सुदीप ठाकुर की कविता
साहित्य
सुदीप ठाकुर की कविता
जगहें-1
हम कभी लौटकर नहीं जा पाते
उन जगहों पर
जहां हम जाना चाहते हैं बार-बार
वे जगहें हमारी स्मृतियों में
हमारी चेतना में होती हैं
जस की तस
हम स्मृतियों के साथ
वहां जाना चाहते हैं
अपनी पूरी चेतना के साथ बार-बार
हम वहां जाकर भी वहां नहीं पहुंच पाते।
जगहें- 2
जिन जगहों पर हम
बार-बार जाना चाहते हैं
वे जगहें वैसी नहीं होतीं
जैसी हम उन्हें छोड़ आते हैं
उनका कुछ हिस्सा
हमारे साथ चला आता है
हम वहां बचे होते हैं
वहां से विदा होने के बाद भी।
जगहें-3
कुछ जगहों पर
हम कभी पहुंच नहीं पाते
अंतहीन होती है वहां की यात्रा
दुर्गम होते हैं रास्ते
वहां की यात्रा कभी खत्म नहीं होती।
03.08.2011, 01.09 (GMT+05:30) पर प्रकाशित