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मेरी शहादत कई लादेन पैदा करेगी

मुद्दा

 

मेरी शहादत कई लादेन पैदा करेगी

हामिद मीर इस्लामाबाद से

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“ मैं एक अमीर बाप का बेटा था. दूसरे अमीर शहजादों की तरह मैं भी यूरोप और अमरीका में जिंदगी के मजे उड़ा सकता था, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया. मैंने हथियार उठाए और अफगानिस्तान की पहाड़ियों में भटकता रहा. क्या इसमें मेरा कोई अपना स्वार्थ है कि मैं अपनी जिंदगी के हर पल को मौत के साए में गुजारूं? नहीं, मैंने उन लोगों के लिए जिहाद छेड़ा है, जिन पर हमले होते हैं. ऐसा करके मैंने अपने मजहबी दायित्व का निर्वहन किया है. इस रास्ते पर चलते हुये अगर मैं मर भी जाऊं तो कोई फर्क नहीं पड़ता, मैं और मेरे जैसे अन्य लोगों की मौत एक दिन हजारों लोगों को जगाने का काम करेगी.”

ये बातें ओसामा बिन लादेन ने मुझसे उस समय कही, जब मार्च 1997 की एक सुबह पूर्वी अफगानिस्तान के तोरा-बोरा में मेरी उनसे मुलाकात हुई. उस समय मैं पहला पाकिस्तानी पत्रकार था, जिसने लादेन का साक्षात्कार किया.

 
इसके बाद मई 1998 में कंधार एयरपोर्ट के नजदीक उनसे मेरी दूसरी मुलाकात हुई. इस बार उनसे हुई लंबी बातचीत हुई. इस बातचीत में उन्होंने कहा, “मैं जानता हूं कि मेरे दुश्मन बहुत ही शक्तिशाली हैं, लेकिन मैं आपको इस बात के लिए निश्चिंत कर देना चाहता हूं कि वे मुझे मार सकते हैं पर जिंदा नहीं पकड़ सकते.”

अमरीका में 9/11 के हमले के कुछ घंटे बाद मुझे ओसामा का एक मैसेज मिला, जिसके अनुसार उन्होंने उन लोगों के लिए दुआ की जिन्होंने इस हमले को अंजाम दिया, लेकिन ओसामा ने कभी भी उस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली. इस मैसेज से मैं चकरा गया.

इसके बाद मैं ओसामा से मिलने की कोशिश करने लगा. उनसे मिलने की चाहत में नवंबर 2001 में मैं उस समय अफगानिस्तान पहुंचा, जब जलालाबाद से काबुल तक अमेरीकी युद्धक विमान अल-कायदा और तालिबान को निशाना बना रहे थे.

8 नवंबर 2001 को मेरी उनसे मुलाकात हुई. 9/11 के बाद मैं ऐसा पहला पत्रकार था, जिसने ओसामा बिन लादेन का इंटरव्यू किया. उन्होंने मुस्कुरा कर मेरा स्वागत किया और कहा, “मैंने तुमसे आखिरी बार कहा था कि मेरे दुश्मन मुझे मार सकते हैं, लेकिन जिंदा नहीं पकड़ सकते. देखो मैं अब भी जिंदा हूं.”

इंटरव्यू खत्म होने के बाद भी आखिर में उन्होंने दावा किया, “यदि वे मुझे जिंदा पकड़ते तब उनकी जीत है, लेकिन यदि वे मेरा शव ले जाते हैं तो ये उनकी हार होगी. मेरी मौत के बाद भी अमरीका के खिलाफ हमारी लड़ाई जारी रहेगी. मैं अपनी बंदूक की आखिरी गोली तक लड़ूंगा. मेरा सबसे बड़ा सपना शहादत है और मेरी शहादत कई ओसामा बिन लादेन को पैदा करेगी.”

लादेन ने अपने वादे को निभाया. उसने आत्मसर्मपण नहीं किया. अंततः 2 मई 2011 को अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने ओसामा बिन लादेन के मारे जाने की घोषणा की.

उनकी मौत अमरीकियों के लिए 2011 की सबसे बड़ी खबर है सेकिन उनसे सहानुभूति रखने वाले इस बात से संतुष्ट हैं कि उन्हें जिंदा नहीं पकड़ा जा सका वरना अमरीकी उन्हें सद्दाम हुसैन की तरह ज़लील करते. मेरे लिए सबसे ज्यादा आश्चर्यजनक ये रहा कि दुनिया का सबसे वांछित व्यक्ति पाकिस्तानी शहर अबोटाबाद में छिपा था, जो पाकिस्तान मिलिटरी अकादमी की वजह से मशहूर है. यह वही इलाका है जहां आईएसआई ने 2004 में ओसामा के दामाद अबी फराई अल लिब्बी को खोजने के लिए अभियान चलाया था लेकिन वह मरदान भाग गया, जहां उसे आईएसआई द्वारा कुछ हफ्ते बाद पकड़ा गया.

मेरी जानकारी में यह बात आई है कि अमरीकियों ने अपने पाकिस्तानी साथियों को बताए बिना ये ऑपरेशन किया. दो अमरीकी चिनूक हेलीकॉप्टर पूर्वी अफगानिस्तान से पाकिस्तानी क्षेत्र में घुसे. पाकिस्तान सरकार के सूत्र दावा कर रहे हैं कि “हमें इसीलिए पता नहीं लग पाया क्योंकि अमरीकियों ने हमारा राडार सिस्टम जाम कर दिया था”.

दूसरी तरफ पाकिस्तानी सरकार में उच्च पदों पर मौजूद जिम्मेदार सूत्रों ने बताया है कि पाकिस्तान ने मई 2010 में ओसामा बिन लादेन से जुड़ी बहुत महत्वपूर्ण जानकारी सीआईए के साथ बांटी थीं. पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने किसी तक्सीला और अबोटाबाद के बीच किसी अरब व्यक्ति के द्वारा की गई टेलीफोन कॉल को बीच में ही लपक लिया गया. सीआईए को अगस्त 2010 में अल कायदा के महत्वपूर्ण लीडरों की तक्षशीला और अबोटाबाद के इलाकों के बीच संभावित उपस्थिति के बारे में बताया गया था. संभवतः ये फोन ओसामा बिन लादेन द्वारा किया गया था और फोन में बात करना ही उनकी सबसे बड़ी गलती थी. मेरी जानकारी के अनुसार वह 9/11 के बाद कम से कम 4 बार मौत के मुँह से बच कर निकले थे लेकिन पाँचवी बार मारे गये.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

vikal [] varanasi,up - 2015-05-05 11:44:12

 
  We should fight against terrorism.
 
   
 

abhinaw [sabhinaw@yahoo.com] raipur - 2011-08-13 18:54:19

 
  America has no power to use it against over any country without her permission but any way everything is fair in the war. but in only WAR, not suitable for double standers & cheater country like America  
   
 

parikesh chhabra [] chandigarh - 2011-05-09 13:29:29

 
  मेरे हिसाब से तो अमेरिका की नीतियां हमेशा से ही गलत रही हैं, चाहे वो किसे भी देश के लिए हों. एक तरफ तो वो आतंकवाद का विरोध करते हुए ओसामा बिन लादेन को मार गिरता है.. अफगानिस्तान पर बेगुनाह लोगों पर बम गिराता है और दूसरी तरफ पाकिस्तान जैसे आतंकवादी देश का साथ देता है.. ये तो हम सभी ऐसे देशों को मिल कर सोचना चाहिये कि अमेरिका जैसे देश अपने मंसूबो में कामयाब न हों..वर्ना रोज इक नया ओसामा का जनम होता रहगा और ओबामा और ओसामा जैसे लोग बेगुनाहों का खून बहते रहेंगे. 
   
 

devesh tiwari [dveshrisk@gmail.com] bilaspur - 2011-05-07 14:23:12

 
  लादेन के बारे में इन अनछुए तथ्यों के बारे में बताने के लिए शुक्रिया हामिद जी. लादेन निश्चित तौर पर बुरा आदमी और एक आतंकी था .. आज अमरीका लादेन को मारकर यह जताने में जुटा है कि उनसे दुश्मनी करके कोई भी नहीं बच सकता और ये कुछ हद तक माना भी जा सकता है.... लादेन के साहस की जितनी तारीफ की जाये कम है. मरा तो मरा मगर उसने अमरीका से लोहा लेने का हिम्मत जुटाया यह प्रशंशा के लायक है.  
   
 

Sachin nigam [nigam4u@yahoo.com] New delhi - 2011-05-04 06:37:05

 
  There is no doubt that bin laden was a fighter. He fought for his religion & country. His way was bad not his target. 
   
 

Radha [radhavin2006@gmail.com] delhi - 2011-05-03 10:13:28

 
  अच्छा लेख है. ओसामा के किये को बता कर अमरीका अपनी गंदगी नहीं छुपा सकता. 
   
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