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ए राजा, वो राजा

बाईलाइन

 

ए राजा, वो राजा

एम जे अकबर


संडे गार्जियन के 12 जून 2011 के अंक में हमारी राजनीतिक संपादक कोटा नीलिमा ने एक स्टोरी का भंडाफोड़ किया, जिसमें टेप की हुई एक मशहूर बातचीत में दूरसंचार मंत्री ए. राजा ने लॉबिइस्ट नीरा राडिया से कहा कि ‘चिदंबरम ने ढेर सारा पैसा लिया है’.

राजा

नीलिमा का स्रोत एक सीबीआई दस्तावेज था, जो संसद की लोक लेखा समिति को दिए गए लिखित सीबीआई प्रमाण का हिस्सा है और जिसका आधार ‘आयकर विभाग से आई हुई कॉल्स का एक विश्लेषण’ है. इसे सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने पेश किया था. यह दस्तावेज संडे गार्जियन के पास है.

चिदंबरम फिलहाल गृहमंत्री हैं, पर टेलीकॉम घोटाले के अहम हिस्से के दौरान वित्त के प्रभारी थे. उन्होंने बयान जारी किया है कि संसद को दी गई सीबीआई की टीप में जिस ‘राजा’ का उल्लेख है, वे मंत्री ए. राजा नहीं थे, बल्कि मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज में कार्यरत एक्जीक्यूटिव केआर राजा हैं.

केआर राजा ने बयान देकर चिदंबरम पर ऐसे आरोप लगाने के लिए खेद भी जता दिया है. यह प्रकरण हर कदम पर ज्यादा उत्सुकता जगा रहा है. लेकिन इन सबसे सवाल ओझल नहीं हो रहे हैं, खड़े हो रहे हैं.

1. सीबीआई कम से कम एक साल से इन टेपों की तहकीकात कर रही है. आखिर वह आडियो टेप में राजा की आवाज पहचानने में गलती कैसे कर बैठी, जबकि वह अनगिनत बार उनकी आवाज सुन चुकी होगी. क्या रिलायंस के राजा और डीएमके के राजा की आवाज एक जैसी है?

अगर कोई अंतर है, तो क्या सीबीआई इस अंतर को नहीं ताड़ सकी और उसने पहचान के लिए इस टेप को प्रयोगशाला में नहीं भेजा? संयोग से, यह अनुमान लगाने कि यह प्राइवेट सेक्टर का एक्जीक्यूटिव था, जिसका मानना था कि चिदंबरम को ‘ढेर सारा पैसा’ मिला है, इससे आरोप की जघन्यता में कोई कमी नहीं आती, क्योंकि यह प्राइवेट सेक्टर ही है, जिसने इस घोटाले में नेताओं को भुगतान किए हैं.

2. स्पष्ट है कि यह बातचीत राडिया के मोबाइल फोन की तरफ से रिकॉर्ड हो रही थी, क्योंकि संभवत: मुकेश अंबानी के राजा का फोन टेप नहीं हो रहा था. क्या सीबीआई ने राडिया से पूछा कि उन्हें इस ‘बहुत बड़ी धनराशि’ के बारे में कोई जानकारी है या नहीं?

या फिर सीबीआई डीएमके के राजा के खिलाफ अभियोगों में ही भिड़ी है और कांग्रेसी मंत्रियों पर लगे आरोपों के प्रति उदासीन है? यह सीबीआई की जिम्मेदारी है कि वह भ्रष्टाचार के तमाम आरोपों की पड़ताल करे. और यही वजह है कि ये फोन टेप पहली प्राथमिकता में अधिकृत किए गए.

चिदंबरम के भ्रष्टाचार की पुष्टि या उन्हें दोषमुक्त करने के लिए सीबीआई ने क्या प्रयास किए? या फिर हम यह अनुमान लगा लें कि मामले में चिदंबरम जैसी किसी कद्दावर राजनीतिक शख्सियत के शामिल होने पर सीबीआई को आगे जांच न करने का आदेश दिया गया है?

वित्त मंत्री पर भ्रष्टाचार का दोषारोपण करना एक बहुत बड़ी चाल हो सकती है. सीबीआई ने इसकी पटकथा लिखने वाले तक पहुंचने की कोशिश क्यों नहीं की? यह मुद्दा तो संसद की लोक लेखा समिति तक उस पैराग्राफ के पहुंचने से बहुत पहले ही सुलझ सकता था.

क्या सीबीआई ने कभी दूरसंचार मंत्री राजा से पूछा कि उन्होंने यह बात कही थी कि नहीं? अगर हां, तो उनका जवाब क्या था? अगर नहीं, तो फिर क्यों नहीं पूछा? राजा अभी भी हिरासत में हैं. इस स्टोरी के खुलासे के बाद क्या सीबीआई राडिया से इस बारे में पूछने से हिचक रही है?

और अगर वह आवाज रिलायंस वाले राजा की है, जैसा कि चिदंबरम ने दावा किया, तो क्या सीबीआई ने प्राइवेट सेक्टर के इस एक्जीक्यूटिव से पूछा कि उसने ऐसी बात क्यों कही? यदि हां, तो उत्तर क्या था? अगर नहीं, तो क्यों नहीं?

3. संसदीय लोक लेखा समिति को भेजे गए दस्तावेजों में सीबीआई ने लगातार मुख्य लोगों का उल्लेख उनके नाम के प्रारंभिक अक्षरों के बगैर, सिर्फ सरनेम के जरिए किया है. मिसाल के लिए, उक्त पैराग्राफ में चिदंबरम का उल्लेख उनके जाने-पहचाने सरनेम से ही है. वहां सरनेम के पहले ‘पी.सी.’ नहीं लिखा गया है.

इस दस्तावेज का प्रसंग हमें बताता है कि वहां तत्कालीन वित्त मंत्री की बात की गई है, न कि भारत के नागरिक लाखों अन्य चिदंबरमों में किसी चिदंबरम की. इसी तरह, पूर्व दूरसंचार मंत्री ए. राजा का उल्लेख भी नियमित तौर पर ‘राजा’ के रूप में ही किया गया है.

कुछ उदाहरणों के रूप में 15 नवंबर 2008, 18 नवंबर 2008, 19 नवंबर 2008 या 20 नवंबर 2008 के लिए वार्तालापों के सीबीआई विश्लेषण हैं. ये सारे संदर्भ लोक लेखा समिति के पास कागजों में हैं. सीबीआई दस्तावेज में किसी भी केआर राजा का हवाला नहीं है.

और अगर वह बयान रिलायंस के राजा द्वारा दिया गया है, तो भी यह सवाल कहीं नहीं जाता कि इन कई, कई महीनों के दौरान भ्रष्टाचार की जांच में कोई फॉलोअप क्यों नहीं हुआ? गृह मंत्री चिदंबरम ने इस बात को नहीं नकारा है कि उन्हीं का हवाला दिया गया था, न ही किसी और ने नकारा है.

4. क्या सीबीआई इतनी अक्षम है कि उसने पूरी तरह पड़ताल किए बिना ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी संस्था, संसद को एक दस्तावेज भेज दिया, जिसमें पूर्व वित्त मंत्री और वर्तमान गृह मंत्री पर भ्रष्टाचार का अभियोग जैसी गंभीर बात है?

सीबीआई ने चिदंबरम को ‘ढेर सारा पैसा’ मिलने संबंधी इस विस्फोटक आरोप को हवा में उड़ा दिया. क्यों? इस छूट के लिए सीबीआई का कौन-सा अधिकारी जिम्मेदार है? जवाब कौन उपलब्ध कराएगा? मौन, या घुड़की भी, कोई जवाब नहीं है.

*लेखक ‘द संडे गार्जियन’ दिल्ली व 'इंडिया ऑन संडे' लंदन के संपादक और इंडिया टुडे, हेडलाइंस टुडे के एडिटोरियल डायरेक्टर हैं.

19.06.2011, 00.48 (GMT+05:30) पर प्रकाशित


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