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रमन सरकार के 'हीरो' बिनायक सेन

बहस
 

रमन सरकार के 'हीरो' बिनायक सेन

दिवाकर मुक्तिबोध

 

छत्तीसगढ़ में जनसुरक्षा अधिनियम के तहत आजीवन कारावास से दंडित और फिलहाल जमानत पर रिहा बिनायक सेन अब शायद ही सींखचों के पीछे नजर आए. रायपुर की अदालत द्वारा राजद्रोह के आरोप में दी गई सजा के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट में अपील दायर की है. उनकी अपील पर सुनवाई के बाद फैसला आने में कितना वक्त लगेगा, कुछ कहा नहीं जा सकता. संभव है वर्ष, दो वर्ष या इससे भी अधिक. यदि निचली अदालत की सजा बहाल हुई तो जाहिर है मामला सुप्रीम कोर्ट तक जाएगा. यानी मानकर चलें अदालती कार्रवाई मुकम्मिल होने और फैसले तक पहुंचने में खासा वक्त निकल जाएगा.

binayak-sen


विनायक सेन को जमानत भी सुप्रीम कोर्ट से मिली हुई है. जमानत की अपील पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी बहुत महत्वपूर्ण है कि उनके खिलाफ राजद्रोह का आरोप नहीं बनना. सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के परिप्रेक्ष्य में बिलासपुर हाईकोर्ट को अब अपना निर्णय बहुत सोच समझकर देना होगा. क्योंकि इसी कोर्ट ने 11 फरवरी 2011 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी. अब डा. बिनायक सेन के पक्ष में अदालत में पैरवी करने वालों के तरकश में अमोघ अस्त्र आ गया है, जिसके आधार पर वे हाईकोर्ट से ही बिनायक सेन को बचा ले जा सकते हैं. यदि ऐसा हुआ, जिसकी पर्याप्त संभावना है तो यह राज्य सरकार के लिए किसी आघात से कम नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने एवं विपरीत टिप्पणी से वैसे भी उसके होश फाख्ता हैं. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसकी विश्वासनीयता पर चोट पहुंची है.

'विश्वसनीयता' छत्तीसगढ़ सरकार का वेद वाक्य है. राज्य निर्माण के 10 वर्ष पूर्ण होने पर सन् 2010 में इस 'विश्वसनीयता' का खूब प्रचार-प्रसार हुआ था. कथित रुप से गरीबों के हितों एवं सर्वांगीण विकास के लिए कार्य करने वाली रमन सरकार को लगता है कि वह जनता के बहुत करीब है इसलिए विश्वसनीय भी. उसकी इस आत्म-मुग्धता के बारे में और कुछ न कहते हुए यह बताना ही पर्याप्त है कि नक्सली समस्या, कानून-व्यवस्था का सवाल एवं बिनायक सेन प्रकरण से उसकी कार्यप्रणाली एवं 'विश्वसनीयता' पर ही सवालिया निशान लग गया है. सरकार के लिए यह चिंता की बात है. अब यह उस पर है कि 'विश्वसनीयता' को कायम रखने के लिए वह क्या उपाय करती है. चूंकि बिनायक सेन को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने एवं कोर्ट की टिप्पणी के बाद कानून मंत्री वीरप्पा मोइली कह चुके है कि दशकों से चले आ रहे जनसुरक्षा कानून को बदलने की जरुरत है और अब इस पर राष्ट्रीय बहस की आवश्यकता भी बताई जा रही है तो इसकी आड़ में छत्तीसगढ़ सरकार चाहे तो अपना चेहरा बचा सकती है.

यह देखना निश्चय ही दिलचस्पी से खाली नहीं होगा कि बिनायक सेन का मामला कानूनी दांव-पेंचों के बीच अंतत: किस तरह की शक्ल अख्तियार करेगा. फिलहाल उन्हें लेकर चर्चाओं का बाजार काफी गर्म है. विशेषकर हाल ही में उन्हें योजना आयोग की स्वास्थ्य संबंधी सलाहकार समिति में नामजद करने के बाद चर्चाओं ने और जोर पकड़ा है.

नक्सलियों के साथ संबंध रखने एवं उनके शहरी मित्र के रुप में डा. बिनायक सेन के खिलाफ राज्य की पुलिस ने जब जनसुरक्षा अधिनियम की धारा 124 ए के तहत 14 मई 2007 को गिरफ्तार किया तो सरकार को तनिक भी इल्म नहीं था कि उन्होंने बर्रे के छत्ते को छेड़ दिया है. उसे यह भी उम्मीद नहीं थी कि इस मामले की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा होगी तथा देश-दुनिया के सारे मानवाधिकार कार्यकर्ता एवं प्रखर बुध्दिजीवी बिनायक सेन के पक्ष में खड़े नजर आएंगे. इनके सम्मिलित एवं आलोचनात्मक नाद से राज्य सरकार को नक्सली हिंसा एवं मानवाधिकार हनन के मामले में बिलावजह कटघरे में खड़ा रहना पड़ेगा.

यदि राज्य सरकार ने बिनायक सेन के विरुद्ध इतनी गंभीर कार्रवाई करने के पूर्व परिणामों पर विचार किया होता तो जाहिर है कि सरकार की न तो किरकिरी होती और न ही बिनायक सेन हीरो बनते. छत्तीसगढ़ में बिनायक सेन भले ही तीन दशकों से कार्य कर रहे हों, यह भी मान लेते हैं और जैसा कि प्रचारित भी किया गया है, चिकित्सक के रुप में उन्होंने छत्तीसगढ़ के दूर-दराज में रहने वाले गरीब आदिवासियों के स्वास्थ्य का अच्छा ख्याल रखा, यह भी ठीक है कि एक मानवाधिकार कार्यकर्ता के रुप में नक्सली हिंसा का उन्होंने कभी समर्थन नहीं किया.
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इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

Basudev Mahapatra [] Bhubaneswar - 2011-05-31 13:41:53

 
  An eye opener piece really. But the irony in India is that, instead of making people aware of the truth a section of media is always on mission to fool people by promoting its own agenda mostly based on falsehood and speculation. 
   
 

Rakesh Derhgawen [rakeshderhgawen@gmail.com] Raipur - 2011-05-24 18:26:57

 
  Vinayak Sen and his supporters must come forward to show what are his contribution as a physician in the tribal areas of Chhattisgarh. Else, Chahhtisgarh Government is not at all at fault to claim Sen is a non-cadre naxalite. Agreed that treason is too harsh an allegation, his crime is no less. 
   
 

mahesh sinha [] Raipur - 2011-05-23 13:29:42

 
  यह सारा खेल विदेशी ताकतों का है और देश की सरकार विनायक सेन को योजना आयोग का सलाहकार बनाकर इन ताकतों के हाथ में खेल रही है । क्या कभी इस देश की सुरक्षा अजेंसियों ने कभी इस बात की जांच करने का प्रयास किया है की एक बीहड़ में रहने वाले गुमनाम से व्यक्ति को इतना अन्तराष्ट्रिय समर्थन कैसे मिल रहा है । राष्ट्रिय मीडिया भी पूंजीवाद के दबाव में है । सूप्रीम कोर्ट का भी जमानत देते हुए इस तरह की टिप्पणी करना कितना सही है, जैसे की उसने अंतिम फैसला ही सुना दिया ? 
   
 

के. रवींद्र [k.ravindrasingh@yahoo.com] रायपुर - 2011-05-22 13:55:12

 
  दिवाकर भाई, सही है, कुछ सच चाह कर भी नहीं छुपता. 
   
 

Yogendra Thakur [yogdunia@yahoo.co.in] Jagdalpur (Bastar) - 2011-05-22 08:04:34

 
  विनायक सेन एक डॉक्टर हैं. लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं इसकी कोई गारंटी नहीं. आज ऐसे लोग बहुत मिल जायेंगे जिनके पास बहुत संस्था-संघटन के परिचय पत्र हैं. ऐसे लोग उन संस्था- संगठनो की आड़ में अपनी दुकानदारी चला रहे हैं. विनायक सेन भी उनमें शामिल होंगे. संस्था- संगठन विनायक सेन के बहाने खुद का बचाओ कर रहे हैं और सेंट्रल गवर्नमेंट अपनी किरकिरी बचाने उनका साथ दे रही है. 
   
 

Ashutosh Kumar [ashutoshkumar_2009@gmail.com] Noida - 2011-05-21 09:42:57

 
  बिनायक सेन ने न तो मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर बहुत काम किया है और ना ही चिकित्सक के तौर पर. उन्हें तो ऐसे लोगों ने हीरो बना दिया, जो पूंजीवादी शक्तियों के हाथों खेल रहे हैं. ऐसे लोगों को न तो छत्तीसगढ़ पता है और ना ही बिनायक सेन का काम. ये सियारों की तरह हुआ-हुआ करना जानते हैं. बिनायक सेन के समर्थकों को बताना चाहिये कि उन्होंने क्या-क्या काम किया है. स्पेसफिक काम बतायें. लास एंजेल्स के उस रिपोर्टर की तरह नहीं कि बिनायक सेन भारत में पिछले 20 सालों से सर्वाधिक लोकप्रिय चिकित्सक और मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं. ऐसे चुटकुले सुनकर तो बिनायक सेन को भी हंसी आ जाती होगी. तो बात चुटकुले में न हो, बात तथ्यों के साथ हो. 
   
 

Raju Bhaiya [] New York - 2011-05-21 03:38:29

 
  He will be next Union Health Minister / Counselor... He got the fame nobody will stop him for Nobel Prize for Public Health work... 
   
 

sunil chipde [] bilaspur - 2011-05-21 03:27:21

 
  छत्तीसगढ़ सरकार की नाकामी से बिनायक सेन को फायदा ही मिला है, केंद्र जानती है कि नक्सल इलाको में चुनाव जीतना है तो .. किसी न किसी को सहलाना होगा, बिनायक को सदस्यता देकर ये सन्देश दिया गया है. यह केंद्र और राज्य सरकार दोनों को सोचना चाहिए कि क्यों किसी व्यक्ति विशेष को सरकारों के समकक्ष खड़ा कर रहे हैं. आपका लेख अच्छा लगा. वाकई दो गलत लोग आपस में लड़ें तो किसी एक को सही नहीं ठहराया जा सकता. 
   
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