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माओवादी सिनी सय की कहानी

लेकिन असली नायक कहां हैं?

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ओसामा बिन लादेन की मौत- अमरीका

ओसामा बिन लादेन की मौत- अमरीका

 

वाशिंगटन. 2 मई 2011

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अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा के संस्थापक और नेता ओसामा बिन लादेन के मारे जाने का दावा किया है. ओबामा ने मीडिया को संबोधित करते हुये कहा कि लादेन को पाकिस्तान में अमरीकी सेना ने मार डाला है. बराक ओबामा ने ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की घोषणा ऐसे समय में की है, जब अमरीका में राष्ट्रपति चुनाव की सुगबुगाहट हो रही है.

सोमवार को अपने बयान में बराक ओबामा ने कहा कि हजारों लोगों की मौत के जिम्मेदार ओबामा बिन लादेन को मार गिराया गया है. अल कायदा ने आज से 10 साल पहले ट्रेड टावर पर हमला कर करीब 3000 हजार लोगों को हमसे छीन लिया था. अल कायदा ने अमरीका के खिलाफ खुली जंग का ऐलान किया था.

ओबामा ने कहा कि हमने अधिकारियों को बताया था कि लादेन को पकड़ना या मारना अल कायदा के खिलाफ हमारे अभियान की टॉप प्रॉयरिटी है. लादेन को मारा जाना हमारी बडी़ उपलब्धि है. हमें अब घर-बाहर और सतर्क रहने की जरूरत है.

अमरीकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अपने पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज बुश को याद करते हुये कहा कि जैसा बुश ने कहा था हमारी जंग इस्लाम के खिलाफ नहीं है. लादेन को पाकिस्तान में इस्लामाबाद के एक कंपाउंड में मारा गया. एक हफ्ते पहले हमारे पास लादेन के बारे में पुख्ता जानकारियां मिल गई थीं. उसने बाद ही कंपाउंड को घेरकर एक छोटे ऑपरेशन में लादेन को मार गिराया गया.

बराक ओबामा ने कहा कि लादेन ने पाक के खिलाफ भी जंग छेड़ी थी. हमारे अधिकारियों ने वहां के अधिकारियों से बात कि और वह भी इसे एक ऐतिहासिक दिन मान रहे हैं. यह 10 साल की शहादत की उपलबधि है. हमने कभी भी सुरक्षा से समझौता नहीं किया. अल कायदा से पीड़ित लोगों से मैं कहूंगा कि न्याय मिल चुका है.

9/11 के हादसे को याद करते हुये बराक ओबामा ने कहा कि इस घटना में जिन लोगों ने अपनों को खोया है, हम उनके नुकसान को नहीं भूले हैं. आज रात एक बार फिर एकजुट हो जाएं. अमरीका जो ठान ले वह कर सकता है. पैसे और ताकत से नहीं बल्कि एकजुटता ही हमारी शक्ति है.

कौन थे ओसामा
बीबीसी के अनुसार सऊदी अरब में एक यमन परिवार में पैदा हुए ओसामा बिन लादेन ने अफगानिस्तान पर सोवियत हमले के ख़िलाफ़ लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए 1979 में सऊदी अरब छोड़ दिया.

अफगानी जेहाद को जहाँ एक ओर अमरीकी डॉलरों की ताक़त हासिल थी वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब और पाकिस्तान की सरकारों का समर्थन था. मध्य पूर्वी मामलों के विश्लेषक हाज़िर तैमूरियन के अनुसार ओसामा बिन लादेन को ट्रेनिंग सीआईए ने ही दी थी.

अफ़ग़ानिस्तान में उन्होंने मक्तब-अल-ख़िदमत की स्थापना की जिसमें दुनिया भर से लोगों की भर्ती की गई और सोवियत फ़ौजों से लड़ने के लिए उपकरणों का आयात किया गया.

धर्म का तिरस्कार करने वाली एक विचारधारा के ख़िलाफ़ लड़ाई में अफ़गानी मुस्लिम भाइयों का साथ देने के लिए मिस्र, लेबनान और तुर्की से हज़ारों लोग बिन लादेन के साथ आ गए.ओसामा बिन लादेन के ग्रुप को 'अरब अफ़गान' के नाम से जाना जाने लगा था. सोवियत सेना के लौट जाने के बाद 'अरब अफ़गान' अमरीका और मध्य पूर्व में उसके सहयोगियों के ख़िलाफ़ जुट गए.

ओसामा बिन लादेन अपना पारिवारिक व्यवसाय संभालने के लिए सऊदी अरब लौट आए पर 1991 में उन्हें सरकार विरोधी गतिविधियों के कारण निष्कासित कर दिया गया. इसके बाद वो पाँच साल तक सूडान में रहे और जब अमरीका के दबाव में सूडानी सरकार ने भी उन्हें निकाल दिया तो वे अफ़ग़ानिस्तान लौट आए.

आतंकवाद के विशेषज्ञ कहते हैं कि ओसामा बिन लादेन अमरीका के ख़िलाफ़ लाखों डॉलर के अपने खज़ाने का उपयोग करते रहे हैं. अमरीका का गृह विभाग कहता है, ''ओसामा बिन लादेन इस समय दुनिया भर में इस्लामिक चरमपंथी गतिविधियों के सबसे बड़े प्रायोजक हैं.''

अमरीका का कहना है कि ओसामा बिन लादेन तीन बड़े हमलों में शामिल रहे हैं, एक 1993 में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर में हुई बमबारी, दूसरा 1996 में सऊदी अरब में 19 अमरीकी सैनिकों की हत्या और तीसरा 1998 में कीनिया और तंज़ानिया में हुई बमबारी. कहना न होगा कि 11 सितंबर, 2001 को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए हमले ने उन्हें अमरीका के लिए अतिवांछित बना दिया.

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

navodita [] - 2011-05-02 20:13:35

 
  अमेरिका की रक्षा करने वालों को सलाम – ओबामा कहते हैं . हमें तो यह कहना पड़ता है कि जो अमेरिका से दुनिया की रक्षा करे उसे सलाम !!
 
   
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