एक व्यवसायी हैं वे बताते हैं कि 2008 में पता चला कि नीता को कैंसर है. प्रसाद कहते हैं, “ इसके बाद नीता सुविधाजनक इलाज के लिए मेरे पास भुवनेश्वर चली आई. इलाज के दौरान उसका पति भी यहां आता था, लेकिन जब उसे पता चला कि नीता का रोग अपने अंतिम चरण में है, उसने यहां आना बंद कर दिया.”

नीता का इलाज करने वाले डा. बिश्वास बताते हैं कि नीता के शरीर में आरंभिक तौर पर अंडाशय और आंत में कैंसर पाया गय था. मगर कुछ और तकलीफों की वजह से उसका आपरेशन नहीं किया जा सका. अब उसके लीवर और फेफड़े में भी कैंसर हो गया है.

वह कहते हैं, “मैं नहीं जानता था कि उसका पति इस तरह का व्यवहार करेगा. आमतौर पर जब कैंसर के मरीज एडवांस्ड स्टेज में होते हैं, तब उनके परिजनों को इसकी जानकारी दे दी जाती है, मैंने भी यही किया. मैंने उसके पति को नीता के हालात के बारे में बताया, लेकिन वह उसे यूं ही छोड़कर चला गया.”

छत्तीसगढ़ के कोरबा में टीवी पत्रकार अब्दुल असलम ने नीता के पति से बात की. ओडिशा के थाने में आपराधिक मामला दर्ज होने के बाद भी खुलेआम घूम रहे नीता के पति का कहना था कि उसकी पत्नी और परिजनों से उसके रिश्ते अच्छे नहीं हैं, इसलिये वह अपने घर लौट आया है. यह पूछने पर कि वह बेटे को साथ क्यों लेकर आया है और बेटी को क्यों नहीं, नीता के पति धनराज के पास बहानेबाजी के अलावा कोई ठीक-ठीक उत्तर नहीं है.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

raghwendrasahu [raghwendrasahu@indiatimes.com] durg/korba/bilaspur - 2011-04-24 05:48:57

 
  हम चाहे जितना भी पढ़ लिख जाएँ लेकिन हमारी मानसिकता से महिलाओं और लड़कियों के साथ किया जाने वाला भेदभाव नहीं निकल पाया है. यही वजह है की रस्मिता और नीता को उनके पति ने छोड़ दिया. इनकी जगह यदि इनके पतियों को ये बीमारी होती तो ये सेवा में अपना दिन रात एक कर देती. इनके माता पिता जरुर सम्मान के योग्य हैं जिन्होंने मुश्किलों के बावजूद इनका साथ देने में पीछे नहीं रहे. 
   
 

भास्कर मिश्रा"पारस" [bapubhaskar23@gmail.com] बिलासपुर,वर्तमान में हैदराबाद टीवी पत्रकार -

 
  जैसे-जैसे हम प्रगति के गीत गा रहे है, वैसे-वैसे लोगों की संवेदनाएं मरती जा रही हैं.लेखिका बधाई की पात्र हैं कि इस मामले को सबके सामने रखा.आधुनिकता की अंधी दौड़ में लोगों ने रिश्तों को कलंकित किया है.अब तो किसी पर विश्वास करने का भी मन नहीं करता.तुलसी दास ने रामचरितमानस में लिखा है कि धीरज धर्म मित्र और नारी,आफत काल परखिये चारी.हम रस्मिता और नीता के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं,साथ ही ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि नीता को उसका बेरहम पति बच्चे से मिलवा दे 
   
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