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घर किसी भी दिशा में था

कहानी

 

घर किसी भी दिशा में था

रामकुमार तिवारी


सूरज को निकले चार घंटे हो गये थे, फिर भी रात कहीं-कहीं रह गई थी. नगर निगम के दफ़्तर में चमन की टेबल के आसपास अंधेरा था. कमलेश ने अपनी कुर्सी पर बैठे-बैठे, चमन की ओर देखा. जल रही सिगरेट के चारों ओर चमन का चेहरा था.

घर किसी भी दिशा में था

चमन का चेहरा अधिकांशत: उसके सहकर्मियों को दिखता नहीं था. यह अलग बात थी कि वे एक ही हांल में एक ही छत के नीचे बैठते थे और उनके बीच कोई दीवार नहीं थी. कमलेश की टेबल के पास खिड़की थी. उसमें धूप आती थी. चमन अपनी कुर्सी से उठकर सिगरेट के लिए कमलेश की कुर्सी के पास गया तो सबको दिख गया.

रोज की तरह बालों में कंघी नहीं की गई थी. बायीं आंख में कीचड़ देखकर कमलेश ने पूछा- “क्या तबीयत खराब है?”

चमन ने कहा- “ठीक हूं” और वापस अपनी कुर्सी पर आकर सिगरेट पीने लगा. सिगरेट का धुआं हाल में भर गया. लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी. परसू ने पंखा चला दिया तो लोगों को राहत मिली.
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लंच का समय हो गया था. कमलेश चमन के पास गया. चमन अपनी कुर्सी पर बैठा-बैठा ऊंघ रहा था. उसने चमन के कंधे पर हाथ रखा. चमन ने अंगड़ाई ली. फिर वे दोनों चाय पीने के लिए बाहर आ गये. चुपचाप चाय पीते रहे. बात करने के लिए कुछ नहीं था. बात करने पर बार-बार कहे को एक बार और कह कर ऊबना पड़ता.

कमलेश को छोड़कर बाकी लोग चमन से दूर रहते थे. चमन भी दूरी को भरने का प्रयास कर नहीं पाता था. चमन के साथ कुछ ऐसा था कि भूल कर भी अगर कोई चमन की ओर आ जाये तो भी उनके बीच की दूरी कम नहीं होती थी. कमलेश और चमन के बीच भी दूरी थी लेकिन दूरी में सिगरेट का पुल था, जिस पर चलकर चमन, कमलेश के पास आ जाता था और उसी पुल में सिगरेट पीता वापस चला जाता था.

कमलेश के सहकर्मियों का बोलना-सुनना इस तरह तयशुदा और जाना हुआ होता था कि उनके बीच चमन का कुछ नहीं बोलना या बड़बड़ाना कमलेश को अच्छा लगता था.

पांच बज चुके थे. दफ़्तर के लोग जा चुके थे. कमलेश ने चमन से चलने के लिए कहा तो चमन चौंका. दोनों बाहर आकर अपने-अपने घर की दिशाओं में चल दिये. चमन का घर किसी एक दिशा में नहीं रहता था. वह चमन के चलने और पहुंचने पर निर्भर करता था.

आज जब चमन घर पहुंचा तो घर धन्नू के रोने की दिशा में था. धन्नू चमन का तीसरे नम्बर का बेटा है. उसकी उम्र लगभग तीन वर्ष है. उससे बड़ा सत्तू सात वर्ष का है और सबसे बड़ा दीपू दस वर्ष का है. सबसे छोटी मुन्नी छ: महीने की है.

धन्नू को उसकी मां मालती पीट रही थी. मालती की उम्र निश्चित नहीं है. वह उसकी मन:स्थिति पर निर्भर करती है. चमन ने घूर कर मालती को देखा. मालती और जोर-जोर से पीटने लगी. रोते-रोते धन्नू का बुरा हाल हो गया. चमन ने धन्नू को उठाकर मालती के ऊपर फेक दिया. मालती से टकराकर धन्नू नीचे गिर गया. सहमे हुए तीनों बच्चे और सहम गये. मालती बड़बड़ाती चीखती दूसरे कमरे में चली गई. धन्नू के रोने की आवाज़ चारों ओर से थककर वापस उसके पास आ गई और चुप हो गई.

बहुत देर बाद चमन ने बच्चों की तरफ मुंह करके पूछा, “खाना खाया?”

दीपू ने सिर हिलाकर कह दिया "नहीं."

वह बड़बड़ाता गाली बकता बाहर चला गया. चमन डबलरोटी के दो पैकेट लेकर लौटा. बच्चों के साथ उसने भी दो पीस खाये. चमन बच्चों को पढ़ने की हिदायत देकर बाहर निकल गया.

शहर की बनावट बड़ी रहस्यमय है. लखनऊ की भूल-भूलैया से ठीक उल्टी. जो जहां जाना चाहता है, वह किसी भी दिशा में, किसी भी सड़क से जाये, वहीं पहुंच जायेगा. चमन चलते-चलते रूका. सड़क के उस पार शराब की दुकान थी. सड़क पर ट्रैफिक बहुत था. चमन को देर हो रही थी. वह वाहनों से बचने-कुचलने के मामूली अंतर में से गुजरकर उस पार पहुंच गया.

बाद में रात बहुत हो गई और सड़कें सुनसान. भीड़ के बिना चौराहों की पहचान खो गई. सब कुछ अनचीन्हा-सा लग रहा था. दिन की इतनी सारी भीड़ एक साथ मकानों के अंदर सो सकती है, विश्वास नहीं होता. कभी-कभी लगता, शहर कहीं खो गया है और इक्के-दुक्के लोग शहर को ढूंढ रहे हैं. रात में अपने शहर के खो जाने का दुख कुछ लोगों को बहुत होता है. वे रात-भर शराब पीते रहते हैं और सड़कों पर अपने शहर को खोजते रहते हैं. नशे में चमन की आंखें बार-बार बंद हो रही थीं. वह लगातार चल रहा था. रात में दिन की तरह लगातार चलना मजबूरी नहीं है. वह कभी भी रूक सकता है या पुलिस द्वारा रोका जा सकता है. यह भी हो सकता है कि वह कुछ भी कर दे और किसी को पता न चले.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Hitendra Patel [hittisaba@gmail.com] - 2011-05-08 03:16:05

 
  सुंदर कहानी.  
   
 

Mumtaz Naza [mumtazaziznaza@yahoo.co.in] Mumbai -

 
  बहुत बेहतरीन कहानी है. 
   
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