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चिकनी चमेली से डरता कौन है ?

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यह सबके लिये चेतावनी है

 
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राष्ट्रपति की यात्रा निजी थी या सरकारी

बहस

 

राष्ट्रपति की यात्रा निजी थी या सरकारी

आशीष कुमार 'अंशु' नई दिल्ली से


असल में बहस तो इस मुद्दे पर होनी चाहिये कि शीर्ष संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के लिये व्यक्तिगत जीवन और सार्वजनिक जीवन की महीन-सी फांक में अंतर कैसे किये जाये, लेकिन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के कार्यालय की चुप्पी ने बहस को दूसरी दिशा में मोड़ दिया है. चुप्पी तो गोवा सरकार में भी है. गोवा के एरिस रॉडरिक्स ने हाल ही में गोवा सरकार और भारत सरकार को चिट्ठी लिखी है, लेकिन वहां अभी भी मौन पसरा हुआ है.

president of india

एरिस रॉडरिक्स का सवाल केवल इतना भर है कि राष्ट्रपति का गोवा दौरा अगर निजी था, तो आखिर सरकारी खजाने को इस निजी यात्रा के लिये क्यों लुटाया गया ? और अगर दौरा सरकारी था तो सरकार वह काम क्यों नहीं बताती, जिसके लिये राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल को अपने पूरे कुनबे के साथ गोवा आना पड़ा ? सरकारें आम जनता को गुमराह करने का काम क्यों करती हैं ?

मामला इसी साल जनवरी महीने का है, जब राष्ट्रपति गोवा आई थीं. उस समय तीन फोटो पत्रकारों ने गोवा के तट पर उनकी तस्वीर ली. फोटो पत्रकारों ने राष्ट्रपति की तस्वीर उस समय लीं जब वह एक रंगीन साड़ी में बेनाउलिम समुद्र तट पर बैठी हुई थीं. उनके पास से एक विदेशी जोड़ा तैराकी की पोशाक में वहां से गुजर रहा था. यह तस्वीर अगले ही दिन स्थानीय अखबारों में प्रकाशित भी हुई. तस्वीर छपने के बाद मडगांव पुलिस ने तीन फोटो पत्रकारों को थाने में तलब किया. यह तीन पत्रकार थे- गगनदीप शेलदेकर, सोइरु कुमार पंत और अरविन्द तेंगसे.

अरविन्द के अनुसार पुलिस ने उन्हें बताया कि यह महामहिम राष्ट्रपति की निजी यात्रा है और इसमें तस्वीर नहीं ली जा सकती. इसलिए सभी पत्रकारों को पहले ही राष्ट्रपति के घेरे से दूर रहने की हिदायत दी गई थी.

देसी दूर-दूर, विदेशी पास-पास

सरकारी प्रताड़ना के शिकार अरविन्द तेंगसे कहते हैं-“भारत के अंदर कोई समुद्र तट निजी नहीं है. माननीय राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल जिस गोवा के बेनॉलिम तट पर बोटिंग और रेत पर चलने का आनन्द ले रहीं थीं, सुरक्षा की दृष्टि से हम फोटो पत्रकारों को उससे 200 मीटर की दूरी पर खड़ा किया गया था. लेकिन यह दिलचस्प है कि यही कानून उन्होंने गोरी चमड़ी वाले विदेशी सैलानियों पर लागू नहीं किया. वे सब उनके आस-पास मौजूद थे. क्या राष्ट्रपति को हमसे खतरा हो सकता था और उन गोरी चमड़ी वालों से कोई खतरा नहीं हो सकता था? क्या हम इस बात को भूल गये कि डेविड हेडली भी टूरिस्ट विजा लेकर भारत आया था और उसने मुम्बई में आतंकी हमले की योजना बनाई थी.”

गोवा पत्रकार संघ के अध्यक्ष राजतिलक नायक से जब इस मुद्दे पर बात हुई तो उन्होंने इस पुराने मामले को याद करते हुए बहुत साफगोई से कहा-“ हमारा पक्ष प्रारंभ से ही साफ है, यदि कोई पत्रकार राष्ट्रपतिजी की तस्वीर समुद्र तट जैसी सार्वजनिक जगह पर लेता है तो इसमें किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. फोटो पत्रकार अपनी नौकरी कर रहे हैं. राष्ट्रपतिजी गोवा में हैं और वे समुद्र तट पर आईं, यह एक खबर है, जिसको लेकर एक आम गोवा वाले में उत्सुकता है. इस जानकारी को हम तस्वीर के माध्यम से अधिक मुकम्मल तरिके से अपने पाठकों के बीच पहुंचा सकते हैं.”

नायक कहते हैं- “समुद्र तट तो एक सार्वजनिक जगह है, यहां तस्वीर लेने का हमें हक है. राष्ट्रपतिजी तो एक लोकसेवक हैं, इस बात में उन्हें भी परेशानी नहीं होनी चाहिए.”

अब यह सवाल किसी के मन में आ सकता है कि लगभग सात महीने पहले गुजर चुकी इस घटना का इतने दिनों बाद एक बार फिर जिक्र क्यों आया? इसका जिक्र आया गोवा उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एरिस रॉडरिक्स की वजह से, जिन्होंने सूचना के अधिकार के अन्तर्गत कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई.

खर्चा सरकारी, यात्रा निजी ?
तीन से छह जनवरी तक राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल की जिस गोवा यात्रा को सरकारी सूत्रों ने पूरी तरह से निजी यात्रा बताया था, रॉडरिक्स को सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के अनुसार यह पूरी तरह से सरकारी खर्चे पर हुई सरकारी यात्रा थी. गोवा सरकार के प्रोटोकॉल विभाग से मिली जानकारी के अनुसार विभाग ने राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल की चार दिनों की गोवा यात्रा पर कुल चौदह लाख, अठारह हजार, सात सौ बहत्तर रुपये खर्च किया हैं. इसमें 5 जनवरी की शाम राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के सम्मान में राज्यपाल डा. एसएस सिन्धु के घर पर आयोजित रात्रि भोज का खर्च शामिल नहीं है.

वरिष्ठ अधिवक्ता एरिस रॉडरिक्स को मिली जानकारी के अनुसार इस दौरे में राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल अपने पति देवीसिंह शेखावत, अपनी बेटी ज्योति राठोर, पोती वेदिका राठौर और 36 अन्य कर्मचारियों के साथ आईं थीं. इस यात्रा में तीन लाख, बीस हजार, दो सौ पचास रुपये सिडाडे डी गोवा में रुके लोगों पर और एक लाख, उन्तीस हजार, नौ सौ पन्द्रह रुपये का खर्च इंटरनेशनल सेन्टर में रुके लोगों पर किया गया।

गोवा पर्यटन विकास विभाग से किराए पर लिए गए वाहनों पर छह लाख, तेईस हजार, एक सौ अट्ठासी रुपये खर्च किए गए. चार जनवरी को दो लाख, एक हजार, दो सौ बीस रुपये का खर्च खाने-पीने और बेनॉलिम तट घूमने पर खर्च किया गया. 6 जनवरी को दिन का खाना मुख्यमंत्री दिगम्बर कामत की तरफ से था, जो सिडाडे डी, गोवा में राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के सम्मान में रखा गया था. इस पर एक लाख, उन्नीस हजार, नौ सौ निन्यानवे रुपये का खर्च आया. वहीं बीस हजार रुपये का खर्च बोट पर घूमने में, पारा सेलिंग और जेट स्कीट पर आया. जिसका आयोजन राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के लिए ही किया गया. जो फूल उन्हें भेंट स्वरुप दिए गए, वे चौवालिस सौ रुपये के थे.

यदि राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल सरकारी कामकाज से गोवा आईं थीं तो किसी को क्या एतराज हो सकता है लेकिन अधिवक्ता एरिस रॉडरिक्स सक्षम अधिकारियों से इतनी जानकारी चाहते हैं कि यदि राष्ट्रपति राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल यहां निजी यात्रा की जगह सरकारी यात्रा पर थीं तो उनका गोवा में चार दिनों का सरकारी काम क्या था?

वे कहते हैं- “राज्य के राजकोष से खर्च हुए पैसे-पैसे की जवाबदेही तय होनी चाहिए. लोगों की गाढ़ी कमाई से इकट्ठा किए गए पैसे का इस तरह सार्वजनिक दुरूपयोग बंद होना चाहिए. राष्ट्रपतिजी की गोवा यात्रा पर एक छोटी सी जानकारी उपलब्ध करा दीजिए कि यदि वे यहां निजी यात्रा की जगह सरकारी यात्रा पर थीं तो चार दिनों तक वे किस सरकारी काम से गोवा में थीं? क्या सक्षम अधिकारी यह जानकारी सार्वजनिक कर सकते हैं? ”

जाहिर है, उनके इस सवाल पर सब तरफ चुप्पी है.

14.07.2011, 14.48 (GMT+05:30) पर प्रकाशित

 

इस समाचार / लेख पर पाठकों की प्रतिक्रियाएँ

 
 

shambhu [nshambhu@gmail.com] new delhi - 2011-07-25 02:58:37

 
  यही तो बेशर्मी है...
अब राष्ट्रपति हों या यूपीए चेयरपर्सन हों...कहीं नैतिकता नहीं बची है।
 
   
 

Padampsti [Padampati.sharma@gmail.com] Varanasi - 2011-07-24 08:20:33

 
  राष्ट्रपति पद को अपमानित करना अहंकारी कांग्रेस का पुराना शगल रहा है. फकरुद्दीन अहमद, ज्ञानी जैल सिंह और अब प्रतिभा पाटिल जैसे नमूने क्या किसी भी दृष्टि से इसके काबिल थे? लेकिन क्या कीजियेगा, कांग्रेस को कलाम और अन्ना जैसे लोग कभी रास नहीं आये. 
   
 

khushbu [khushbu.goyal16@gmail.com] karnal - 2011-07-24 06:33:26

 
  राजनीतिक रुतबे,पैसे और प्रतिष्ठा का फायदा तो राजनीति में आने वाला हर व्यक्ति उठाता है, अब वो चाहे एक राजनेता हो या राष्ट्रपति पद पर बैठा व्यक्ति.....फिर ये मोहतरमा क्यों पीछे रहें....भारतीय राजनीति की सबसे बड़ी कमी यही है कि इसे चलाने वाले इसका इस्तेमाल ही करते हैं, वो भी अपने लिए, जनता की सेवा करना तो एक बहाना है राजनीति में आने का. 
   
 

CA Ashok Kumar Gupta [ashokgupta.ca@gmail.com] New Delhi - 63. - 2011-07-23 13:14:50

 
  Report is enlightening, our revered President should have set a better precedent to the Politicians of the country by being thrifty, though Her security cannot be compromised. It was for her to see to it. May she live long a healthy and pleasant life.  
   
 

Kuldeep Tyagi [kuldeep.tyagi20@gmail.com] Delhi - 2011-07-22 09:52:33

 
  कांग्रेस हटाओ देश बचाओ! 
   
 

Gajendra Dubey [gajendradube@gmail.com] Navi-Mumbai - 2011-07-19 08:32:21

 
  If the tour of President is private then entire expense recover from her. They currupt person do not know the huger and curruption. Price hike does not effect them. They are the vampire who lives over poore people. They never want poor come over from poo-arty and think about society and corruption. If they can do they make man like domestic animal. Who do work on them order and do not ask in return. Them must be punished and financially penalized for miss use of poor countryman money for own entertainment and luxury. These politicians are shameless fellow.  
   
 

narendra vyas [vyasnarenk@gmail.com] bikaner - 2011-07-16 16:38:05

 
  बहुत सुंदर जानकारी पढ़कर बहुत सी परतें साफ हुईं..  
   
 

bablu [mgmihirgoswami@gmail.com] bilaspur c.g - 2011-07-16 07:05:38

 
  जागते रहो, धन्यवाद रविवार! 
   
 

Urmil Chadha [urmilc@ yahoo.com] California.U. S.A. - 2011-07-15 19:50:50

 
  यह सब सुन कर मन दहल जाता है कि क्या किया जाये और क्या न किया जाये. हम दोष देते हैं जनता को और फरियाद करते रहते हैं कि करप्शन हटाओ....अब जनता बेचारी क्या करे ? जैसा राजा, वैसी प्रजा...वैसे, यह सब तो सुधरना ही चाहिये. 
   
 

Ishwar dost [] Goa - 2011-07-15 18:44:40

 
  अच्छा विश्लेषण, जिसमें जरूरी सवाल उठाए गए हैं।  
   
 

devesh tiwari [deveshtiwaricg@gmail.com] kolkata - 2011-07-15 08:27:21

 
  जिद्द सच्चाई को सामने लाने की....फिर वो चाहे राष्ट्रपति ही क्यों न हो...ये तो है पत्रकारिता... बहुत सुंदर जानकारी रविवार ने दी. आभार! 
   
 

Mani Iyer [rallismani@yahoo.co.in] USA - 2011-07-15 05:06:14

 
  No money should have been spent from the government\'s exchequer if it was a private visit. A photographer from newspapers duty is to take photos for spreading information with photos. What is serious is if foreigners can go near Pratibhaji why not Indians ? 
   
 

sunil chipde [] bilaspur - 2011-07-15 04:04:23

 
  अब्दुल कलाम सर के समय लोग जिस सम्मान से राष्ट्रपति के पद को देखते थे ...वैसा आदर प्रतिभा पाटिल ओह सॉरी प्रतिभा देवी सिंह पाटिल के प्रति कोई महसूस ही नहीं कर पाता. ज्ञानी जैलसिंह को उस दौर के लोग इंदिरा गाँधी का रुबर स्टांप कहते थे पर प्रतिभा जी के लिए तो ऐसा लगता है कि जैसे सोनिया जी को इतने बड़े सरकारी भवन में किसी को ठहराना था, सो प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ही सही. 
   
 

शकुन्तला बहादुर [] कैलिफ़ोर्निया - 2011-07-15 03:51:36

 
  बहती गंगा में सभी हाथ धोना चाहते हैं। फिर वे ही इस सुनहरे मौके से क्यों चूकतीं?
आपने इतने विस्तार से सारी जानकारी प्रस्तुत की है, जो भारतीय जनता के लिये अत्यन्त महत्त्व है । इसका पर्दाफाश करने में आपकी सजगता और साहस सराहनीय है।
कृपया इसके आगे की जानकारी भी अवश्य दें।
 
   
 

महेश गुप्त ’ख़लिश’ [mcgupta44@gmail.com] Delhi - 2011-07-14 10:44:59

 
  आप का समाचार पत्र इस जानकारी को जनता तक पहुँचा कर अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है. इस ख़बर को फ़ोलो करके भविष्य में भी जानकारी दीजिएगा. 
   
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